संघर्षो का परिणाम रहा सोनभद्र जनपद का उद्घाटन

हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)

सोनभद्र। 4 मार्च 1989 को उद्घाटित जनपद सोनभद्र आज विकास के कई सोपान तय कर चुका है। राष्ट्र की उन्नति में सहायक औद्योगिक संस्थानों के अलावा वर्तमान समय में जनपद में संचालित इंजीनियरिंग कॉलेज, आईटीआई कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज, शैक्षणिक संस्थान जहां एक और युवाओं के चतुर्मुखी उन्नति में सहायक सिद्ध हो रहे हैं वहीं पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज, हवाई अड्डा के आरंभ हो जाने पर जहां एक और योग्य चिकित्सक राष्ट्र की सेवा में योगदान देंगे वही सोनभद्र वासियों को हवाई सेवा की सुविधा मुहैया होगी।

इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-“4 मार्च 1989 को मिर्जापुर के दक्षिणांचल को सोनभद्र जनपद के रूप में एक नई पहचान मिली थी, उस समय मैं 18 वर्ष का युवा था, दिल में काम करने का जज्बा, लेखनी के माध्यम से शासन प्रशासन तक जनसमस्याओं को पहुंचाने का जुनून, जिला बनाओ आंदोलन के संघर्ष समिति का सक्रिय सदस्य, जिला बनाओ आंदोलन के संघर्ष समिति के सदस्यों, पदाधिकारियों, साहित्यकारों, पत्रकारों, नागरिकों, बुद्धिजीवियों के जज्बात, विचारों को शासन प्रशासन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कंधे पर उठाए, राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज के छात्र नेता के रूप में में सक्रिय था। जनपद मिर्जापुर के दक्षिणांचल के नाम से आधुनिक सोनभद्र को जाना जाता था।

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सोनभद्र जनपद के सृजन में रॉबर्ट्सगंज तहसील के साहित्यकारों, पत्रकारों, समाजसेवियों, राजनेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है इनमें सर्वप्रथम रॉबर्ट्सगंज संसदीय क्षेत्र के सांसद स्वर्गीय राम प्यारे पनिका विधायक तीरथराज, प्रख्यात पत्रकार महावीर प्रसाद जालान, सत्यनारायण जालान, युवा पत्रकार मुर्तुजा हसन हाशमी, जितेंद्र सिंह, अधिवक्ताओं में चंद्र भूषण मिश्रा, महेंद्र नाथ पांडे, रमेश देव पांडे, श्याम नारायण पांडे रॉबर्ट्सगंज नगर में आंदोलन के नेतृत्व को धार देने वाले युवा श्याम राय, श्याम दुबे, सुधांशु राय, ज्ञानेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव, भोलानाथ मिश्रा , दीपक कुमार केसरवानी आदि युवाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।”

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4 मार्च 1989 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी नवीन मंडी समिति परिषद के मंच पर जनपद सोनभद्र का उद्घाटन करते हुए कहा था कि -” उत्तर प्रदेश के मानचित्र पर एक नए जनपद का उदय हुआ है और एक दिन यह जनपद भारतभद्र बनेगा उन्होंने इस जनपद के युवाओं को रोजगार और जनपद विकास की तमाम बातें कही थी और एक स्लोगन दिया था कि अमीरों से पैसा लो गरीबों को पैसा बाटो, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण उन्होंने रॉबर्ट्सगंज को अस्थाई मुख्यालय घोषित किया था।

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उस समय शिव आधार सिंह नेता के संपादन में मुंशी घाट वाराणसी से प्रकाशित मासिक पत्रिका अपराध संग्रह का विशेष प्रतिनिधि के द्वारा उत्तर प्रदेश का 62 वां जिला सोनभद्र शीर्षक से एक लेख का प्रकाशन किया था इसके अलावा उस समय जनपद उद्घाटन का समाचार आज, स्वतंत्र भारत ,अमृत प्रभात, जन वार्ता, दैनिक जागरण, भारत दूत, घाटी का दर्द (साप्ताहिक समाचार पत्र) आदि समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ था, जनपद के स्थापना के अवसर पर मुख्यमंत्री के सम्मान में एवं जिला बनाओ आंदोलन की विस्तृत गाथा,अन्य विवरण पंफलेट के रूप में वितरित किया गया था। आज भी यह सभी प्रकाशित सामग्रियां विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के कार्यालय मैं संग्रहित है।

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नगर पालिका परिषद रॉबर्ट्सगंज के पूर्व चेयरमैन जितेंद्र सिंह के अनुसार-“4 मार्च 1989 को सभी नगर वासियों ने अपने घरों पर दीपक जलाकर जनपद के स्थापना दिवस को पूरे नगर में बड़े उत्साह के साथ उत्सव के रूप में मनाया गया इस अवसर पर पटाखे फोड़े गए मिठाईयां बांटी गई और नगर वासियों ने अपने घरों और दुकानों को दीप मालाओं से सजाया था। वहीं दूसरी ओर दुद्धी तहसील की जनता ने इसका विरोध कर काला दिवस के रूप में इस दिन को मनाया था।

