राष्ट्रीय संचेतना समिति द्वारा आयोजित कवि गोष्ठी मे कवियों ने पढी एक से बढ़कर एक रचनाएं

सोनभद्र। नगर पालिका परिषद सभागार में रविवार को देर शाम कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय संचेतना समिति के तत्वावधान में डॉ लखन राम जंगली की अध्यक्षता व अशोक तिवारी के
संचालन में विभिन्न रसों की फुहार से श्रोता सराबोर हो उठे। कवि शिवदास ने सुनाकर तान वीणा की हृदय में अर्चना भर दे,,,, के द्वारा मां का स्तवन किया।

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प्रखर रचनाकार प्रद्युम्न त्रिपाठी ने बेटी के विदाई पर सबकी आंखें नम करते हुए अपनी रचना– बज्जर करेजा केतनो आंख भर आई घरवा दुआर छोड़ बेटी जब जाई सुनाकर वाहवाही लूटी । गीतकार सरोज कुमार सिंह ने मात्रि दिवस पर मां को समर्पित रचना सुनाकर लोगों को झकझोरा और बुजुर्गों के सम्मान के प्रति सचेत रहने का संदेश दिया । वरिष्ठ साहित्यकार रामनाथ शिवेंद्र ने सद्भावना की पंक्तियां– हमें रोटिया ही दीजिए बहुत भूख लगी है, दे रहे हैं गीता कुरान किसलिए,,,, सुना कर खूब तालियां बटोरी।

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गीतकार जगदीश पंथी ने राष्ट्रवाद की परिभाषा देते हुए कहा कि आज सभी के लिए राष्ट्रभक्ति होना जरूरी है ,अगर हम राष्ट्र भक्त नहीं होते तो आज तक गुलाम होते आजादी असंभव थी इसलिए राष्ट्रभक्त रहे अंधभक्त ना रहे, छद्म राष्ट्रवाद घातक है। दिवाकर द्विवेदी मेघ विजयगढी हास्य व्यंग की रचना– बीए पढे लागल बा बेटौवा ,,,,, सुनाकर सबको हंसाते हंसाते लोटपोट कर दिया । राम नरेश पाल ने अपने माटी के छंदों से खेत किसान सैनिक जवान हिंदुस्तान सब को नमन करते हुए लोक भाषा में रचना ,,,,,,राजगुरू सुखदेव भगत अउ सुभाष क माटी,,,माटी के खातिर जान गवायेंन पायेन रे विस्वास के माटी,,,सुना कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिए । युवा कवि दिलीप सिंह दीपक ने,,,,, कश्मीरी पंडित हूं मैं हां हां कश्मीरी पंडित हूं मैं,,,,, के द्वारा त्रासदी का वर्णन कर कश्मीरी पंडितों के दुख दर्द का बयान किया ।

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सोन साहित्य संगम के संयोजक राकेश शरण मिश्र, लोकप्रिय गीतकार ईश्वर विरागी, गीतकार अमरनाथ अजेय, धर्मेश चौहान ,प्रभात सिंह चंदेल, सुनील चौचक, दयानंद दयालु आदि कवियों ने श्रेष्ठ काव्य पाठ कर बोसी में चार चांद लगा दिया। अध्यक्षीय काव्य पाठ करते हुए डॉ लखन राम जंगली ने– मधुर बोली बसिया के भौजी के सुनावा,,,, बसिया बहाने भइया मोर गीत गाबा,,, के द्वारा आदिवासी समाज का चरित्र चित्रण करते हुए खाटी भोजपुरी में वनवासियों के ग्राम में जीवन को समर्पित रचना सुनाकर कार्यक्रम को शिखर तक पहुंचाया जिसका उपस्थित श्रोताओं ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। इस अवसर पर रमेश देव पांडेय वेद मणि त्रिपाठी, राधेश्याम बंका, आशुतोष पांडेय मुन्ना, पत्रकार अरुण चौबे , इमरान बख्शी ,खुर्शीद आलम ,ठाकुर कुशवाहा ,रत्नेश मौर्य फारुख अली, ऋषभ त्रिपाठी आदि कविता प्रेमी गोष्टी समापन तक जमे रहे।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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