HIGHLIGHTS
- कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु वंदना व स्वागत से हुआ
- अंगवस्त्रम व स्मृति चिन्ह प्रदान कर शिक्षकों को किया गया सम्मानित

(जिला संवाददाता)
सोनभद्र। शिक्षक दिवस पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा में शिक्षकों के सम्मान में महाविद्यालय के प्राचार्य एवम प्रोफेसर (डॉ.) प्रमोद कुमार के दिशा निर्देशन में एवं इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सैनी के संयोजकत्व मे विभिन्न कार्यक्रमों का शानदार आयोजन कराया गया। जिसमें छात्र-छात्राओं द्वारा बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आशा कुमारी, शिवानी सिंह गरिमा सिंह, हर्षिता पांडे व अर्पिता पांडे के गुरु वंदना एवं स्वागत गीत गायन से हुआ।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. संतोष कुमार सैनी ने शिक्षक दिवस मनाए जाने के औचित्य व भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं द्वितीय राष्ट्रपति तथा प्रख्यात शिक्षाविद, दार्शनिक, कुशल राजनीतिज्ञ, प्रखर वक्ता भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जीवन, उनके व्यक्तित्व, कृतित्व एवं उपलब्धियों के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि “शिक्षक वह नहीं है जो विद्यार्थियों के दिमाग मे केवल तथ्यों को भरे, बल्कि शिक्षक वह है जो छात्र – छात्राओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करें।” शिक्षक ही देश के भविष्य का निर्माता है, शिल्पी है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) प्रमोद कुमार ने कहा कि शिक्षक उस प्रकाश पुंज की तरह है जो विद्यार्थियों के जीवन के अंधेरे को दूर कर उनके जीवन में सफलता रूपी प्रकाश को फैला कर उनके जीवन को आलोकित करता है।


वहीं विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर ( डॉ. ) राधाकांत पांडे ने कहा कि शिक्षक वह रोशनी है जो हमें जमीन से आसमान पर ले जाने की क्षमता रखता है। प्रोफेसर (डॉ.) के.के. सिंह द्वारा बताया गया कि हमें सिर्फ किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान देकर उनके भविष्य का निर्माण करना चाहिए। डॉ. महेंद्र प्रकाश ने बताया कि हमें जीवन में निरंतर कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए। इस दौरान डॉ. मीरा यादव, डॉ. विकास कुमार, डॉ. उपेंद्र कुमार, डॉ.राजेश प्रसाद, डॉ. अमूल्य कुमार सिंह, डॉ. विभा पांडेय, डॉ विजय प्रताप यादव, डॉ. महीप कुमार, डॉ. वैशाली शुक्ला ने भी अपनी स्टूडेंट लाइफ से जुड़े संस्मरणों को साझा करते हुए गुरु की महिमा पर अपने विचार व्यक्त किए।

छात्राओं में कुमारी आशा, कुमारी शिवानी सिंह, गरिमा सिंह ,हर्षिता पांडे, अर्पिता पांडे, प्रतिभा यादव, अपेक्षा अग्रहरि, पूजा, अंजलि,अंकिता, रुक्मिणी, निकिता, नेहा, संजना ने भी अपनी – अपनी कविताओं, विचारों एवं संस्मरणों के माध्यम से गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि गुरु ही सृष्टि का रचयिता भगवान ब्रह्मा, सृष्टि का पालनहार भगवान विष्णु एवं सृष्टि का नियंता भगवान शंकर है । गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। यदि एक बार भगवान एवं देवता रुठ जाए तो उन्हें गुरु की कृपा से मनाया जा सकता है, किंतु यदि गुरु रुठ जाए तो गुरु की कृपा के बिना अच्छे जीवन की कल्पना करना ही व्यर्थ है। यदि संपूर्ण पृथ्वी को कागज बना दिया जाए, सातों समुद्रों के जल को स्याही बना दिया जाए तथा सारे वनों के वृक्षों को लेखनी बना दिया जाए और उनसे गुरु के गुणों को लिखा जाए तो भी गुरु के गुणों एवं महिमा को लिख पाना संभव नहीं है अर्थात गुरु की महिमा को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता ।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) प्रमोद कुमार द्वारा महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों को माल्यार्पण कर, स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र, प्रमाणपत्र व लेखनी प्रदान कर उन्हे सम्मानित किया गया। कार्यक्रम प्रमोद केसरी, धर्मेंद्र, अरुण, महेश पांडे, सरफुद्दीन,राजकुमार, हर्षिता के पांडे, अर्पिता पांडे, गरिमा सिंह, शिवानी सिंह, आशा, प्रज्ञा, आशीष , अंजली, अंकिता, पूजा, प्रतिभा, रुक्मिणी, निकिता, नेहा , आकांक्षा,विकांक रंजन सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।