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पूर्व विधायक तीरथ राज के अनुसार-“ जनपद की स्थापना के समय मैं युवा राजनीतिज्ञ था और लोगों में जोश- खरोश, अपने माटी के प्रति प्रेम को हमने देखा था, दुद्धी तहसील के लोग सोनभद्र जनपद का मुख्यालय दुद्धी वे चाहते थे इसलिए वे प्रबल विरोध कर रहे थे मुख्यमंत्री द्वारा सोनभद्र जनपद के उद्घाटन का कार्यक्रम कई बार टला लेकिन 1 मार्च 1989 को सुरक्षा व्यवस्था हेलीपैड के निर्माण आदि को देखकर ऐसा लगा कि अब हमारी लड़ाई का फल मिलने वाला है और यही हुआ 4 मार्च 1989 को मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने सोनभद्र जनपद का उद्घाटन नवीन मंडी समिति परिसर के भव्य मंच पर किया और उन्होंने जनपद के प्रथम जिलाधिकारी सुरेश चंद्र दीक्षित एवं पुलिस अधीक्षक रिजवान अहमद का परिचय भी वहां उपस्थित जनता से कराया था।

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वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सो०बा०ए० के अध्यक्ष विनोद चौबे के अनुसार -“जनपद के उद्घाटन के पश्चात रावटसगंज नगर के लोगों को मुख्यालय की लड़ाई लड़नी पड़ी जिसमें अधिवक्ता समाज का विशेष रूप से महत्वपूर्ण योगदान रहा लेकिन हमें इस लड़ाई में सफलता नहीं मिल पाई और राजनीतिक षड्यंत्र के तहत मुख्यमंत्री को फर्जी कागजात दिखाकर पिपरी को जनपद सोनभद्र का मुख्यालय घोषित करा दिया गया था,जिसका विरोध जनता- जनार्दन ने किया और सत्ता पलट के बाद मुख्यमंत्री सुश्री मायावती के शासनकाल में सोनभद्र का स्थाई मुख्यालय रावटसगंज को घोषित कर मुख्यालय विवाद को लगाम दे दिया था ।

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डॉक्टर अर्जुन दास केसरी के अनुसार -“4 मार्च 1989 को सोनभद्र जनपद के उद्घाटन के बाद इस क्षेत्र के पुरातात्विक, ऐतिहासिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक रूप से एक स्वतंत्र पहचान प्राप्त मिली। सलखन स्थित फॉसिल्स पार्क को 35 देशों के वैज्ञानिकों ने विश्व का सबसे खूबसूरत, अधिक क्षेत्रफल वाला, डेढ़ अरब वर्ष प्राचीन बताकर पूरे विश्व में तहलका मचा दिया था, इसी प्रकार सोनभद्र जनपद में पुरातत्वविद आर्किबाल्ड कारनाइल्स ने सोनभद्र के जंगलों में प्रथम गुफा चित्रों की खोज विश्व के पुरातत्वविदों का ध्यान सोनभद्र जनपद की ओर आकर्षित किया था शोध और अध्ययन के पश्चात उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि विश्व का सबसे ज्यादा गुफा चित्रों वाला क्षेत्र सोनभद्र जनपद है।

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वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर के मुताबिक-” आदिवासी संस्कृति से ओतप्रोत आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र में भले ही आदिवासियों को आर्थिक रूप से दीन हींन दृष्टि से देखा जाता हो लेकिन संस्कृति, साहित्य, कला से समृद्ध इस क्षेत्र में प्रचलित करमा नृत्य के बिना केंद्र सरकार, राज्य सरकार का कोई भी सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरा नहीं होता है। सोनभद्र जनपद अपने आप में एक अनूठा जनपद है जहां पर 130 किलोमीटर की परिधि में भूतात्विक,पुरातात्विक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आदिवासी संस्कृति की अपनी एक अलग पहचान है इनके संरक्षण संवर्धन पर्यटन विकास का कार्य होना चाहिए।
वरिष्ठ कथाकार रामनाथ शिवेंद्र का मानना है कि-“आज जनपद सोनभद्र की स्थापना को 32 वर्ष पूरे हो चुके हैं ,जनपद की स्थापना, जनपद मुख्यालय के आंदोलन में भाग लेने वाले अनेकों आंदोलनकारी दिवंगत हो चुके हैं उस समय के युवा आज प्रौढ़ हो चुके हैं, बावजूद इसके इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज सोनभद्र की स्थापना, मुख्यालय के लिए संघर्ष की गाथा जनपद वासियों को हमेशा अपने अधिकारों के लड़ाई के लिए प्रेरित करती रहेगी । “
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जनपद सोनभद्र को इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, हवाई अड्डा इत्यादि सरकारी योजनाओं की सौगात दी गई है उसी प्रकार सोनभद्र जनपद को विभाजित कर एक नए जनपद की स्थापना निश्चित रूप सरकार द्वारा की जाएगी। इससे।दुद्धी क्षेत्र की जनता को इसका लाभ भविष्य में निश्चित रूप से मिलेगा।

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