
HIGHLIGHTS
- आद्य सरसंघचालक प्रणाम व बौद्धिक समेलन किया गया आयोजन।
- पथ संचलन में भारी संख्या में शामिल हुए स्वयंसेवी

(संवाददाता)
सोनभद्र। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सोनभद्र द्वारा जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज नगर के रामलीला मैदान में वर्ष प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर आद्य सरसंघचालक प्रणाम व बौद्धिक समेलन के बाद नगर मे पथ संचलन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ समाजसेवी, होम्योपैथ चिकित्सक डॉक्टर कुसुमाकर व मुख्य वक्ता क्षेत्रीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख मिथिलेश नारायण व मंचासीन विशिष्ट अतिथिगण सह प्रांत संघचालक अंगराज व जिला संघचालक हर्ष अग्रवाल रहे।


मुख्य वक्ता मिथिलेश नारायण ने अपने पाथेय में कहा कि- “संघ के संस्थापक केशवराव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में विजयादशमी के दिन स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक,सांस्कृतिक संगठन है । इसके छः उत्सवों में से वर्ष का प्रथम उत्सव है। उन्होंने डॉक्टर हेडगेवार के बाल्यकाल का वर्णन करते हुए कहा कि डा0 हेडगेवार जी का जन्म विक्रम संवत् 1946 की वर्ष प्रतिपदा (1/4/1889) के पावन दिन नागपुर में एक निर्धन ब्राह्मण कुल में हुआ। इनके पूर्वज कर्नाटक से यहाँ आये थे।


इनके पिता का नाम बलिराम पंत और माता का नाम रेवतीबाई था। इनके दो अग्रज महादेव, सीताराम थे। इनकी तीन बहनें थीं सरु, तंजु और रंगु। कुल परम्परा के अनुसार श्री बलिराम पंत उपजीविका के लिए पौरोहित्य तथा कर्तव्य समझकर विद्यादान, दोनों ही करते थे। कुछ काल पश्चात् उन्होंने भोजन के लिए यजमानों के घरों में जाना छोड़ दिया। हाँ, कुछ निश्चित घरों से ‘सीधा’ (आमान्न) ये स्वीकार करते थे।
यथा समय बालक केशव की विधिवत् पाठशाला शिक्षा प्रारम्भ हुई । घर पर उन्हें अनेक स्तोत्र, श्लोक, रामरक्षा आदि के मंत्र सीखने को मिले। यज्ञोपवीत संस्कार होने पर संध्या, पूजा, रुद्रीपाठ आदि ब्रह्मकर्म का दैनिक शिक्षण आरम्भ हुआ।
जन्मजात देशभक्ति की भावना उनमें
उनमें जन्मजात थी और विदेशी शासन की पीड़ा उन्हें बचपन से ही ग्रस्त करने लगी।


22 जून, 1897 को महारानी विक्टोरिया के राज्यारोहण के साठवें वर्ष के दिन पर स्कूल में मिली मिठाई न खाकर उन्होंने कूड़े के ढेर में यह कहकर फेंक दी, “भौंसले के राज्य को जीतने वाले राजा के समारोह का आनन्द कैसा ?” इसी प्रकार एडवर्ड सप्तम के राज्यारोहण के अवसर पर ‘एम्प्रेस मिल’ की ओर से की गई विशाल आतिशबाजी देखने से उन्होंने इसलिए इंकार कर दिया कि, “विदेशी राजा का राज्यारोहण उत्सव मनाना हमारे लिए लज्जा का विषय है।”


वही अयोजित कार्यक्रम में प्रार्थना के बाद जनपद सोनभद्र के स्वयंसेवक बहुत ही हर्षोल्लास के साथ सोनभद्र नगर में घोष के साथ कदम से कदम मिलाकर पथ संचलन किया। प्रार्थना के बाद घोष पर पथ संचलन। शुरू होकर पहले चण्डी तिराहा से बाईपास रोड होते हुए धर्मशाला चौक से मुख्य चौराहा ( शीतला मंदिर ) होते हुए महिलाशथाना , सिविल लाइन, स्वर्ण जयंती चौराहा (बढ़ौली चौक) से वापस रामलीला मैदान मे कार्यक्रम का समापन हुआ।

पथ संचलन में उपस्थित स्वयंसेवकों पर सोनभद्र नगर के कई स्थानों पर पुष्प से वर्षा किया गया वह भारत माता के उद्घोष से पूरे नगर गूंज उठा।
कार्यक्रम में सह जिला संघचालक नंदलाल ,विभाग प्रचारक प्रवेश, जिला कार्यवाह बृजेश सिंह ,सह जिला कार्यवाह पंकज पांडेय, अवध, नीरज सिंह, कीर्तन, संतोष , सत्यारमन, शशांक, संगम, महेश, अखिलेश सहित सैकड़ों की संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे व पथ संचलन में पूर्ण गणवेश में भाग लिया।




