आदिवासी जातियों में आज भी जीवंत है द्रविड़ सभ्यता एवं संस्कृति – दीपक कुमार केसरवानी

HIGHLIGHTS

  • आदिवासियों की परम्परागत नृत्य-गीत की प्रस्तुति एवं संकलन’’ विषयक गोष्ठी का हुआ आयोजन
  • आदिवासी समाज की सांस्कृतिक दलों द्वारा नृत्य-गीत की दी गई प्रस्तुति
हर्षवर्धन केसरवानी
(संवाददाता)

सोनभद्र। बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़ राज्य की सीमाओं से घिरा उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर अवस्थित संपूर्ण देश का एकमात्र जनपद सोनभद्र पर आदिवासी गोड़ राजाओं का शासन आदिकाल से रहा है। आदिवासी संस्कृति, कला, साहित्य से भरपूर सोनभद्र जनपद आदिवासियों की आदि भूमि रही है और यहां के जंगलों, पहाड़ों, नदियों, के किनारों पर अवस्थित गुफाओं, कंदराओ मे निर्मित गुफाचित्रों के कलाकारों के बंशधर है आज की वर्तमान आदिवासी जातियां, इनकी संस्कृति में द्रविड़ सभ्यता जीवंत है, गोंडवाना लैंड पर गोड राजाओं का शासन रहा है, विश्व के सभी देशों मे आदिवासी जातियां अपनी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति, कला को जीवंत बनाए हुए हैं। भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में आदिवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है इन्होंने किसी भी विदेशी आक्रांताओं के अत्याचारों का जमकर मुकाबला किया इनके संघर्षों की कहानी भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज है।

आजादी के बाद भारतीय संविधान
में आदिवासी जातियों को जनजाति की मान्यता प्रदान कर इन्हें सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक तौर पर मजबूत बनाया और आदिवासी समुदाय की स्वाधीन भारत में जन्मी देश की प्रथम आदिवासी समुदाय की द्वितीय महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू विश्व के आदिवासी समाज के लिए उदाहरण है।
उपरोक्त विचार आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के अंतर्गत संगीत नाटक अकादमी भारत सरकार नई दिल्ली व जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘उत्तर प्रदेश राज्य के गोंड आदिवासियों की परम्परागत नृत्य-गीत की प्रस्तुति एवं संकलन’’ विषयक पर ग्राम पंचायत बरवा टोला, विकास खंड- बभनी के सभागार मे आयोजित कार्यक्रम में आदिवासी, संस्कृति, साहित्य, कला के अध्येता, इतिहासकार, संस्कृति विशेषज्ञ संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश लखनऊ, रामायण कल्चर मैपिंग योजना के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर दीपक कुमार केसरवानी ने मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किया।

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इस अवसर पर कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रहे बरवाटोला के ग्राम प्रधान राम प्रताप ने कहा की वर्तमान आदिवासी संस्कृति को बिलुप्त होनो से बचाने के भावी पिढ़ी का आगे आना होगा जिससे ग्रामीण संस्कृति को जिन्दा रखा जा सके।
वही कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संस्थान के सचिव/प्रबंधक बृजभान मरावी ने कहा की वर्तमान में सम्पूर्ण आदिवासी समाज की नृत्य-गीत, संस्कृति, परम्पपरा को संरक्षण की जरूरत है। इसके लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकार की आजादी के अमृत महोत्सव के अन्तर्गत अनेक कार्यक्रम आयोजन कर रही है

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उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में जनपद सोनभद्र, वाराणसी, मीरजापुर चन्दौली आदि सांस्कृतिक रूप से सम्पन्न जनपद हो इसके लिए संस्थान का प्रयासरत है।
इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि/ इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी द्वारा गोंड विरांगना महारानी दुर्गावजी जी के चित्र पर माल्यापर्ण एवं दी प्रज्जवल कर किया।इस अवसर गोंड आदिवासी समाज की सांस्कृतिक दलों द्वारा करमा, शैला, गोंडी डोमकच आदि नृत्य-गीत की प्रस्तुति की गई।
इस अवसर पर मुख्य रूप से हरी प्रसाद पच्ची, विनोद कुमार, पवन कुमार, मुन्नी लाल, संदीप कुमार, तारा सिंह, संगीता देवी, प्रमिला देवी सहित आदि ग्राम व क्षेत्र के लोग उपस्थित रहे।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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