भारत के पराक्रम का इतिहास अद्भुत है- बृजेश सिंह

  • बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया हिंदू साम्राज्य दिवस का उत्सव

सोनभद्र। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सोनभद्र द्वारा रविवार को सोनभद्र नगर स्थित रामलीला मैदान में हिंदू साम्राज्य दिवस का उत्सव बहुत ही हर्षोल्लास व धूमधाम के साथ मनाया गया। कार्यक्रम मे मंचासीन जनपद सोनभद्र के जिला संघचालक हर्ष अग्रवाल व जिला कार्यवाह बृजेश सिंह रहे। बौद्धिक उद्बोधन में बृजेश सिंह ने कहा कि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 6 उत्सव में द्वितीय उत्सव हिंदू साम्राज्य दिवस है। हिंदू साम्राज्य दिवस  ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी को मनाया जाता है। इसी दिन शिवाजी महाराज मुगलों को परास्त कर लौटे थे और उनका मराठा शासक के रूप में रायगढ़ के किले पर राज्याभिषेक हुआ था हिन्दू  ह्रदय सम्राट व मराठा गौरव की उपाधि से अंलकृत पश्चिम में भारतीय गणराज्य  के महानायक  छत्रपति शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 को  पुणे के जुनार स्थित शिवनेरी दुर्ग में  शाहजी भोंसले और माता जीजाबाई के घर हुआ था। छत्रपति  शिवाजी  महाराज ने 340 साल पहले  स्वराज्य, स्वधर्म, स्वभाषा और स्वदेश  के पुनरुत्थान के लिये जो कार्य किया है, उसकी तुलना नहीं हो सकती। उनका राज्याभिषेक एक व्यक्ति को राजसिंहासन पर बिठाने तक सीमित  नहीं था।

Advertisement (विज्ञापन)

उन्होंने कहा कि परम पवित्र भगवा ध्वज के नीचे यदि हम संगठित होते रहे तो हमारा कोई बाल भी बांका नहीं कर पाएगा। भारत के पराक्रम का इतिहास अद्भुत है। राष्ट्र तीन तत्वों से मिलकर बनता है भूमि, जल व संस्कृति, संस्कृति समाप्त होने के बाद यूनान , रोम व मिश्र समाप्त हो गए। दत्तोपंत ठेंगड़ी जी कहा करते थे कि, सिकंदर नेपोलियन व जूलियन सीजर को जनता का इतना भाव विश्वास नहीं मिला जितना शिवाजी महाराज को मिला था।शिवाजी महाराज के शासन  में  सभी  की  सहभागिता  रहती  थी।सामान्य मछुआरों  से  लेकर वेदशास्त्र पंडित सभी उनके राज्यशासन  में  सहभागी थे। छुआछूत का कोई स्थान नहीं था। स्वार्थ की बात तो दूर  रही शिवाजी महाराज को  अपने  प्राणों से भी मोह नहीं था। दादा कोणदेव  के संरक्षण में शिवाजी ने युद्ध कौशल की सारी कलाएं सीखी। शिवाजी को गुरिल्ला युद्ध या छापामार  युद्ध का आविष्कारक  माना  जाता  है।

Advertisement (विज्ञापन)

वर्ष 1674 में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखने वाले छत्रपति शिवाजी ने कई सालों तक औरंगजेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया था और मुगल सेना को धूल चटाई थी।भारतीय परंपरा धर्म की स्थापना सज्जनों का संरक्षण और दुर्जनों का विनाश राज्य का मुख्य कार्य मानती है आध्यात्मिक चेतना इसका पुराण है। भारत के सभी प्राचीन नरेश इसी परंपरा से अनुप्राणित है जिसमें सज्जनों की रक्षा,स्त्रियों का सम्मान,बाल व वृद्धों का संरक्षण शिवाजी महाराज ने भी किया। गौहर बानू का इतिहास प्रसिद्ध है जिसे उन्होंने ससम्मान लौटा दिया। उनका स्पष्ट आदेश था कि किसी धर्म का स्थान ,किसी नारी अथवा धार्मिक पुस्तक को हाथ न लगाया जाए, इसीलिए शिवाजी का आम जनमानस में अत्यधिक सम्मान था।

Advertisement (विज्ञापन)

शिवाजी ने हिंदू शास्त्र में वर्णित अष्ट मंत्रिमंडल से युक्त राज्य का कार्यभार संचालित किया और कभी भी राज्य को अपने द्वारा निर्मित नहीं कहा व कहा करते थे कि महारानी मां तुलजा भवानी और भगवान शंभू की कृपा से ही यह स्वराज्य की स्थापना हुई है, इस प्रकार का भाव भारतीय संस्कृत को प्रतिबिंबित करता है संघ ने इसीलिए शिवाजी महाराज को अपना आदर्श माना है। संघ इसी प्रकार का सर्व कल्याणकारी राज और उन्नत समाज देखना चाहता है जो राष्ट्र की आराधना करें और राष्ट्र को परम वैभव पर पहुंचा सके। समाज में सुधार  की  इच्छा,शौर्य ऐसे अनेक गुणों  के प्रतीक रहे छत्रपति शिवाजी महाराज का आदर्श हमें लेना चाहिए और  शिवाजी महाराज का अनुकरण कर  आदर्श समाज निर्मिती के लिए  प्रयास करना चाहिए।

कार्यक्रम में सुरेश केशरी,अवध नरायण,कीर्तन, नीरज सिंह,संतोष,महेश शुक्ला, सत्यारमण, संगम,शशांक शेखर कात्यायन,ज्ञानेंद्र शरण,जे0 बी0 सिंह,गौतम बरनवाल,अखिलेश, अजीत चौबे,अशोक मिश्र,धर्मवीर तिवारी,ललित नारायण,सर्वेश मिश्रा, विनोद पाठक आदि उपस्थित रहे।

  • Advertisement

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

Sanskriti Live is a news website. Where you can read news related to religion, literature, art, culture, environment, economic, social, business, technology, crime, agriculture etc. Our aim is to provide you with correct and accurate information. This news website is operated by Sanskriti Live News Network (OPC) Pvt. Ltd. If you want to join us, you can contact us on 7007390035 or info@sanskritilive.in.

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें