आज आप रामलीला देखकर रोमांचित जरूर हो जाते होंगे, बचपन की खट्टी मीठी यादें ताजा हो जाती होंगी। उत्तर प्रदेश का अयोध्या जनपद भगवान श्री राम की जन्मभूमि- कर्मभूमि होने के कारण रामलीला मंचन की परंपरा आज भी गांव, शहर, कस्बों में कायम है। लोककला रामलीला
स्वस्फूर्त होकर रामलीला का मंचन करने वाले लोक कलाकारों के आर्थिक प्रोत्साहन एवं इस कला को जीवंत बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार द्वारा रामायण कल्चर मैपिंग योजना संचालित किया जा रहा है।
संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के अयोध्या शोध संस्थान लखनऊ निदेशक डॉक्टर लव कुश द्विवेदी द्वारा इस योजना के अंतर्गत सोनभद्र जनपद के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर/उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के नामित विशेषज्ञ/ इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी से लिए गए साक्षात्कार का मुख्य अंश-

आप हमारे पाठको को रामायण कल्चर मैपिंग योजना के बारे में बताएं?
इस योजना की शुरुआत देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रामलीला के उन कलाकारों के लिए किया गया है जो कोरोना संक्रमण काल के कारण 2 वर्षों तक आर्थिक तंगी के शिकार हो गए थे, अर अर्थोपार्जन के लिए कलात्मक रामलीला मंचन विधा को छोड़कर अन्य कार्यों में लग गए थे, ऐसे कलाकारों को रामलीला मंचन से पुनः जोड़ने, कलाकारों को रोजगार परक बनाने के उद्देश्य रामायण कल्चर मैपिंग योजना की शुरुआत की गई है।
क्या इस योजना की शुरुआत अपने उत्तर प्रदेश में हो चुकी है?
जी हां! इस योजना की शुरुआत संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के अयोध्या शोध संस्थान लखनऊ द्वारा गोंडा जनपद से शुरू हो चुकी है, इस योजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद के ग्रामीण, नगरी, शहरी, क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर स्थानीय रामलीला मंडली में स्थानीय कलाकारों द्वारा रामलीला में श्री राम से वानर तक की भूमिका का निर्वहन करने वाले कलाकारों की यथास्थिति का पता लगाना है, इसके लिए प्रदेश के मथुरा, मेरठ, बलिया, कौशांबी, अमेठी, फतेहपुर, सोनभद्र जनपद के कलाकारों के अभिलेखीकरण का कार्य अभिलेखीकरण हेतु डिस्टिक कोऑर्डिनेटर अयोध्या शोध संस्थान लखनऊ के निदेशक डॉ लवकुश द्विवेदी द्वारा नामित किया गया है और कलाकारों केअभिलेखीकरण का कार्य आरंभ हो चुका है, अब तक सो संस्थान द्वारा जारी प्रथम सूची में श्री रामलीला परिषद रेणुकूट, रामलीला समिति कुसुम्हा, सोनभद्र आदर्श रामलीला समिति करारी, रामलीला परिषद तरावा का नाम सूचीबद्ध किया जा चुका है। निश्चित अवधि के बाद कलाकारों की सूची अयोध्या शोध संस्थान लखनऊ को प्रेषित की जाएगी तत्पश्चात कलाकारों के कलात्मक प्रतिभा को संस्कृति विशेषज्ञों द्वारा स्थानीय स्तर पर परखा जाएगा। इन कलाकारों को अलग-अलग श्रेणीवार सूची बनाकर उनको रोजगार परक बनाया जाएगा, कलाकारों की योग्यता के आधार पर देश-विदेश में होने वाले आयोजनों में प्रतिभा प्रदर्शन का अवसर प्राप्त होगा। संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा कलाकारों की ई-बुक प्रकाशन की योजना है जिसमें प्रदेश के 75 जनपद के कलाकारों का बायोडाटा, मोबाइल नंबर, ईमेल एड्रेस, दर्ज होगा। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभाग कलाकारों से सीधा संपर्क स्थापित कर सकेगा।

