अनपरा, सोनभद्र। उप्र के ऊर्जा निगम प्रबन्धन द्वारा अभियन्ताओं पर अव्यवहारिक एवं असम्भव लक्ष्यों को पूर्ण करने के लिए प्रबन्धन द्वारा एकतरफा तैयार किये गये एमओयू पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य करने से अभियन्ताओं में रोष एवं आक्रोश और बढ़ गया है। जिसके विरोध में विगत 12 दिन से चल रहे सविनय अवज्ञा आन्दोलन में एमओयू की प्रतियों की होली जलाकर विरोध किया गया तथा मांग की गयी कि प्रबन्धन पहले मानक के अनुरूप आवश्यक मैन, मनी एवं मैटीरियल उपलब्ध कराये।

उन्होंने प्रबन्धन एवं अधीनस्थ विभागीय कार्मिकों के मध्य इस प्रकार के एमओयू साइन कराने पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए इसे औचित्यहीन करार दिया। विदित हो कि उप्र के ऊर्जा निगमों में शीर्ष स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार तथा प्रबन्धन द्वारा तानाशाहीपूर्ण ढंग से अन्याय व उत्पीड़न किये जाने के विरोध में विगत 12 दिन से सभी ऊर्जा निगमों के अभियन्ता व अवर अभियन्ता सविनय अवज्ञा/असहयोग आन्दोलन कर रहे हैं। जिसके तहत आगामी 04, 05 एवं 06 अप्रैल को सभी जूनियर इंजीनियरों एवं अभियन्ताओं ने सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर जाने की घोषणा की है। इस क्रम में प्रार्थना पत्रों को एकत्र किये जाने का सिलसिला जारी है एवं लगभग 6000 प्रार्थना पत्र एकत्र हो चुके हैं।

उप्र के बिजली अभियन्ताओं एवं जूनियर इंजीनियरों ने प्रदेश में मा0 योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व वाली नई सरकार के ऊर्जा मंत्री मा. ए के शर्मा जी से प्रदेश की जनता को बेहतर उपभोक्ता सेवा एवं सुचारू विद्युत आपूर्ति प्रदान करने हेतु ऊर्जा निगमों में व्याप्त नकारात्मक, दण्डात्मक, उत्पीड़नात्मक कार्य प्रणाली को समाप्त कर मनोबल बढ़ाने वाली प्रोत्साहनात्मक व स्वस्थ कार्य प्रणाली प्रदान करने हेतु सार्थक हस्तक्षेप किये जाने की अपील की है।
संगठनद्वय के पदाधिकारियों वी0पी0 सिंह, जी0बी0 पटेल, प्रभात सिंह, जय प्रकाश ने वृहस्पतिवार को जारी बयान में बताया कि बिजली अभियन्ता एवं जूनियर इंजीनियर प्रबन्धन द्वारा की जा रही समीक्षा बैठकों/वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का बहिष्कार कर रहे हैं। यदि समस्याओं के निस्तारण हेतु सार्थक कार्यवाही न हुई तो सविनय अवज्ञा आन्दोलन एवं प्रबन्धन के साथ पूर्ण असहयोग के क्रम में आगामी 04, 05 एवं 06 अप्रैल 2022 को घोषित सामूहिक अवकाश हेतु बाध्य होना पड़ेगा। जिसके लिए बड़े पैमाने पर आवेदन एकत्र हो रहे हैं, जिन्हें जल्द ही प्रबन्धन को सौंपा जायेगा। उ0प्र0 के ऊर्जा निगमों के प्रबन्धन द्वारा ईआरपी प्रणाली खरीद एवं बिजली क्रय करने में उच्च स्तर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है।
ईआरपी प्रणाली पर अरबों रूपये खर्च करने के बाद भी विभागीय कार्यप्रणाली अनुरूप नहीं है, ना ही इसका समुचित प्रशिक्षण दिया गया है और न ही इसके क्रियान्वयन हेतु आवश्यक मूलभूत इंफ्रास्ट्रक्चर एवं मैन पावर दी गयी है। इसके बावजूद निजी कम्पनी द्वारा कारपोरेशन को दिये गये सॉफ्टवेयर के अनुरूप ही दबाव डालकर अभियन्ताओं को कार्य करने हेतु बाध्य किया जा रहा है।

पदाधिकारियों ने आगे बताया कि ऊर्जा निगमों में विद्युत उत्पादन एवं विद्युत आपूर्ति के लिए आवश्यक न्यूनतम मैन, मनी, मैटीरियल उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने में ऊर्जा निगम प्रबन्धन पूर्ण रूप से विफल रहा है एवं अपनी विफलता छुपाने के लिए व संसाधनों की मांग करने वालों व विरोध करने वालों पर दण्डात्मक कार्यवाही की जा रही है। इससे जहां प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप सबको बिजली हरदम बिजली के लक्ष्य को पूर्ण कर पाने में बिजली कर्मियों को काफी दिक्कतें आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा निगमों में भययुक्त वातावरण एवं नकारात्मक कार्य प्रणाली स्थापित हो रही है। यह न तो प्रदेश हित में है और न ही ऊर्जा निगमों के हित में है।
संगठन के पदाधिकारियों ने प्रदेश के नवनियुक्त ऊर्जा मंत्री से ऊर्जा निगमों में प्रबन्धन द्वारा उत्पन्न किये गये। अनावश्यक औद्योगिक अशान्ति समाप्त करने तथा ऊर्जा निगमों में कार्य का स्वस्थ वातावरण प्रदान करने हेतु आवश्यक कदम उठाने की अपील की।

आंदोलन को सफल बनाने के लिए अनपरा तापी परियोजना के मुख्य द्वार पर अभियंता संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष रोहित राय, अभिषेक बरनवाल, विनोद कुमार, मनोज यादव, अभिषेक त्रिपाठी, मृदुरंजन श्रीवास्तव, मनोज कुमार वर्मा, बनी सिंह, विनोद कुमार, अरविंद वर्मा, सचिन केसरवानी एवं जूनियर इंजीनियर संगठन से के शाखा अध्यक्ष इंजीनियर सचिन राज, सत्यम यादव, नित्यानंद सिंह, सत्यम, आशुतोष द्विवेदी, लालचंद कुशवाहा, राकेश सिंह, योगेश कुमार, अरविंद कुमार, मेहता राम, गोविंद मौर्य, ज्ञानेंद्र पटेल के साथ सैकड़ों की संख्या में सदस्य मौजूद रहे।




