
HIGHLIGHTS
- काशी का अस्सी उपन्यास एवं फिल्म से मिली नई पहचान
- काशी के रचनाकारों की कर्मभूमि है पप्पू के चाय की अड़ी

(संवाददाता)
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सातवें चरण के मतदान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा काशी में किए गए मेगा रोड शो से काशी की ह्रदय स्थली पप्पू की चाय की अड़ी एक बार फिर मीडिया की सुर्खियों में छाई हुई है, जहां पर भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री एवं काशी के सांसद नरेंद्र मोदी ने सामान्य जन की तरह बेंच पर पर बैठकर चाय की गरमा गरम चुस्कियों का आनंद लेते हुए लाजवाब बनारसी पान की गिलोरी खाकर तरोताजा हुए।
विंध्य संस्कृति सोच समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/ इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-“पप्पू की अड़ी पर प्रधानमंत्री ने चाय की चुस्कियो का आनंद लिया उस अड़ी को सोनभद्र जनपद के ग्राम खडुई के निवासी बलदेव के पुत्र पप्पू ने एक नया मुकाम दिया था अब इस दुकान का संचालन इनके पुत्र करते हैं।”

पप्पू की अड़ी वर्षों से साहित्यकारों, कलाकारों, पत्रकारो, राजनेताओं, शिक्षकों की बैठकबाजी की वजह से हमेशा सुर्खियों में छायी रही कभी काशी के प्रख्यात साहित्यकार काशीनाथ सिंह के उपन्यास “काशी का अस्सी” तो कभी इस उपन्यास पर बनने वाली फिल्म,अब मोदी जी के चाय पान की वजह से यह अड़ी मीडिया की सुर्खियां बटोर रही है।
देशी- विदेशी, पर्यटको, यात्रियों, रचनाधर्मियो, साधु-संतों, सन्यासियों, सिद्बो को इस अडी पर ही सफलता का मंत्र प्राप्त होता है।

पप्पू के चाय की अड़ी को साहित्य, फिल्म, मीडिया की सुर्खियों में लाने वाले प्रख्यात साहित्यकार काशीनाथ सिंह का मधुर संबंध रॉबर्ट्सगंज की धरती से रहा है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में शिक्षण के दौरान जब कोई छात्र इस क्षेत्र से जाता था तो पहले उसका पता पूछते थे और जब वह छात्र अपना पता रॉबर्ट्सगंज अथवा आसपास के क्षेत्रों से बताता था तो मुस्कुरा कर कहते थे- “हमरो ससुराल रापटगंज मे बा।”

भीड़ भाड़ वाली पप्पू के चाय की अडी जहां पर स्वसफूर्त अखाड़ियो, बैठकबाजो, अडिबाजो, गप्पबाजो की बहस, दिन-रात कभी खत्म ही नहीं होती है। वहीं से पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को अडिबाजो द्वारा सुझाया गया नारा-” राजा नहीं फकीर है दुनिया की तकदीर है।” ने उनकी तकदीर को ही बदल दिया।

पप्पू की चाय की अड़ी पर की चुस्कियो का आनंद ले चुके वरिष्ठ साहित्यकार रामनाथ शिवेंद्र, पत्रकार नरेंद्र नीरव, पियूष त्रिपाठी, प्राचार्य डॉ गोपाल सिंह सहित सोनभद्र वासियों को पप्पू की चाय की अडी सुर्खियों में लाने वाले साहित्यकार पर गर्व है। यह अड़ी समय-समय पर अपनी सुर्ख़ियों के साथ साथ सोनभद्र जनपद को भी गौरवान्वित करती है।