इस योजना के पूर्व कलाकारों का अभिलेखीकरण हुआ था?
जी नहीं! 4 मार्च 1989 को मिर्जापुर जनपद को विभाजित कर सोनभद्र जनपद की स्थापना हुई थी, तब से लेकर आज तक जनपद, मंडल, प्रदेश, देश स्तर पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा है। जनसंपर्क के आधार पर कार्यक्रम की सूचना कलाकारों तक पहुंचाई जाती रही है, इसी आधार पर कलाकारों का चयन भी होता था, मंडल में विंध्य महोत्सव जनपद में आदिवासी लोक कला महोत्सव, सोन महोत्सव आदि समितियों का मैं सदस्य हूं, यूपी महोत्सव के लिए कलाकार चयन समिति का मंडलीय सदस्य मुझे नियुक्त किया गया है। कलाकारों तक पहुंचने में काफी धन खर्च हो जाता था,ई-बुक तैयार हो जाने के बाद कलाकारों से संपर्क करने में काफी सुविधा होगी।

जनपद में आयोजित होने वाले रामलीला पर प्रकाश डालें?
उत्तर प्रदेश का अयोध्या जनपद भगवान श्री राम की जन्मभूमि रही है और रामायण से जुड़े ज्यादातर स्थल उत्तर प्रदेश में अवस्थित है। रामकथा यहीं से निकलकर विश्व भर में फैली, पौराणिक नाम वाले विंध्य पर्वत के दक्षिण में बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ राज्य की सीमाओं से घिरा उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर बसा सोनभद्र जनपद आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के हृदय में भगवान राम बसते हैं, दुख में हे राम, पीड़ा मे हरे राम आश्चर्य मे अरे राम, लज्जा में हाय राम, शपथ में राम दुहाई, अनिश्चितता में राम जाने, अचुकता में रामबाण, मृत्यु में राम नाम सत्य है, सुशासन में राम राज्य राम सास्वत, पुनर्नवा होते हुए आराम, विराम, अभिराम, उपराम, निर्बल के बल राम है ऐसी विशेषताओं से युक्त सोनभद्र के ग्रामीण, नगरी, शहरी इलाकों में स्थानीय कलाकारों द्वारा राधेश्याम रामायण, श्री रामचंद्रिका, साकेत, प्रियप्रवास, रघुराज रामायण, रामचरितमानस सहित स्थानीय ग्रंथों के आधार पर तैयार गद्य और पद्य शैली में संवाद लोक वाद्य यंत्रों पर संगीतमय पाठ को कलाकार प्रसंगवश लोकगीत, लोक कहावतें, मुहावरे, लोकोक्तियो को अपने संवाद में समाहित कर दर्शकों को रामकथा के लोक रंग में रंग देते हैं, रामलीला में व्यास के निर्देशन में रामलीला का मंचन होता है, रामलीला के सभी पात्र पुरुष होते हैं लेकिन रेणुकूट में आयोजित रामलीला में स्त्री पात्रों की भूमिका स्त्रियां ही निभाती हैं यहां की रामलीला में शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य की मुख्य भूमिका होती है, नारद मोह,सीता हरण, राम जन्म का प्रसंग नृत्य नाटिका के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है, रामलीला के सभी पात्र अव्यवसायी,शौकिया, हर धर्म- मजहब, जाति के होते हैं उनमें कलात्मक बोध होना चाहिए।

रामायण कल्चर मैपिंग योजना में कलाकारों को सम्मिलित होने के लिए क्या करना होगा?
सोनभद्र जनपद में निवास करने वाले रामलीला सहित किसी भी सांस्कृतिक विधा के कलाकार, रामलीला मंडली के संचालक एक सादे कागज पर विधा, दल नायक का नाम, राम लीला मंडली के संचालक, अध्यक्ष का नाम, पिता का नाम, पात्र, पता, मोबाइल न०, ई-मेल एड्रेस, पैन कार्ड, आधार कार्ड नंबर, पासपोर्ट साइज की फोटो चिपका कर विवरण हाथ से लिखे अथवा टाइप कराएं। रामलीला मडली के अध्यक्ष एक सादे कागज पर पात्र, कलाकारों का नाम अथवा अन्य सांस्कृतिक विधाओं के दल नायक कलाकारों का अलग पन्ने पर नाम लिखकर फॉर्म के साथ प्रमाण पत्र संलग्न कर जिला सूचना कार्यालय में जमा करें अथवा फॉर्म सहित अन्य प्रमाण की फोटो खींचकर मेरे व्हाट्सएप नंबर 91 25 56 8353 पर सेंड कर सकते हैं।
मेरा आप सभी कलाकार भाइयों से बहनों से निवेदन है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना का लाभ उठाएं और रोजगारपरक बने।




