इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हैं शिव शंकर प्रसाद केसरवानी

HIGHLIGHTS

  • स्वाधीनता आंदोलन में रही महत्वपूर्ण भूमिका।
  • कुशल समाजसेवी राजनीतिज्ञ माने जाते थे।
  • ना कभी चुनाव लड़े ना कोई पद स्वीकार किया।
हर्षवर्धन केसरवानी
(संवाददाता)

सोनभद्र। स्वतंत्रा की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर संपूर्ण देश में मनाया जाने वाला अमृत महोत्सव के अंतर्गत जनपद के भूले- बिसरे, नाम- अनाम सेनानियों, महान व्यक्तियों, समाजसेवियों जो सोनभद्र नगर के नीव के पत्थर रहे हैं। जिनके उत्कृष्ट सामाजिक राजनीतिक सांस्कृतिक कार्यों के कारण सन 1846 में स्थापित रॉबर्ट्सगंज शहर (सोनभद्र नगर) सतत विकास की ओर अग्रसर है और आगे भी रहेगा।

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ऐसे महान व्यक्तियों में नगर के प्रमुख समाजसेवी, राजनीतिज्ञ, व्यवसायी शिव शंकर प्रसाद केसरवानी का नाम इतिहास के स्वर्णाक्षरों में अंकित है।
इस महान समाज सेवी का जन्म महाशिवरात्रि के दिन सन 1911 में रॉबर्ट्सगंज शहर में हुआ था।
इनके पूर्वज केसर के व्यवसाय के सिलसिले में कश्मीर से गंगा- यमुना- सरस्वती के संगम तट त्रिवेणी के किनारे पवित्र, धार्मिक नगरी के प्रयागराज के भरवारी गांव (वर्तमान समय में कौशांबी जनपद का नगर पालिका परिषद) में आकर बस गए।

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देश में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध चल रहे हैं स्वाधीनता आंदोलन में क्रांतिकारियों, देशभक्तों, सेनानियों के सहयोग के कारण शिव शंकर प्रसाद केसरवानी के प्रतिपितामह भूरालाल केसरवानी को घर, जायजाद, व्यवसाय को त्याग कर मिर्जापुर जनपद के दक्षिणांचल के बरकरा गांव में बसना पड़ा। रॉबर्ट्सगंज नगर की स्थापना, शाहगंज में संचालित कुसाचा तहसील का नगर में स्थानांतरण में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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रॉबर्ट्सगंज नगर के प्रथम नागरिक जगन्नाथ साहू के पौत्र और व्यवसायी प्यारेलाल के पुत्र शिव शंकर प्रसाद केसरवानी ने नगर में संचालित स्थानीय भाषा (हिंदी- उर्दू) में मिडिल स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात पिता के साथ नगर के चौराहे के उत्तरी छोर पर स्थित (किराने कपड़े की दुकान व्यवसाय) से जुड़ गए। इनका विवाह संस्कार सोन नदी के किनारे स्थित रजधन गांव में 3 फरवरी बसंत पंचमी सन 1930 को पार्वती देवी के साथ हुआ।

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राबर्ट्सगंज कस्बा मैं तहसील मुख्यालय, थाना, अस्पताल, स्कूल, डाकघर अवस्थित होने के कारण यहां पर शासकीय कार्य, व्यवसाय के सिलसिले में बनारस, मिर्जापुर, अहरौरा आदि शहरों के लोगों के आगमन के कारण नगर की आर्थिक, सामाजिक स्थिति अच्छी थी। सन 1918 में मिर्जापुर शहर में कांग्रेस के गठन होने के बाद कांग्रेस की नीतियों, कार्यक्रमों, महात्मा गांधी द्वारा चलाए जा रहे आंदोलनों के प्रचार- प्रसार के कारण नगर के युवाओं का झुकाव राजनीति की ओर हो रहा था इनमें शिव शंकर प्रसाद केसरवानी मुख्य रूप से थे। प्रतिदिन शाम को अक्सर इनकी दुकान पर बैठकी मे नगर की समस्याओ, राजनीतिक आदि विषयो पर चर्चाएं होती थी। 5 अक्टूबर 1928 ईस्वी को रॉबर्ट्सगंज टाउन एरिया की स्थापना, समाजसेवी बद्रीनारायण केसरवानी के चेयरमैन मनोनीत होने में युवा शिव शंकर प्रसाद केसरवानी सहित अन्य युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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नगर में टाउन एरिया की स्थापना और चेयरमैन के मनोनयन से नगर के विकास को गति मिली वही नगर को एक प्रशासक चेयरमैन के रूप में मिला जो नगर व प्रशासन के मध्य कड़ी का कार्य करता था।
27 दिसंबर सन 1937 को कंपनी बाग (चाचा नेहरू पार्क) में आयोजित तृतीय जिला राजनैतिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि, लोकप्रिय नेता पंडित जवाहरलाल नेहरु की सभा की तैयारियों में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा और नेहरु जी का स्वागत, माल्यार्पण इन्होंने मुख्य चौराहे पर किया था।
आर्थिक रूप से संपन्न होने के कारण यह ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध आंदोलन में भाग लेने वाले क्रांतिकारियों, देशभक्तों, नेताओं का आर्थिक रूप से सहयोग करते थे जिसके कारण पुलिस की आंखों की किरकिरी बने हुए थे। नगर में आयोजित आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा दिया करते थे।
नगर के युवाओं पैठ रखने वाले शिव शंकर प्रसाद केसरवानी स्थानीय समस्याओं के निदान हेतु निरंतर सक्रिय रहें और इन्होंने नगर में एक उच्च शिक्षण संस्थान की स्थापना के लिए मिर्जापुर के कलेक्टर को एक पत्र भी लिखा था।

