संगीतालय ही गुरुकुल है- दीपक केसरवानी

HIGHLIGHTS

  • गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित हुआ संगीत का कार्यक्रम
  • प्रयाग संगीत समिति प्रयागराज से संबद्ध सुर संगम संगीतालय के शिष्यों ने शास्त्रीय संगीत की दी आकर्षक प्रस्तुति
  • हवन- पूजन, अनुष्ठान से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
  • संगीत गुरुओं के निर्देशन में हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम
हर्षवर्धन केसरवानी
(संवाददाता)

सोनभद्र। संगीतालय गुरुकुल है, यहां पर शास्त्रीय संगीत के संस्कार से संस्कारित करते हैं संगीत के गुरु। संगीत के मधुर सुर- ताल- गीत आदिकाल से सभी चराचर जीव- जंतु, पेड़- पौधो को नव जीवन प्रदान करते रहे हैं। वर्तमान परिवेश में संगीत थेरेपी के माध्यम से जटिल रोगों की चिकित्सा भी की जा रही है। भारतीय शास्त्रीय संगीत का वर्णन हमारे वेदों में किया गया है और आज भी वैदिक कालीन परंपरा संगीत के माध्यम से जीवित है तमाम प्रकार के सांस्कृतिक संक्रमण के बावजूद प्रत्येक संगीतालय में गुरु- शिष्य की परंपरा आज भी विद्यमान है भगवान शिव सारे जगत के गुरु हैं, आज गुरु पूर्णिमा के दिन उन्होंने सप्त ऋषियों को योग की शिक्षा प्रदान की थी।

आज ही के दिन महाभारत के रचनाकार वेदव्यास की जयंती भी मनाई जाती है, आज ही के दिन भगवान बुद्ध को बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्ति हुई थी। भारतीय समाज एवं संस्कृति में ईश्वर से भी उच्च पद गुरु को प्रदान किया गया है और यह परंपरा अनंत काल तक कायम रहेगी।
उपरोक्त विचार वरिष्ठ साहित्यकार एवं संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश लखनऊ के अयोध्या शोध संस्थान द्वारा संचालित रामायण कल्चर मैपिंग योजना के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर दीपक कुमार केसरवानी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज के सुर संगम संगीतालय में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किया।
कार्यक्रम में संगीतालय के प्रबंधक गुरु विनीत नंदन ने मुख्य अतिथि को सम्मानित करते हुए कहा कि-“गुरु पूर्णिमा हमारा आदिकालीन पर्व है और इस अवसर पर संगीत से जुड़े हुए सभी शिष्यगणो अपने- अपने गुरुकुलो मे उपस्थित होकर गुरु वंदना करनी चाहिए प्राचीन काल में गुरु को त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) एवं माता- पिता- भाई- बंधु- मित्र आदि उपाधि से विभूषित किया गया है।

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कार्यक्रम में गुरु विनीत नंदन, श्वेता केसरी, गिरीश सिंह, परवेज, शिवम केसरी, प्रमोद श्रीवास्तव, गुंजन श्रीवास्तव, शिवा राम सिंह के कुशल निर्देशन में आराधना नंदन, दिशिता, बीनू, अनुष्का, अंशिका, आरुषि, रोहित, आर्यन, अनन्या (शास्त्रीय नृत्य) नैतिक सिंह, चिराग कुशवाहा, ऋषभ नंदन, आशीष (तबला वादन) प्रतीक सिंह, धर्मेंद्र विश्वकर्मा, (बांसुरी वादन) राहुल, साक्षी, संध्या, अर्चित, अदिति, अस्मिता, अग्रिम (गायन) प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ हवन, पूजन, अनुष्ठान,मां सरस्वती चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना, गुरु वंदना से हुआ। वही कार्यक्रम का सफल संचालन गुरु श्वेता केसरी ने किया। इस अवसर पर नगर के साहित्यकार, पत्रकार, विशिष्ट नागरिक एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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