संपूर्ण विश्व में सोनभद्र की महत्ता आज भी कायम है -दीपक कुमार केसरवानी

HIGHLIGHTS

  • सोनभद्र जनपद की प्रमुख ऐतिहासिक स्थल व स्वतंत्रता आंदोलन में सोनभद्र का योगदान विषयक व्याख्यान का हुआ आयोजन
  • कार्यक्रम में उपस्थित रहे महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं व शिक्षक गण
हर्षवर्धन केसरवानी
(संवाददाता)

ओबरा (सोनभद्र): डेढ़ अरब वर्ष प्राचीन सलखन के फॉसिल्स, 10,000 वर्ष पुरानी सोनभद्र के गुफा चित्र, आदिकाल से जनपद के जंगलों, वनों में निवास करने वाली आदिम जातियों की साहित्य, कला, संस्कृति के कारण संपूर्ण विश्व के भूतत्वविदो, पुराविदों, इतिहासकारों, साहित्यकारों, कलाकारों के आकर्षण का केंद्र बना रहा है जिसके कारण जनपद सोनभद्र की संपूर्ण विश्व में महत्ता कायम है।
उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, राजनैतिक सीमाओं से घिरा सोनभद्र जनपद भारत का एकमात्र जनपद है।

आदिकाल, वैदिक काल, उपनिषदकाल, पौराणिक काल, रामायणकाल, महाभारत काल मे वर्तमान सोनभद्र मगध राज्य से जुड़ा रहा, मध्यकाल में चुनार सरकार, आधुनिक काल में इलाहाबाद, बनारस एवं मिर्जापुर जनपद से जुड़ा रहा।
जनपद का विजयगढ़ दुर्ग, अगोरी किला, सोहरीगढ़, शिवालय, देवालय, मंदिर, मठ, अघोर साधकों के प्रमुख केंद्र गुप्त काशी की विशेषताओं की व्याख्या करते हैं।

1857- 1947 (आधुनिक इतिहास) तक यहां के स्थानीय क्रांतिकारियों, देशभक्तों, नेताओं, द्वारा ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ चलाए गए ससस्त्रआंदोलन एवं सोनभद्र जनपद के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने वाले वीर कुंवर सिंह, गांधीवादी आंदोलन का नेतृत्व करने वाले क्रांतिकारी बलराम दास केसरवानी, मिर्जापुर के गांधी पंडित महादेव प्रसाद चौबे, दुद्धि के विनोवा किस्मत राम, जनपद की एकमात्र महिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजेश्वरी देवी,अहरौरा के बद्री प्रसाद “आजाद”सहित पूर्ववर्ती जनपद मिर्जापुर एवं वर्तमान जनपद सोनभद्र के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। इन सेनानियों की गौरव गाथा रॉबर्ट्सगंज के चाचा नेहरू बाल उद्यान, शहीद उद्यान परासी, गौरव वाटिका तियरा, ऊंचडीह के क्रांति पथ पर अवस्थित 10 सेनानियों के गांव, जनपद के सभी ब्लॉक मुख्यालयों पर अवस्थित गौरव स्तंभ पर लिखे इतिहास, सेनानियों के नामों की पट्टीका एवं अन्य स्थलों पर जाकर देखा सुना जाना जा सकता है।

सोनभद्र में अवस्थित फॉसिल्स पार्क, इको पॉइंट, महुअरिया के पर्यटन केंद्र, आदि प्राकृतिक पर जाकर पर्यटक आनंद उठा सकते हैं एवं कलेक्ट्रेट प्रांगण के गांधी उद्यान में 140 फीट के पोल पर आजाद हवाओं में लहराते हुए तिरंगे ध्वज को देखकर गौरवान्वित महसूस कर सकते हैं।
उपरोक्त विचार इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी ने राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा में आयोजित सोनभद्र जनपद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, प्रमुख ऐतिहासिक स्थल, स्वतंत्रता आंदोलन में सोनभद्र का योगदान विषय पर आयोजित व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किया।

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वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ प्रमोद कुमार ने किया और संचालन कार्यक्रम के संयोजक रहे डॉक्टर संतोष कुमार सैनी ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय की छात्रा आशा, हर्षिता पांडे, गरिमा सिंह व शिवानी सिंह द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत का गायन किया।
इस अवसर पर डॉ.महेंद्र प्रकाश, डॉ. संतोष कुमार सैनी, डॉ रंजीत सिंह, डॉ. महीप कुमार, डॉ. विजय प्रताप सिंह यादव, कार्यालय अधीक्षक प्रमोद केसरी , आशीष, संजीव, चंदन सैनी, प्रज्ञा मिश्रा सहित महाविद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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