सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की मनाई गई जयंती

HIGHLIGHTS

  • भोजपुरी के गीतकार जगदीश पंथी हुए सम्मानित
  • निराला जयंती को पकौड़ी दिवस मनाने की परंपरा
  • मधुरिमा साहित्य गोष्ठी द्वारा किया गया आयोजन
  • वर्षों से चली आ रही है
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सोनभद्र। बसन्तोत्सव के पावन पर्व पर मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के तत्वावधान में विख्यात कवि व चिन्तक अजय शेखर के अध्यक्षता में उनके निज आवास पर महाप्राण पं० सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयन्ती परम्परागत रूप से मनायी गयी जिसका संचालन गजलकार अशोक तिवारी ने किया।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के निदेशक अजय शेखर ने कहा कि-” भूखण्ड किसी राष्ट्र की पहचान नही है भौगोलिक सीमाएं बदलती रहती हैं संस्कृति देश की आत्मा होती है यदि वह मिट जाए तो देश अपना अस्तित्व खो देता है महाप्राण निराला एक ऐसे युग द्रष्टा कवि थे जिनके भीतर युग चेतना समाहित थी।
वरिष्ठ साहित्यकार अर्जुन दास केसरी ने कहा कि-” निराला का साहित्य व अंदाज निराला था उनका सम्पूर्ण जीवन देश जन की सेवा के लिए समर्पित था।

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विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-“साहित्यकार अजय शेखर की खुले आंगन में ईटों को जोड़कर बनाया गया परंपरागत चूल्हा, चूल्हे में जलती हुई लकड़िया, चूल्हे पर रखे कढ़ाई में उबलते हुए सरसों के तेल में बेसन से सनी हुई गोभी, पालक, प्याज की हरे, पीले रंग की उछलती, कूदती, नाचती, बुदबुदाती पकौड़ियां, चूल्हे की आग पर डेकची उबलता हुआ चाय, मौनवार्ता करते, चूल्हे की आग को धीमा- तेज,खर- सेवर पकौड़ी, ठंडी चाय, गरम चाय की जांच करते बगुले की पर की तरह सफेद दाढ़ी- मूछ वाले मुस्कुराते,कविता गुनगुनाते पाक शास्त्री गीतकार जगदीश पंथी

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बसंत पंचमी की गुनगुनी धूप में लाल कुर्सी पर बिन बुलाए परंपरागत साहित्यकारों को बड़े विनीत, स्नेह, प्रेम भाव से पकौड़ी का दोना पकड़ाते आशुतोष पांडे (मुन्ना)। गरमा- गरम चाय के साथ पकौड़ी के साथ काव्य संतो के काव्य रस का आनंद उठाते, बसंती बयार में डूबते- उतराते मंत्रमुग्ध श्रोता। यह दृश्य प्रतिवर्ष साहित्य प्रेमियों के सामने बसंत पंचमी यानी फक्कड़ मिजाज, काव्य सर्जक, कवि महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती के अवसर पर होता है, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का पकौड़ी प्रेम, पकौड़ी पर लिखी कविता उनकी जयंती पर वर्षों से चली आ रही परंपरा अनुसार बसंत पंचमी के दिन काव्य प्रेमियों के मध्य रॉबर्ट्सगंज नगर की साहित्यिक धरा आंगन में सार्थक सिद्ध होती हैं। महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की गरम पकौड़ी कविता-“ऐ गर्म पकौड़ी,
तेल की भुनी
नमक मिर्च की मिली,
ऐ गर्म पकौड़ी !
मेरी जीभ जल गयी
सिसकियां निकल रहीं,
लार की बूंदें कितनी टपकीं,
पर दाढ़ तले दबा ही रक्‍खा मैंने।”

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उक्त अवसर पर कथाकार रामनाथ शिवेन्द्र, मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी,जगदीश पंथी,शुशील राही, कृपा शंकर द्विवेदी सोनभद्र बार एसोशिएशन के अध्यक्ष महेन्द्र शुक्ला, रमेश देव पाण्डेय, कार्यवाहक अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी फरीद अहमद राकेश शरण मिश्र, प्रदुम्न त्रिपाठी ‘पद्म’, प्रभात सिंह चन्देल, सुनील तिवारी, विकास वर्मा, सरोज सिंह, दिलीप सिंह ‘दीपक’, धर्मेश चौहान, अरविंद सिंह स्वामी, कन्हैया पाण्डेय, जितेन्द्र पासवान, सन्तोष सिंह चन्देल,गोपाल स्वरूप पाठक, इमरान बख्सी, मोइनुद्दीन ‘मिन्टू’, प्रेम प्रकाश राय, विपिन पाण्डेय, बच्चा व अन्य उपस्थित थे।

उक्त अवसर पर भोजपुरी के गीतकार जगदीश पंथी को मधुरमा साहित्य गोष्ठी के निदेशक अजय शेखर, मीडिया फोरम ऑफ इंडिया के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी, विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी, साहित्य संगम के संयोजक राकेश मिश्र, उपाध्यक्ष सुशील राही ने अंगवस्त्रम, लेखनी आदि प्रदान कर सम्मानित किया।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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