बच्चों से ना कराये बाल श्रम, भेजें उन्हें स्कूल – पुनीत टंडन

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  • 22 श्रमिकों को बालश्रम से मुक्त कराया गया

सोनभद्र। जिला प्रोवेशन अधिकारी/ जिला बाल संरक्षण अधिकारी पुनीत टण्डन द्वारा मंगलवार को बताया गया की जनपद सोनभद्र में मिशन शक्ति फेज 4.0 के अंतर्गत मई माह के ऑपरेशन मुक्ति अभियान के अन्तर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई, मानव तस्करी विरोधी इकाई, श्रम विभाग व महिला शक्ति केंद्र, के संयुक्त टीम द्वारा जनपद स्तर पर बालकों द्वारा बाल श्रम कराए जा रहे हैं 22 श्रमिकों को बालश्रम से मुक्त कराया गया।

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प्रोबेशन अधिकारी द्वारा बताया गया कि पिछले कुछ सालों से बाल श्रमिकों की दर में कमी आई है। इसके बावजूद बच्‍चों को कुछ कठिन कार्यों में अभी भी लगाया जा रहा है, जैसे बंधुआ मजदूरी, बाल सैनिक (चाइल्‍ड सोल्जर) और देह व्‍यापार व विभिन्‍न उद्योगों में बाल मजदूरों को काम करते हुए पाया जा रहा है, जैसे ईंट भट्टों पर काम करना, गलीचा बुनना, कपड़े तैयार करना, घरेलू कामकाज, खानपान सेवाएं (जैसे होटल, ढाबा, चाय की दुकान पर) खेतीबाड़ी, मछली पालन और खानों में काम करना आदि। इसके अलावा बच्‍चों का और भी कई तरह के शोषण का शिकार होने का खतरा बना रहता है जिसमें यौन उत्‍पीड़न तथा ऑनलाइन एवं अन्य चाइल्‍ड पोर्नोग्राफी शामिल है।

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उन्होंने आगे बताया कि बाल मजदूरी और शोषण के अनेक कारण हैं जिनमें गरीबी, सामाजिक मापदंड, वयस्‍कों तथा किशोरों के लिए अच्‍छे कार्य करने के अवसरों की कमी, प्रवास और इमरजेंसी शामिल हैं। ये सब वजहें सिर्फ कारण नहीं बल्कि भेदभाव से पैदा होने वाली सामाजिक असमानताओं के परिणाम हैं। बच्‍चों का काम स्‍कूल जाना है न कि मजदूरी करना। बाल  मजदूरी बच्‍चों से स्‍कूल जाने का अधिकार छीन लेती है और वे पीढ़ी दर पीढ़ी गरीबी के चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पाते हैं ।

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बाल मजदूरी शिक्षा में बहुत बड़ी रुकावट है, जिससे बच्‍चों के स्‍कूल जाने में उनकी उपस्थिति और प्रदर्शन पर खराब प्रभाव पड़ता है।
बाल मजदूरी तथा शोषण की निरंतर मौजूदगी से देश की अर्थव्‍यवस्‍था को खतरा होता है और इसके बच्‍चों पर गंभीर अल्पकालीन और दीर्घकालीन दुष्परिणाम होते हैं जैसे शिक्षा से वंचित हो जाना और उनका शारीरिक व मानसिक विकास ना होने देना।
बाल तस्‍करी भी बाल मजदूरी से ही जुड़ी है जिसमें हमेशा ही बच्‍चों का शोषण होता है। ऐसे बच्‍चों को शारीरिक, मानसिक, यौन तथा भावनात्‍मक सभी प्रकार के उत्‍पीड़न सहने पड़ते हैं जैसे बच्‍चों को वेश्‍यावृति की ओर जबरदस्‍ती धकेला जाता है, शादी के लिए मजबूर किया जाता है या गैर-कानूनी तरीके से गोद लिया जाता है, इनसे कम और बिना पैसे के मजदूरी कराना, घरों में नौकर या भिखारी बनाने पर मजबूर किया जाता है और यहां तक कि इनके हाथों में हथियार भी थमा दिए जाते हैं। बाल तस्‍करी बच्चों के लिए हिंसा, यौन उत्‍पीड़न तथा एच आई वी संक्रमण (इंफेक्‍शन) का खतरा पैदा करती है।

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बाल मजदूरी तथा शोषण एकीकृत दृष्टिकोण के माध्‍यम से रोके जा सकते हैं जो बाल सुरक्षा प्रणाली को मज़बूत बनाने के साथ-साथ गरीबी तथा असमानता जैसे मुद्दों, गुणात्‍मक शिक्षा के बेहतर अवसरों, और बच्‍चों के अधिकारों की रक्षा के लिए जन सहयोग जुटाने में मदद करते हैं। उन्होंने आगे बताया किअध्‍यापक तथा शिक्षा व्‍यवसाय से जुड़े अन्‍य लोग भी बच्‍चों के हितों की रक्षा के लिए आगे आ सकते हैं और सामाजिक कार्यकर्ताओं जैसे समाज के हितधारकों को बच्‍चों की उस दयनीय स्थिति से अवगत करा सकते हैं जहां बच्‍चों में निराशा के साथ-साथ देर तक काम करने के संकेत दिखाई देते हैं। बच्‍चों को काम से बाहर निकाल कर उन्‍हें स्‍कूल भेजने के लिए शोषित परिवारों को जागरूक करने के लिए सरकारी नीतियों में व्‍यापक बदलाव करने की जरूरत है।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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