पति समेत पांच दोषियों को 2 वर्ष 6 माह की कैद

HIGHLIGHTS

  • प्रत्येक पर 3 हजार 600 रुपये अर्थदंड, न देने पर 2-2 माह की अतिरिक्त कैद
  • अर्थदंड की 75 प्रतिशत धनराशि 13 हजार 500 रुपये पीड़िता को मिलेगी
  • दहेज प्रताड़ना का मामला

राजेश पाठक

सोनभद्र। दहेज प्रताड़ना के मामले में सीजेएम सूरज मिश्र की अदालत ने शनिवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर पति समेत पांच दोषियों को 2 वर्ष 6 माह की कैद एवं 3 हजार 600 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न जमा करने पर प्रत्येक को 2-2 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं अर्थदंड की 75 प्रतिशत धनराशि 13 हजार 500 रुपये पीड़िता को मिलेगी।

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अभियोजन पक्ष के मुताबिक 9 मई 2015 को ओबरा थाने में दी तहरीर में थाना क्षेत्र के भलुआ टोला निवासिनी रानी साहनी पत्नी त्रिभुवन साहनी हाल पता बस स्टैंड शक्तिनगर ने दी तहरीर में आरोप लगाया था कि उसकी शादी 28 फरवरी 2009 को ओबरा थाना क्षेत्र के भलुआ टोला निवासी त्रिभुवन साहनी के साथ हुई थी। शादी के दो माह बाद ससुराल वालों द्वारा दहेज की मांग की जाने लगी। दहेज न मिलने पर मारपीट कर प्रताड़ित किया जाने लगा। इतना ही नहीं मारपीट कर घर से भगा दिया गया। तब सिविल जज जूनियर डिवीजन दुद्धी की अदालत में मुकदमा दायर किया गया।

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अदालत ने सुलह-समझौता कराकर पुनः एक साथ भेज दिया। किंतु पुनः पति त्रिभुवन साहनी समेत अन्य ससुराल वालों ने 8 मई 2015 को गाली गलौज करते हुए मारने-पीटने लगे तथा बाल पकड़ कर पटक दिया। किसी तरह अपनी जान बचाकर भागी और फोन से अपने मायके सूचना दी। पति अपने मित्रों के साथ बार-बार नाजायज संबंध बनाने के लिए विवश कर रहा था। इस तहरीर पर पति त्रिभुवन साहनी , उसका भाई बांकेलाल व भाई की पत्नी चंदा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस विवेचना के दौरान ससुर हिंछलाल व सास अनारकली का नाम प्रकाश में आया।

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विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने पर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषियों त्रिभुवन साहनी, हिंछलाल, अनारकली, बांकेलाल व चंदा को 2 वर्ष 6 माह की कैद एवं प्रत्येक पर 3 हजार 600 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर प्रत्येक को 2-2 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी। वहीं अर्थदंड की 75 प्रतिशत धनराशि 13 हजार 500 रुपये पीड़िता को मिलेगी। अभियोजन पक्ष की ओर से एपीओ के साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता एसएन दीक्षित एवं रवि प्रकाश त्रिपाठी ने बहस की।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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