सोनभद्र जनपद में जड़ी बूटी की खेती की अपार संभावनाएं -डॉ०कुसुमाकर श्रीवास्तव

HIGHLIGHTS

  • संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का हुआ आयोजन
  • चिकित्सकों एवं विशिष्ट जनों का हुआ सम्मान
  • जड़ी बूटियों की लगाई गयी प्रदर्शनी
  • सिनकोना ऑफिशियलेनिस अन्य औषधीय वृक्षों का हुआ रोपण

चुर्क, सोनभद्र। जनपद सोनभद्र आदिकाल से आयुर्वेद आचार्यों की कर्मभूमि रही है और प्राचीन काल में इस क्षेत्र में दुर्लभ जड़ी- बूटियों, वनस्पतियों, पेड़- पौधों पर शोध अध्ययन कर प्राचीन ऋषियो, मुनिया वैद्यो ने औषधि तैयार कर आमजन का स्वास्थ्य रक्षण करते थे। प्राचीन आयुर्वेद अचार्य चरक ऋषि (चुर्क) सुश्रुत (सुकृत)आदि नामो ज्ञात होता है कि यह क्षेत्र आयुर्वेदाचार्यों की की कर्मभूमि रही है।

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सोनभद्र के ग्रामीण अंचलों, जंगलों, बनो, में अनेकों औषधीय जड़ी बूटियां पैदा होती हैं, लेकिन सही मायने में इसका उपयोग आयुर्वेद, होम्योपैथ में नहीं हो पा रहा है इस क्षेत्र में इन औषधि वृक्षों का शोध अध्ययन होना चाहिए और यहां पर दवा निर्माण की एक फैक्ट्री का भी निर्माण होना चाहिए ताकि इस क्षेत्र के औषधि वृक्षों का सही उपयोग हो सके और यहां के युवाओं को रोजगार भी प्राप्त कर सकती है उपरोक्त विचार फोर एस होम्योपैथी फार्मेसी कॉलेज ,मुसही मे हैनीमैन जयंती सप्ताह के अंतर्गत “विंध्य क्षेत्र की जड़ी बूटियों की होम्योपैथी में उपयोगिता।” विषय पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जय प्रभा होमियो सदन के निदेशक, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ कुसुमाकर श्रीवास्तव ने व्यक्त किया।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होम्योपैथिक ज़िला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संतोष कुमार सोनी अपना उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि-“विंध्य क्षेत्र का मिर्जापुर और सोनभद्र जनपद की पहाड़ियों, नदियों, घाटियों से घिरा हुआ है और यहां के जंगलों में बहुतायत औषधीय वृक्ष सदियों से पैदा होते रहे हैं और इन्हीं औषधि, जड़ी- बूटियों के माध्यम से आदिवासी अपने स्वास्थ्य रक्षण करते हैं आज के युग में इन जड़ी बूटियों का महत्व बढ़ गया है, बल्कि यूं कहें कि इसका उपयोग होम्योपैथ चिकित्सा पद्धति में बहुतायत होने लगा है होम्योपैथ चिकित्सा एक ऐसी पद्धति है जिसमें जब हर चिकित्सा पद्धति से मानव जब निराश हो जाता है तब वह होम्योपैथ चिकित्सा की ओर बढ़ता है और उसे देर में ही उसे इस चिकित्सा पद्धति का लाभ मिलता है और वह स्वस्थ हो जाता है अगर आरंभ से ही मनुष्य होम्योपैथ चिकित्सा के माध्यम से अपना इलाज कराए तो वह जीवन भर स्वस्थ और निरोग रहेगा।

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कार्यक्रम के आयोजक फोर एस होम्योपैथी फार्मेसी कॉलेज ,मुसही के निदेशक डॉक्टर जेएन तिवारी,डॉक्टर संजय सिंह, डॉ आनंद नारायण, डॉक्टर सीवी पांडे, डॉक्टर राजमोहन पांडे, डॉक्टर जय सिंह, डॉक्टर सुधाकर, डॉ राम राज सिंह, डॉ सुरेंद्र तिवारी, डॉक्टर श्रद्धा दुबे, डॉ एसके चौबे, राजेश द्विवेदी सहित अन्य वक्ताओं ने विंध्य क्षेत्र की जड़ी बूटियों की होम्योपैथी में उपयोगिता विषय पर विस्तार से अपना- अपना विचार व्यक्त किया।

संगोष्ठी में विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी, आकाशवाणी केंद्र ओबरा की उद्घोषिका सुरसरि पांडे, दिल्ली दूरदर्शन केंद्र की इंदु पांडे, मुकेश पाल सहित उपस्थित अतिथियों, कॉलेज के सभी छात्र- छात्राओं को निदेशक जे एन तिवारी द्वारा अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह एवं यथार्थ गीता की प्रति भेंट कर सम्मानित किया गया।

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कार्यक्रम का शुभारंभ होम्योपैथ के जनक डॉ हैनिमैन, संविधान निर्माण समिति के सदस्य डॉ भीमराव अंबेडकर, पंडित मदन मोहन मालवीय के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन माल्यार्पण मां सरस्वती की वंदना से हुआ।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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