सरकारी नौकरी छोड़कर कूद पड़े थे स्वतंत्रता आंदोलन में सैयद सखावत हुसैन

HIGHLIGHTS

  • अंग्रेज सरकार ने जप्त कर ली थी इनकी सारी संपत्ति
  • जेल से छूटने के 1 माह बाद स्वतंत्रता की बलिवेदी पर शहीद हो गए थे
  • जेल में इनको दी गई थी भयानक यातनाएं

सोनभद्र। आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र के दुद्धी क्षेत्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की अमर गाथा से ज्यादातर लोग अपरिचित है।
सेनानी परिजन एवम इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-” स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में सैयद सखावत हुसैन का नाम अग्रणी है।आज़ादी के इस दीवाने अपनी सरकारी नौकरी, सम्पत्ती , अपनी जान देश पर न्योछावर कर दिया। इनका जन्म सन 1870 ई. मे दमगडा ग्राम जज़ला इलाहाबाद के सैय्यद वंश मे हुआ था । आपके पिता का नाम सय्यद मीर अली मुहम्मद था । पराधीनता के काल में दुद्धी ब्रिटिश हुकूमत का एक स्टेट था, युवा सैय्यद सख़ावत हुसैन पटवारी बनाकर के भेजे गए बाद में मास्टरी,अरायज़ नवीसी, और स्टाम्प फ़रोश हुये । सरकारी नौकरी में होने के बावजूद उन्होंने महात्मा गांधी से प्रेरणा ग्रहण कर अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ़ आंदोलन में स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने लगे महात्मा गांधी जी द्वारा चलाए गए स्वदेशी प्रचार, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार लगानबंदी, नशाबंदी आंदोलनों में भाग लेने के कारण ब्रिटिश हुकूमत के आंखों की किरकिरी बन चुके थे।

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उस समय दुद्धी घने वनों एवं वन्य जीवों से भरा एक पहाडी क्षेत्र था जिसमें आवागमन के कोई संसाधन नहीं था एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना बडा ही दुष्कर कार्य था था बावजूद इसके दुद्धी के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी युसुफ़ मसीह, रामानंद पांडे, बेनी माधव पांडे, पुरुषोत्तम सिंह, सुक्खन अली एवं सुखलाल खैरवार आदि के साथ अंग्रेज़ी हुकूमत के विरुद्ध आंदोलन का प्रचार प्रसार करते रहे।
सन 1921 में आपने असहयोग आंदोलन में भाग लिया जिसके परिणाम स्वरूप 22 अप्रैल सन
1922 को लगानबंदी आंदोलन करते समय आप को गिरफ्तार कर लिया गया। सरकारी कर्मचारी होने के कारण इन्हें जेल में भयंकर शारीरिक मानसिक यातनाएं दी गई सरकार ने दुद्धी में उनकी समस्त संपत्ति जप्त कर कर उस पर पशु चिकित्सालय एवं सरकारी आवास बनवा दिया।

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1925 ई. मे 55 की आयु मे उनका स्वगतवास हुआ । इनके पौत्र एवं वाररस “हसन सोनभद्री” (सय्यद क़मरुल हसन) के अनुसार देश के जाने माने शायर एवं लेखक है सय्यद सख़ावत हुसैन के अनुसार जेल में भयंकर शारीररक यातनाओं से उनका शरीर पूरी तरह से
टूट चुका था जिसके कारण जेल से वापस आने के बाद एक वर्ष बाद इनकी मृत्यु हो गई।
आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में जब हम आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं ऐसे वक्त में देश पर अपनी जान निछावर करने वाले महान देशभक्त बलिदानी सैयद सखावत हुसैन भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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