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14 अगस्त 1947 को जब नगर के निवासियों को आजादी की सूचना मिली तो रात्रि में ही इन्होंने अपने मित्र मोहनलाल गुप्ता के साथ मिलकर नगर भर में मिठाई बांटा, 15 अगस्त1947 को सुबह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बलराम दास केसरवानी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यालय से जुलूस निकाला गया, इनमें शिव शंकर प्रसाद केसरवानी, भोला सेठ, अली हुसैन उर्फ बेचू, चंद्रशेखर वैद्य, मोहनलाल गुप्ता नगर के नागरिकों ने भाग लिया था। जुलूस कंपनी बाग (वर्तमान चाचा नेहरू पार्क) पहुंचा। जहां पर बलराम दास केसरवानी ने ध्वजारोहण किया और एक उच्च शिक्षण संस्थान की स्थापना का संकल्प दोहराते हुए रॉबर्ट्सगंज इंग्लिश हाई स्कूल की स्थापना करते हुए मिडिल स्कूल का दो कमरा किराए पर ले लेकर कक्षा 9 का क्लास प्रारंभ कराया।
सन 1948 में स्वतंत्र भारत में हुए स्थानीय निकाय चुनाव रॉबर्ट्सगंज नगर के द्वितीय चेयरमैन बलराम दास केसरवानी के चुनाव मे इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, आगामी विधानसभा लोकसभा, स्थानीय निकाय चुनाव में इनकी सक्रिय भागीदारी रही, बावजूद इसके इन्होंने कभी कोई चुनाव लड़ा और न ही कोई पद स्वीकार किया। ये अनवरत रूप से अपने व्यवसाय में लगे रहे।

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प्रतिदिन शाम को व्यवसायिक कार्य से फुर्सत मिलने पर इनके दुकान पर बैठकी होती थी जिनमें भोलानाथ केजरीवाल, बलराम दास केसरवानी, विश्वनाथ प्रसाद “खादिम” डॉक्टर कन्हैयालाल, हनुमान दास केसरी आदि राजनीतिज्ञ,समाजसेवी, गणमान्य नागरिक दिनभर की राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक घटनाओं से रूबरू होते थे।
नगर के आरटीएस क्लब मे आयोजित सप्त दिवसीय जन्माष्टमी की झांकी, शंकर मंदिर की झांकी, रामलीला, रासलीला आदि सांस्कृतिक, सामाजिक कार्यक्रमों, राजनीतिक जलसो मे इनकी सक्रिय भागीदारी होती थी। मितव्यी, कर्मठ, सूचनाओं के भंडार, पुराने दस्तावेजों के संग्राहक, नगर की राजनीति में महति भूमिका अदा करने वाले शिव शंकर प्रसाद केसरवानी स्वस्थ, दीर्घायु जीवन व्यतीत करते हुए
30 दिसंबर 1991 ईसवी को अपने पैतृक आवास पर ब्रह्मलीन हुए।
समाजसेवी शिवशंकर प्रसाद केसरवानी की 111 वीं जयंती के अवसर पर हम सोनभद्र नगरवासी उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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