वाराणसी। संत कबीर के 624वें प्राकट्य वर्ष के उपलक्ष्य में मंगलवार को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की स्वायत्तशासी संस्था, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज द्वारा संत कबीर अकादमी, मगहर, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के सहयोग से आज़ादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत कबीर महोत्सव का आयोजन काशी के अस्सी घाट पर किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष, पद्मश्री से सम्मानित पंडित राजेश्वर आचार्य ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से साथ आनंद कुमार, विशेष सचिव, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश, प्रो. सुरेश शर्मा, निदेशक, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, एडीएम सिटी गुलाबचंद, उप जिलाधिकारी डॉ ज्ञान प्रकाश यादव एवं क्षेत्रीय पुरातत्व एवं सांस्कृतिक अधिकारी डॉ सुभाष चंद्र यादव की उपस्थित रही।
कार्यक्रम का आरम्भ व्यख्या केन्द्र उदय प्रताप पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा चैती गायन की प्रस्तुति निर्देशन ममता शर्मा के निर्देशन में हुआ।

इसके उपरांत दूसरी धीरेंद्र मोहन एवं दल द्वारा कबीर बैंड एवं भाव नृत्य की प्रस्तुति सम्पन्न हुई। यह प्रस्तुति गोरखपुर और बनारस के आसपास के युवाओं का एक दल बुद्ध से कबीर तक नाम का बैंड बनाकर सामने आया जिन्होंने कबीर की रचनाओं को उनके पूरे अस्तित्व और पूरे मतलब के साथ नई और रोशनी देती धुनों के साथ प्रस्तुत किया दूसरी प्रस्तुति प्रशस्ति तिवारी और उनके समूह द्वारा प्रस्तुत की गई। इस प्रस्तुति का नाम था बंदगी यह प्रस्तुति कबीर साहब की रचनाओं को उनके जीवन के आलोक में रखकर देखने की कोशिश थी मूलतः कत्थक में प्रशिक्षित इन युवा नर्तकी होने कबीर को बिल्कुल ने और भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया इस प्रस्तुति में कबीर के जीवन को उनकी शिक्षाओं के आलोक में देखा गया।

तीसरी प्रस्तुति छत्तीसगढ़ के कलाकार दिनेश जांगड़े एवं दल द्वारा पंथी नृत्य की प्रस्तुति की गई।
चतुर्थ प्रस्तुति वाराणसी के विजय कपूर के भजन गायन की हुई। इनके साथ तबला पर पं बलराम मिश्र, बांसुरी पर शानिष ज्ञावली, साइड रिदम पर धीरेंद्र ने संगत किया। भजन गायन में पानी बीच बतासा संतों तन का यही तमाशा। जग में गुरु समान नहीं दाता। कबीर भजन -कौनो ठगवा नगरिया लूटल हो आदि की प्रस्तुति सम्पन्न हुई।
पांचवी एवं अंतिम प्रस्तुति राजस्थान की गंगा देवी एवं दल द्वारा तेरहताली नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम का संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया गया। वही धन्यवाद ज्ञापन प्रो सुरेश शर्मा निदेशक उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा किया गया।

