जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान वाराणसी के तत्वावधान में मध्यकालीन भारत की राष्ट्रीय एकता में महान गोंडवाना साम्राज्य का योगदान’’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
HIGHLIGHTS
- अतिथियों द्वारा महारानी दुर्गावती के मूर्ति पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
वाराणसी। लोकमाता वीरांगना महारानी दुर्गावती के 458वॉ स्मृति बलिदान दिवस के अवसर पर शुक्रवार को वाराणसी के मैदागिन स्थित पराड़कर स्मृति भवन के सभागार में जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान वाराणसी के तत्वावधान में मध्यकालीन भारत की राष्ट्रीय एकता में महान गोंडवाना साम्राज्य का योगदान’’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे हीरा सिंह पांग्ती – अपर महाप्रबंधक, बीएचईएल (भेल) वाराणसी ने महारानी दुर्गावती जी के मूर्ति पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्जवलन कार्यक्रम का शुभारंभ किया।


इस दौरान मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि गोंड वीरांगना महारानी दुर्गावती का मध्यकालीन भारत की राष्ट्रीय एकता में गोडंवाना साम्राज्य की अहम भूमिका रही है। वीरांगना महारानी दुर्गावती का शौर्य और बलिदान देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक विख्यात है तथा लोक माता के रूप में जन-जन के हृदय में व्याप्त है। गोंडवाना साम्राज्य के स्वर्णिम इतिहास मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड सहित 258 रियासतों ने आजादी के बाद विलय कर भारत की राष्ट्रीय एकता का बुनियाद खड़ा किया है। वर्तमान समय में गोंड जनजाति अपने संवैधानिक ह्क-हकूक के लिए संघर्षरत है।


संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ उर्वशी गहलौत, एसोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, महिला महाविद्यालय, बी.एच.यू, ने अपने व्याख्यान में कहा कि आदिवासी जनजाति समाज की ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धरोहर इस देश की मूल पहचान है। महान गोंडवाना साम्राज्य अपनी न्याय प्रियता एवं लोक कल्याण हेतु मध्य कालीन भारत देश के विभिन्न भागों में ऐतिहासिक निर्माण कराये है, जो धरोहरों के रूप में आज भी हमारे बीच में वाराणसी, जौनपुर, चन्दौली, सोनभद्र, मिर्जापुर सहित अन्य जनपदों मेें विद्यमान है। इन पुरातात्विक अवशेषो को नई शिक्षा नीति पाठ्क्रम में जनश्रुतियों को संकलित कर महान गोंडवाना साम्राज्य के कृतियों को देश के सामने लाया जा सकता है।

वही कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि रही मीना श्रीवास्तव, जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) वाराणसी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पूर्वाचल की सबसे बड़ी जनजाति गोंड जनजाति है जिसका गौरवशाली इतिहास है। जनपद वाराणसी में बड़ी संख्या मेें गोंड जनजाति के समाज लोग रहते है। जिनके विकास एवं उत्थान हेतु विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का संचालन जनपद वाराणसी में समाज कल्याण विभाग, लखनऊ के अनुभाग-तीन द्वारा जनजाति समाज के जनजाति विकास विभाग द्वारा किया जा रहा है।

कार्यक्रम में अतिथि निखिल गुप्ता, जिला युवा अधिकारी, नेहरू युवा केन्द्र, (युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार) वाराणसी ने कहा कि जनजाति युवाओं में प्रतिभा की कमी नही है बस उन्हें मार्गदर्शन एवं अवसर की आवश्यकता है
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के संरक्षक हरीश अग्रवाल ने किया तथा अतिथियों का स्वागत संस्थान अध्यक्ष डॉ बनवारी लाल गोंड ने स्मृति चिन्ह एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर किया। वही कार्यक्रम का संचालन डॉ रूक्मिणी चौधरी, असिस्टेन्ट प्रोफेसर, दिग्विजयनाथ पी.जी. कॉलेज, गोरखपुर विश्वविद्यालय ने किया। इस अवसर पर जनजाति समाज के हस्तशिल्पकारों एवं विविध उल्लेखनीय कार्य करने वाले को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन सचिव/प्रबंधक बृजभान मरावी ने किया। संगोष्ठी में मुख्य रूप से विनोद कुमार, बलिराम, भैयालाल, अरविन्द गोंड, बृजेश कुमार, बेवी शाह, मनभावती देवी सहित सैकड़ो आदिवासी जनजाति के लोग उस्थित रहे।

