सोनभद्र। जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज के शाम्बकों न्यू कॉलोनी वरिष्ठ कवि, गीतकार दिवाकर द्विवेदी “मेघ विजयगढी” के जन्मदिन के अवसर पर कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ कथाकार रामनाथ “शिवेंद्र” सहित विशिष्ट अतिथियों के दीप प्रज्वलन एवं कवि सरोज सिंह के वाणी वंदना-“
शारदे वर दे, मईया वर दे-
अंधकार मय इस जीवन को तू जगमग कर दे। से हुआ।

साहित्य संगम के संयोजक राकेश शरण मिश्र अपने काव्य पाठ किया-
“एक अक्लमंद ने महामूर्ख कवि सम्मेलन का आयोजन कराया।
अक्लमंद कवि सम्मेलन क्यों नही कराते।”
अधिवक्ता वृजमोहन तिवारी ने भोजपुरी बोली में काव्य पाठ करते हुए सोनभद्र जनपद के ग्रामीण परिवेश को दर्शाया-
“पूरब के पश्चिम गइल बेटी,
गंगा मइया गइलीन कगार।”
कवि सरोज कुमार सिंह ने “न हो साथ कोई गम न करना,
सफर में मुसाफ़िर अकेला चला-चल।
गीत सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी।
कवि दयानंद “दयालु” ने
कइसे लिखी गीत लिखहु न आवे।
भोजपुरी गीत सुनाया।

कवित्री कौशल्या कुमारी चौहान नेताओं पर कटाक्ष करते हुए-
कौन कहता है नेता ईमानदार होते हैं,
इनके तरह तरह के किरदार होते हैं।
वर्तमान राजनीतिक परिवेश को रेखांकित किया।
गीताकार दिवाकर दिवेदी मेघ विजयगढी ने-
मैन- दिया था दिल, दिल लगाने के लिए,
इस आस में की उसको पाने के लिए।
कवि/ अधिवक्ता प्रद्युम्न त्रिपाठी ने सोनभद्र के दर्शनीय स्थलों पर आधारित काव्य पाठ किया-
“सोमनाथ का गुड़गान मेरा सोनभद्र है,
वंशरा देवी पहचान मेरा सोनभद्र है।”
गीतकार ईश्वर विरागी अपनी रचना सुनाया-
“सामने मंजिल तुम्हारे चुम लो आगे बढ़ो।”
भोजपुरी के जाने-माने गीतकार जगदीश पंथी कवियों के दर्द को बयां किया-
“कभी कबि जाने क्या होता है?
मन अपना बार-बार रोटा है।”

युवा कवि दिलीप सिंह “दीपक” ने कश्मीर पर आधारित काव्य पाठ किया-
“आज़ाद भारत मे अब तक बन्धित हूँ मैं,
हाँ हाँ पंडित हूँ मैं, कश्मीरी पंडित हूँ मैं।”
शायर अशोक तिवारी ने अपनी गजल सुना कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया-
“जिंदगी मुफ़्लिशि से उबारने नजी देती,
जीने भी नही देती ,मरने भी नही देती।”
हास्य कवि सुशील “राही” हास्य व्यंग पर आधारित कविता-
मैं राही हूँ कही भी जाऊं,
तेरे बाप का क्या?

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामनाथ “शिवेंद्र”अपनी कविता के माध्यम से कवि दिवाकर द्विवेदी में विजय गढ़ी को बधाई दिया-
“बधाई हो जन्म दिन की,
जियो हज़ारों साल…।”
कार्यक्रम का सफल संचालन दिलीप सिंह दीपक ने किया। इस अवसर पर वेदमणि त्रिपाठी, आत्मप्रकाश तिवारी, शिखा, ममता, ऋषभ, उमाशंकर मिश्रा, प्रभु जायसवाल आदि कवि गोष्ठी का भरपूर आनंद उठाया।




