HIGHLIGHTS
• मुर्धवा और जमतिहवा नाला की चट्टाने है दुनियां के पुराने चट्टानों में एक
• अठारह सौ साल पुराने चट्टानों को संरक्षित नही किया गया तो मीट जायेगा एक धरोहर
सोनभद्र। खनिज संपदा और दुनिया के सबसे बृहद तथा पुराना सलखन फासिल्स पार्क के बाद एक हजार से लेकर अठारह सौ करोड़ पुराने मुर्धवा और रनटोला नाले के पत्थरों ने भू वैज्ञानिकों को शोध और अध्ययन के लिए नई राह दिखा दी है। सोमवार को बीएचयू,सहित दिल्ली, रुढ़की, पटना, कोलकता, गोहाटी, कानपुर, बेंगलूर, मुबई सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए शीर्ष भू वैज्ञानिकों और शोध छात्रो, एसिस्टेंस प्रोफेसरों ने म्योरपुर ब्लॉक मुर्धवा नाला और रन टोला स्थित जमतिहवा नाला का अध्ययन किया।

बतादे कि वैज्ञानिको ने दावा किया है कि दोनो नालो के पत्थर जिस तरीके से है उससे शोध करने वाले वैज्ञानिकों को सलरता से समझ में आ जाता है कि ये पत्थर कितने पुराने और महत्वपूर्ण है। बीएचयू के भू वैज्ञानिक डॉ वैभव श्रीवास्तव, देश के जाने -माने भू वैज्ञानिक धुर्व मुख चट उपाधाय, प्रो. निखिल मंडल, डा विश्वास, प्रो. संदीप बनर्जी आदि ने कहा है कि यह देश ही नहीं दुनिया के लिए भू वैज्ञानिकों को शोध क्षेत्र बन सकता है। जरूरत है की दोनो जंगलों के जिमेदार अधिकारी और जिला प्रशासन इसे संरक्षित कराएं और दोनो नालों पर किसी तरह के खनन से मुक्त रखा जाए। उन लोगो ने कहा कि ऐसा नहीं किया गया तो हजार से अठारह करोड़ वर्ष पुराना पत्थरों का इतिहास तो मिटेगा ही साथ ही एक अमूल्य धरोहर भी नष्ट हो जायेगा।

वही प्रो वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि टीम में देश भर के 65 शीर्ष वैज्ञानिक , प्रो. और शोध कर्ता पूरे दिन दोनो नालों के पत्थरों का अध्ययन किया हैं। अब देश के अन्य हिस्से से इस विषय क छात्र भी यहां शोध के लिए आयेंगे।प्रो वैभव ने हमारे संवाददाता से बातचीत के दौरान बताया कि मैं पिछले कई वर्षो से दोनो नालों का अध्ययन करता आया हूं। इस बार गर्व की बात है की दक्षिणांचल के इस क्षेत्र में देश भर के वैज्ञानिक पहुंचे है। इससे देश भर के भू वैज्ञानिक छात्र भी यहा आयेंगे। कहा कि इसका सरक्षण नही हुआ तो इन धरोहर रूपी पत्थरों का अस्तित्व मिट जायेगा।
इस दौरान जाने माने पर्यावरण कार्यकर्ता जगत नारायण विश्वकर्मा ने प्रभागीय वनाधिकारी मनमोहन मिश्रा से बात कर इन चट्टानों को संरक्षित करने का आग्रह किया है। रन टोला के प्रधान दिनेश जायसवाल ने भी पुराने धरोहरों को बचाने का आग्रह जिला प्रशासन से किया है।





