सकारात्मकता के प्रतीक थे महात्मा गांधी : प्रो. राम मोहन पाठक

HIGHLIGHTS

  • नन्हे मुन्ने बच्चों ने गांधी बन उनके संदेश को प्रसारित किया
  • शहीद उद्यान में सेमिनार का आयोजन
  • विभिन्न विचारधाराओं के वक्ताओं ने गांधी पर रखे अपने विचार
हर्षवर्धन केसरवानी
(जिला संवाददाता)

सोनभद्र। गांधी सकारात्मकता के प्रतीक थे,उनके स्मरण मात्र से एक प्रेरणा मिलती है। यह कहना था प्रोफेसर राम मोहन पाठक का जो गांधी जयंती पर शहीद उद्यान में आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में अपना संबोधन दे रहे थे। नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके श्री पाठक ने गांधी के स्वाभिमान , स्वावलम्बन और स्वभाषा के सिद्धान्तों की विस्तृत व्याख्या की । उन्होंने बताया कि गांधी की जिजीविषा की शक्ति को पूरी दुनिया ने महसूस किया।

सभी अतिथियों ने आयोजक विजय शंकर चतुर्वेदी के साथ गौरव स्तम्भ सहित महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया और गांधी वेशभूषा धारण किये छोटे बच्चों का स्वागत किया। संयोजक राहुल श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों का पुष्प गुच्छ से स्वागत किया ।आयोजन के स्वागताध्यक्ष किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य ओमप्रकाश त्रिपाठी ने सभी अतिथियों और वक्ताओं का स्वागत करते हुए सेमिनार के विषय आज़ादी का अमृत महोत्सव और गांधी की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

विशिष्ट अतिथि उपजिलाधिकारी रमेश कुमार ने गांधी के विश्व बंधुत्व भाव पर प्रकाश डाला । उनकी कविता – ‘ बड़ा दुश्वार है विचारों की आंधी होना, क्या आसान समझते हैं गांधी होना’ को लोगों ने खूब पसंद किया । बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिवंश कुमार ने गांधी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्हें युग पुरुष और विश्व व्यक्तित्व बताया। भारत स्वावलम्बन समिति के जिला संयोजक पूर्व विधायक तीरथराज ने गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के गांधी सिद्धांत को परिभाषित करते हुए पूर्वांचल के गांधी अमर सेनानी पँ महादेव चौबे का उल्लेख किया, उन्होंने बताया की प्रचीन समय में ब्राह्मण को हल की मुठिया पकड़ना वर्जित माना जाता था, लेकिन आत्मनिर्भर होने के लिए पँ महादेव चौबे ने स्वयं खेतों में हल चलाकर इस मिथक को तोड़ा।

कथाकार रामनाथ शिवेंद्र गांधी के सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह की व्याख्या करते हुए बनारस की उस घटना का उल्लेख किया जिसमें उन्हें भाषण देने से रोक दिया गया था, लेकिन उस भाषण को भारतीयों ने पूरा किया । गांधी के आर्थिक भारत को परिभाषित करते हुए भोलानाथ मिश्र ने गांधी की कर व्यवस्था, स्वरोजगार और रामराज्य के सिद्धांत पर प्रकाश डाला, राजेश द्विवेदी ने गांधी के ब्रम्हचर्य प्रयोग की व्याख्या करते हुए बताया कि मनुष्यगत कमजोरियों पर विजय प्राप्त करने के लिए गांधी ने यह प्रयोग किया और इसे स्वीकार भी किया। साहित्यकार पारसनाथ मिश्र ने मानवीय प्रज्ञा के प्रतिफल को गांधी का विचार बताया। डॉ किंशुक पाठक ने गांधी की पत्रकारिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। शिक्षिका अमृता सिंह ने गांधी द्वारा नारियों के सम्मान और आंदोलनों में उनकी भागीदारी पर विचार व्यक्त किया। शिक्षिका कौसर जहां सिद्दकी ने गांधी के अहिंसा के सिद्धांत की विशद व्याख्या की।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गांधीवादी विचारक और बनवासी सेवा आश्रम के अध्यक्ष अजय शेखर ने गांधी को समन्वय संस्कृति की प्रतिमूर्ति बताते हुए गांधी, भारतीयता और भारत में एका स्थापित की, उन्होंने कहा कि गांधी भारतीय सांस्कृतिक चेतना के प्रतिरूप हैं। इस अवसर पर कवियों ने कविता और गीतों के माध्यम से गांधी के आदर्शों पर प्रकाश डाला। जगदीश पंथी, प्रद्युम्न त्रिपाठी, जयश्री राय और कमलनयन तिवारी के रचना पाठ की खूब सराहना हुई। शिक्षिका शाजमा के देशभक्ति के गीत की खूब सराहना हुई।अपना दल के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य दिनेश बियार ने केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की तरफ से आयोजन और जनपदवासियों को गांधी जयंती की शुभकामना प्रेषित की ।

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कार्यक्रम संयोजक चन्द्र प्रकाश द्विवेदी सहित आयोजक टीम के सदस्य राकेश त्रिपाठी, क्रांति सिंह , अभिषेक मिश्रा ने सभी अतिथियों और वक्ताओं को अंगवस्त्रम और स्मृतिचिन्ह देकर अभिनंदन किया, शिक्षिका अंजू सिंह और पूनम और सनोज तिवारी , विशेष पांडेय ने कार्यक्रम को सफल बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई ।आकर्षण का केंद्र रहे बाल गांधी कम्पोजिट प्राथमिक विद्यालय के तीन छोटे बच्चों शिवम, शुभम और हिमांशु ने गांधी वेशभूषा धारण कर हाथ में तख्तियों के साथ गांधी के संदेश को प्रसारित किया बल्कि उनके प्रमुख संदेशों को माइक पर उदघोषित भी किया , शिक्षिका वर्षा वर्मा द्वारा गौरव स्तम्भ पर सजाई गयी रंगोली भी खूब सराही गयी, जिसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया ।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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