वाराणसी। राष्ट्र नायक अमर बलिदानी स्वाधीनता संग्राम सेनानी गोंडवाना शासक राजा शंकर शाह एवम् कुंवर रघुनाथ सिंह शाह के 165 वें शहादत दिवस पर जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान वाराणसी उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में रविवार को संस्थान के कार्यालय पर श्रद्धांजलि व पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दोनों सेनानियो के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया गया। वही संगोष्ठी का मुख्य विषय
” भारत की स्वाधीनता आंदोलन में गोंडवाना के आदिवासियों की योगदान ” रहा।

इस दौरान उत्तर प्रदेश राज्य पुरस्कार से सम्मानित तिरु बृजभान मरावी ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज जल,जंगल, जमीन का जन्म – जात रक्षक है और पर्यावरण का संरक्षक हैं। विदेशी आक्रांताओं से देश की रक्षा में गोंडवाना के शूरवीरों के शौर्य से इतिहास गवाह हैं लेकिन कुछ तथाकथित इतिहासकारों और राजनीतिक दलों की कमज़ोर इच्छाशक्ति के कारण गोंड आदिवासी जनजाति समाज की शौर्यगाथा को इतिहास में उचित स्थान नही मिल सका आज इस पावन अवसर पर राजा शंकर शाह एवम् कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान के शौर्य से प्रेरणा लेकर उनके योगदान को जन – जन तक पहुंचाना हैं। उन्होंने कहा कि उल्लेखित है कि अंग्रेज शासकों ने आज के ही दिन राष्ट्र नायक पिता – पुत्र को १८५७ की स्वाधीनता संग्राम के नेतृत्व करने के कारण गोंड राजा एवम् राजकुमार को धोखे से गिरफ्तार कर उन्हें तोप के मुंह पर बांधकर उड़ा दिया था। देश की आजादी मिलने पर गोंडवाना के २५८ शासकों ने अपने राज्य का विलय कर अखंड भारत गणराज्य का निर्माण किया जो राष्ट्रीय एकता के लिए त्याग और समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से बुधिराम गोंड, ओम प्रकाश गोंड, आनंद कुमार गोंड ,प्रभु गोंड, विनोद कुमार गोंड, शीला, पूजा, बलिराम, बृजेश, संगीता, मीना, मंजू गोंड सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।




