आदिवासी वनवासी अधिकार सम्मेलन का हुआ आयोजन

दुद्धी, सोनभद्र। बुधवार को 2006 में बने वनाधिकार कानून को विफल बनाने का प्रयास सरकारों किया जा रहा है। इसी मकसद से मोदी सरकार द्वारा हाल में वनाधिकार संरक्षण नियम -2022 लाया गया है जिससे आदिवासियों व वनाश्रितों को बेदखल कर कारपोरेट्स को जमीनों का हस्तांतरण किया जा सके। हद तो यह है कि हाईकोर्ट द्वारा जंगल की जमीनों पर बसे आदिवासियों व वनाश्रितों की दावों के निस्तारण तक बेदखली व उत्पीडऩ पर रोक लगाने के आदेश के बावजूद मुकदमे दर्ज हो रहे हैं।

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जबकि आदिवासियों व वनाश्रितों को जितनी जमीनों पर पुश्तैनी तौर पर बसे हुए हैं, उस पर पट्टा दिया जाना चाहिए। उक्त बातें गोंडवाना भवन में आयोजित आदिवासी वनवासी अधिकार सम्मेलन में वक्ताओं ने कही। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र के पिछड़ेपन की मुख्य वजह सरकार की उपेक्षा है। इसलिए आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र को संविधान के पांचवीं अनुसूची में शामिल किया जाना चाहिए। वन उत्पादों पर आदिवासियों-वनाश्रितों का अधिकार देने का मुद्दा भी उठाया गया।

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कहा कि आदिवासियों की उपेक्षा का आलम यह है कि कोल समेत अन्य आदिवासी समुदाय अभी तक जनजाति के दर्जे से वंचित हैं। वक्ताओं ने आज देश में संविधान व लोकतंत्र खतरे में है, नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला जारी है। कारपोरेट हितैषी आर्थिक नीतियों से बेइंतहा बेरोजगारी, मंहगाई बढ़ी, व्यापार-कारोबार आदि सब कुछ चौपट हो रहा है। वक्ताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किये गए देश बचाओ मुहिम अभियान का हिस्सा बनने की अपील की।

कहा कि खेती किसानी पिछड़ी हुई है, रोजगार के अन्य साधन भी नगण्य हैं और मनरेगा में भी पर्याप्त काम न मिलने से बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। जनजाति का दर्जा नहीं मिलने से वनाधिकार कानून के लाभ समेत तमाम संवैधानिक अधिकारों से वंचित है। शिक्षा व स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, सहकारी समितियों के माध्यम से आदिवासियों समेत गरीबों को बिना ब्याज कर्ज और सस्ते दरों पर खाद, बीज , सिंचाई सुनिश्चित करने, शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों को सम्मेलन में उठाया गया। सम्मेलन में मंहगाई मुद्दा भी उठाया गया।

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सम्मेलन की अध्यक्षता पूर्व विधायक विजय सिंह गोंड एवं संचालन आदिवासी वनवासी महासभा के कृपाशंकर पनिका ने किया। सम्मेलन को पूर्व विधायक विजय सिंह गोंड, आइपीएफ के दिनकर कपूर, युवा मंच के संयोजक राजेश सचान, जिला पंचायत सदस्य सुषमा गोंड,जनकधारी गोंड, जुबेर आलम, आदिवासी वनवासी महासभा के कृपा शंकर पनिका, वन श्रमजीवी यूनियन की सुकालो गोंड, जय आदिवासी युवा शक्ति के नागेश्वर गोंड, आदिवासी अधिकार मंच के राजेन्द्र ओयमा, जेएसयू के जय मंगल सिंह गोंड, आदिवासी वनवासी महासभा से सेवा लाल कोल, राजेन्द्र सिंह गोंड, युवा मंच जिलाध्यक्ष रूबी सिंह गोंड समेत तमाम संगठनों के पदाधिकारी और वनाधिकार समितियों के अध्यक्ष व सचिवों ने भी सम्बोधित किया।

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    संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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