वाराणसी एवं विंध्याचल मंडल के साहित्यकारों के व्यक्तित्व- कृतित्व पर होगा पुस्तक का प्रकाशन : ओम धीरज

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सोनभद्र। असुविधा पत्रिका परिवार द्वारा हर्ष नगर स्थित कार्यालय पर साहित्यिक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पूर्व प्रशासनिक अधिकारी,वरिष्ठ साहित्यकार ओम धीरज को असुविधा पत्रिका के संपादक, उपन्यासकार- कथाकार रामनाथ “शिवेंद्र”एवं विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक, वरिष्ठ साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी द्वारा पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया।

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इस अवसर पर अपना विचार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के आयोजक रामनाथ शिवेंद्र ने कहा कि-“समाज में कुछ ऐसे विलक्षण व्यक्ति होते हैं जो अपनी विलक्षण व्यक्तित्व कृतित्व के लिए जाने जाते हैं उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा में अधिकारी रहते हुए अनेक जनपद में बतौर एसडीएम और एडीएम पद रहते हुए वाराणसी के अपर जिला अधिकारी (प्रोटोकॉल व पर्यटन) के पद से सेवानिवृत्त हुए और आप द्वारा बेघर हुए अलाव (गीत संग्रह) सावन सूखे पांव (गीत संग्रह) बंधे नाव किस ठांव (गीत संग्रह) सजातो येन जातेन (भरथरी के तीनों स शतकोंका हिंदी अनुवाद) कब तक प्रकाशन हो चुका है।

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विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर देश ट्रस्ट के निदेशक एवं सोनघाटी पत्रिका के प्रधान संपादक दीपक कुमार केसरवानी ने उनकी अन्य कृतियों पर अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-” रेत में बहता जल (1997) यादें अतीत की (2001) पूर्वांचल की माटी (2002) गोमती के स्वर (2004) लोकगीत नई दस्तक (2009) नवगीत के नए प्रतिमान (2012) शब्द आयन (2012) गीत बसुधा (2013) इत्यादि पुस्तकों में धीरज जी की रचनाएं प्रकाशित हो चुकी है। आलोचना कृति गीत का आकाश (2010) में एक प्रतिनिधि गीतकार के रूप में चयन। आपके द्वारा साक्षर सुमन(36 कवियों की रचनाओं का संकलन) चंदौली: कल और आज (दस्तावेजी स्मारिका सबके दावेदार इस साहित्यिक पत्रिका में सलाहकार संपादक, शब्दिता रहे ( परामर्शदाता मंडल के सदस्य) अक्षर आरसी (साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था जौनपुर) संस्थापक संरक्षक अपने पैतृक गांव में पुस्तकालय का संचालन वर्तमान समय मे जारी है।

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राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा जयशंकर प्रसाद पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा निराला पुरस्कार, हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा साहित्य महोपाध्याय मानद उपाधि, पंडित श्री कृष्ण तिवारी साहित्य सम्मान, लेखक स्मृति साहित्य श्री सम्मान, श्री शिव बहादुर सिंह भदौरिया स्मृति गीत सम्मान, महाप्राण निराला सम्मान, पंडित श्याम लाल पांडे स्मृति सम्मान, सरस्वती सम्मान, पंडित लक्ष्मी नाथ मिश्र सम्मान, संगम सृजन सम्मान, लोक रस सम्मान, हिंदी गौरव सम्मान, पहरूवा सम्मान, साहित्य शिरोमणि की उपाधि कर चुके हैं।

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वही अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में ओम धीरज ने कहा कि-“हम लोगों से सुनते चले आए हैं कि हमारे पास समय नहीं है, हम बहुत व्यस्त हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है जहां चाह वहां राह है, जीवन के चिकने, कंकरीले, पथरीले मार्ग पर चलते हुए मुझे जीवन में बहुत से खट्टे मीठे अनुभव हुए हैं जिसका संकलन मैंने अपनी काव्य कृति और गद्य कृतियों में किया है। अब हमारे लेखन का उद्देश्य है कि वाराणसी मंडल, विंध्याचल मंडल व अन्य जनपदों के वरिष्ठ साहित्यकारों के व्यक्तित्व, कृतित्व को उजागर करती हुई एक कृति की रचना की जाए जिसके माध्यम से उस क्षेत्र का इतिहास, भूगोल, पुरातत्व, साहित्य, कला, संस्कृति उनके जीवन वृत्त के माध्यम से संकलित हो सके। इस अवसर पर साहित्यकार, पत्रकार व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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