नौका टोला में रानी दुर्गावती के स्मारक स्थल की नींव रखी गई थी 24 जून 1999 को

HIGHLIGHTS

  • भूमि दान में दिया था भगवंता पठारी ने
  • भूमि पूजन किया था आदिवासी नेता रामप्यारे पनिका ने।स
  • लखन के नवाटोला में मनाया जाता है प्रतिवर्ष रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस एवं जयंती।
हर्षवर्धन केसरवानी
(संवाददाता)

सोनभद्र। जनपद के अंतिम छोर के सीमावर्ती राज्य मध्य प्रदेश स्थित गोंडवाना राज्य की राजधानी जबलपुर से मुगलों के शोषण और अत्याचार के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति करने वाली वीरांगना रानी दुर्गावती की त्याग और बलिदान की गाथा भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज है।
रानी दुर्गावती ने मुगल साम्राज्य के विरुद्ध उस समय बगावत किया जब मुगलों का पूरे देश में आतंक छाया हुआ था, भारतीयों पर मुगल शासक तमाम प्रकार के अत्याचार कर रहे थे, धर्म परिवर्तन करा रहे थे, देशी राजाओं पर आक्रमण कर उनके राज्यों को अपने राज्य में मिला रहे थे।

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रानी दुर्गावती को मुगलों का अत्याचार बर्दाश्त नहीं हुआ उनकी राजधानी जबलपुर से उठी विद्रोह की चिंगारी ने स्वतंत्रता आंदोलन का रूप ले लिया था। आदिवासी समुदाय के गोड जाति की महारानी दुर्गावती मुगलों की विशाल सेना से भले ही जीत हासिल नहीं कर पाई, लेकिन उन्होंने बड़े ही धैर्य, साहस, निर्भीकता के साथ मुगलिया सेना का सामना किया और वीरगति को प्राप्त हुई।
जनपद के सीमावर्ती राज्य मध्य प्रदेश के जनपद जबलपुर के पास बरेला नामक स्थान पर महारानी दुर्गावती की समाधि स्थल है जहां पर प्रत्येक वर्ष 24 जून को गोड़ समाज के लोग महारानी दुर्गावती को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए भारी संख्या में पहुंचते हैं और तमाम प्रकार के कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है।

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इन आयोजनों की श्रृंखला में हमारा सोनभद्र भी अग्रणी रहा है। महारानी दुर्गावती के बलिदान दिवस, जयंती के अवसर पर वीरांगना महारानी दुर्गावती देवी सेवा समिति सलखन नौका टोला सोनभद्र द्वारा श्रद्धांजलि एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। महारानी दुर्गावती के बलिदान दिवस, जयंती को मनाए जाने के मूल में स्थानीय सलखन गांव के स्वर्गीय भगवंता पठारी पुत्र स्वर्गीय राम रतन पठारी रहे हैं। गोंडवाना वीरांगना महारानी दुर्गावती देवी स्मारक स्थल बनाने के लिए अपनी निजी कास्त की साढ़े सात विस्वा भूमि दान में दे दिया था।

24 जून 1999 (महारानी दुर्गावती बलिदान दिवस) के अवसर पर नौका टोला सलखान में दानदाता भगवंता पठारी की उपस्थिति, आदिवासी नेता, पूर्व सांसद, विधायक रामप्यारे पनिका के मुख्य आतिथ्य, दशमी प्रसाद गोड की अध्यक्षता, महेंद्र सिंह के संचालन में भूमि पूजन मुख्य अतिथि द्वारा किया गया था। इस प्रथम आयोजन में कोमल प्रसाद गोंड, शिवनाथ प्रसाद गोंड, जगदीश प्रसाद गोंड, बैजनाथ प्रसाद गोंड, रामजियावन गोंड, देवनारायण गोंड, रंगलाल पोया, रमाशंकर पोया, अमर बहादुर सिंह गोंड, गुलाब प्रसाद गोंड, महेंद्र सिंह गोंड, प्रहलाद सिंह आयम, हीरालाल मरकाम, श्री राम टेकाम एडवोकेट विशिष्ट जन, ग्रामीण उपस्थित रहे इस कार्यक्रम में महारानी दुर्गावती के त्याग बलिदान पर उपस्थित अतिथियों ने अपना अपना विचार व्यक्त कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया था।

ग्राम पंचायत सलखन की ग्राम प्रधान श्रीमती नसीमा द्वारा वर्ष 2018 में ईंट का सड़क एवं चबूतरे का निर्माण कराया गया।
लगभग 22 वर्षों से गोंडवाना वीरांगना महारानी दुर्गावती सेवा समिति के तत्वधान में वीरांगना महारानी दुर्गावती का बलिदान दिवस एवं जयंती मनाया जाता रहा है।
समिति के सदस्य एवं पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश शासन से यह मांग किया कि आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में जब संपूर्ण देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृतियों को संजोए रखने के लिए शासन द्वारा मूर्तियों, स्मृति द्वार के स्थापना की घोषणा की जा चुकी है ऐसे मे सलखन के नौका टोले में पूर्व में स्थापित चबूतरे पर महारानी दुर्गावती की विशाल प्रस्तर प्रतिमा की स्थापना कर इनकी स्मृतियों को सजोने का कार्य किया जाना चाहिए। तभीअमृत महोत्सव मनाए जाने का लक्ष्य पूरा होगा।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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