सोनभद्र। जिले में जिस तरह से संदिग्ध मौतों का पोस्टमार्टम न कराने का सिलसिला लगातार जारी है, वह न सिर्फ पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में बाधा है बल्कि सरकार की छवि भी खराब हो रही है। यह कहना है बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मवीर तिवारी का। श्री तिवारी ने कहा कि जिस तरह से राजस्व वसूली मामले में सुधाकर दुबे की राजस्व हवालात में हुई मौत व पोस्टमार्टम न कराए जाने के मामले में प्रशासन द्वारा अब तक दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही नहीं की गई जिसका नतीजा यह हैं कि सुधाकर दुबे की मौत के बाद पंचशील मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में गुड्डी यादव व चोपन सामुदायिक केंद्र में मधु की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी। इन दोनों मौत के मामले में भी प्रशासन ने पोस्टमार्टम नहीं कराया।

जबकि पहले मौत के मामले में प्रशासन को कड़ी कार्यवाही करके बड़ा संदेश दे सकता था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिसका नतीजा यह रहा कि दो निर्दोषों की जान चली गयी और अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी । क्योंकि पोस्टमार्टम न कराकर सारे सबूत ही नष्ट कर दिए गए ।

पूर्व जिलाध्यक्ष ने कहा कि जिलाधिकारी भले ही मजिस्ट्रियल जांच व हॉस्पिटलों पर जांच बिठा दी हो मगर उनकी मंशा पर सवाल खड़ा होना शुरू हो गया है एक तरफ छोटे अस्पतालों पर कार्रवाई हो रही है वही बड़े अस्पतालों को बेधड़क भ्रष्टाचार करने गरीबों का शोषण करने के लिए छोड़ दिया जा रहा है। बड़े अस्पतालों में जांच के नाम पर गरीब मरीजों का शोषण हो रहा है दवाएं कम और जांच का पैसा ज्यादा लिया जा रहा है । इतना ही नहीं अप्रशिक्षित लोग ऑपरेशन कर रहे हैं इसलिए आए दिन मौत हो रही है। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार को बदनाम करने के लिए प्रशासन पूरी तरह से लगा हुआ है । सीएमओ द्वारा पारदर्शी तरीके से कार्रवाई न करना भी सरकार को बदनाम करना है।
धर्मवीर तिवारी ने कहा कि वे इस पूरे मामले को लेकर सीएम को पत्र लिखा गया है ताकि मृतक परिवारों को न्याय मिल सके। उन्होंने मांग की है कि चोपन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लापरवाही के कारण हुई जच्चा-बच्चा की मौत के मामले की मजिस्ट्रियल जांच हो और तीनो मामले में उन लोगों पर सख्त कार्यवाही की जाय जिनकी लापरवाही के कारण मृतकों का पोस्टमार्टम नहीं हो सका । साथ ही पोस्टमार्टम न होने की वजह से परिजनों की हुई नुकसान की भरपाई भी प्रशासन को करना चाहिए।ताकि सरकार की छवि बचाई जा सके।




