HIGHLIGHTS
- उपस्थित अतिथियों ने शहीदों को किया नमन
- विचार गोष्ठी/ काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन
- सदर विधायक ने दिया साहित्यकार भवन के निर्माण, शहीद उद्यान के विकास का आश्वासन
- सोनभद्र पर आधारित होगा साहित्य का प्रकाशन
- सोन प्रवाह काव्य कृति का हुआ विमोचन

सोनभद्र। शहीद स्थल प्रबंधन ट्रस्ट करारी के तत्वावधान में शहीद दिवस (भगत सिंह सुखदेव राजगुरु के बलिदान दिवस) के अवसर पर करारी स्थित शहीद उद्यान कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस को पुष्पांजलि से श्रद्धांजलि अर्पित किया। तत्पश्चात उपस्थित कवियों, विचारको, वक्ताओं का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।
साहित्यकार प्रदुम त्रिपाठी द्वारा संपादित काव्य कृति सोन प्रवाह का लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सदर विधायक भूपेश चौबे,
अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर, विशिष्ट अतिथि कथाकार रामनाथ शिवेंद्र, विजय शंकर चतुर्वेदी सहित अन्य मंचासीन साहित्यकारों द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में अपना विचार व्यक्त करते हुए मुख्य अतिथि सदर विधायक भूपेश चौबे ने कहा कि-हमारा सोनभद्र साहित्य, कला, संस्कृति, ऐतिहासिक, धार्मिक, प्राकृतिक स्थलों से भरपूर जनपद है और यहां पर पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं बनी हुई है, यहां के साहित्यकार, लेखक अपने साहित्यिक कृति के माध्यम से देश भर में धूम मचाए हुए हैं ऐसे में इनके साहित्यिक विचार विमर्श हेतु जनपद मुख्यालय पर एक सभागार का निर्माण एवं आज जिस पुण्य भूमि पर हम बैठे हुए हैं शहीद उद्यान करारी का विकास कराया जाएगा।

विशिष्ट अतिथि एवं वरिष्ठ पत्रकार विजय शंकर चतुर्वेदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-” जनपद सोनभद्र अब 33 वर्ष का हो गया है, लेकिन इसकी सांस्कृतिक पहचान नहीं बन पायी है। उन्होंने साहित्यकारों से अपील किया कि वे लोग अन्य विषयों के साथ सोनभद्र की विविधता, लोक, सांस्कृतिक विशिष्टता को भी लेखन का विषय बनाकर मिट्टी का कर्ज अदा करें ।
उन्होंने यह भी घोषणा किया कि यदि सोनभद्र पर गीत, कविता संग्रहित कर ली जाती है इस साहित्य को हमारा संस्थान प्रकाशित करेगा।
विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/ इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी ने अपने कहा कि-हमारे देश की आजादी में क्रांतिकारियों के बलिदानों महात्मा गांधी के आंदोलनों एवं आम जनमानस के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

सरदार भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को ब्रिटिश सरकार द्वारा फांसी पर चढ़ाया गया जाना भारतीय इतिहास, राजनीति, समाज,एक दुखद दुखद पहलू रहा। क्योंकि अंग्रेज सरकार यह नहीं चाहती थी कि भगत सिंह और उनके साथी जीवित रहे और देश में चल रहे आंदोलनों का नेतृत्व करें। उनकी फांसी की तिथि 24 मार्च1931 मुकर्रर किया गया था, लेकिन देश में क्रांतिकारियों के समर्थन में चल रहे उग्रआंदोलनों को ध्यान में रखते हुए 23 मार्च की शाम को ही तीनों क्रांतिकारियों को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। ब्रिटिश पुलिस द्वारा शहीदों के शव के साथ दुर्व्यवहार की अमानुषिक घटना इतिहास दर्ज हो गई। शहीदी दिवस के अवसर पर हम सभी उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती के वंदना से सरोज कुमार सिंह द्वारा किया गया।

वही उपस्थित कवियों द्वारा शृंगार रस, वीर रस, हास्य रस, देश प्रेम, राष्ट्रवाद से ओतप्रोत कविता अजय चतुर्वेदी कक्का, पारसनाथ मिश्र, रामनाथ शिवेंद्र, जगदीश पंथी, कार्यक्रम के आयोजक प्रदुम त्रिपाठी,राकेश शरण मिश्रा, दिलीप सिंह दीपक,
राजकुमार केसरी, मदन चौबे, अशोक तिवारी विजय विनीत, जयश्री राय, कौशल्या देवी,ईश्वर वैरागी, दिवाकर दिवेदी मेघ विजयगढ़ी द्वारा सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सदर विधायक भूपेश चौबे को कार्यक्रम के अध्यक्ष अजय शेखर, अजय चतुर्वेदी कक्का को विशिष्ट अतिथि कथाकार रामनाथ शिवेंद्र, विजय शंकर चतुर्वेदी को विशिष्ट अतिथि पारसनाथ मिश्र ने अंगवस्त्रम, लेखनी, डायरी प्रदान कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर आयोजन समिति के आत्मप्रकाश त्रिपाठी, वेद मणि त्रिपाठी, ठाकुर मौर्य, श्यामलाल, किशोरदेव, गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट के संयोजक रवि प्रकाश चौबे, समाजसेवी धर्मेंद्र कुमार पांडे सहित स्थानीय साहित्य प्रेमी देर रात तक काव्य एवं विचार गोष्ठी का आनंद उठाया।




