भारतीय गणतंत्र देशभक्तों के त्याग,तपस्या, बलिदान का फल है : दीपक कुमार केसरवानी

HIGHLIGHTS

  • ट्रस्ट के निदेशक ने किया ध्वजारोहण।
  • विचार गोष्ठी,काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन।
  • सेनानी पुत्र सोहनलाल केसरी हुए सम्मानित।

हर्षवर्धन केसरवानी

सोनभद्र। 15 अगस्त 1947 को हमारा देश ब्रिटिश हुकूमत से आजाद हुआ था, और देश में स्वदेशी शासन सत्ता की स्थापना हुई। लेकिन देश को सुचारू रूप से चलाने, कानून व्यवस्था बनाए रखने,सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक अधिकार नागरिकों को प्रदान करने के लिए भारतीय नेताओं ने संविधान की रचना की और 26 जनवरी 1950 को हमारे देश में संविधान लागू हुआ हमारे देश को पूर्णता गणराज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।
भारतीय गणतंत्र की स्थापना में हमारे देशभक्तो, क्रांतिकारियों, नेताओं, अधिवक्ताओं, पत्रकारों, साहित्यकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है इनके त्याग, तपस्या, बलिदान का प्रतिफल है कि स्वतंत्रता के पश्चात इन विभूतियों ने भारतीय लोकतंत्र की स्थापना किया हमारा देश विश्व के अन्य स्वतंत्र देशों की श्रेणी में शामिल हुआ। उपरोक्त विचार साहित्य, कला, संस्कृति, समाज सेवा, पर्यावरण के क्षेत्र में ढाई दशक से कार्यरत विंध्य संस्कृत समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट द्वारा भारत के आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर संपूर्ण देश में मनाए जाने वाले भारतीय गणतंत्र दिवस की 73 वीं वर्षगांठ के अवसर पर ट्रस्ट के प्रधान कार्यालय मे आयोजित ध्वजारोहण के पश्चात आयोजित विचार गोष्ठी में ट्रस्ट के निदेशक इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी ने व्यक्त किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य शिवधारी शरण राय ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-“निरंतर जागरूकता स्वाधीनता का मूल मंत्र है और हम पराधीन तब हुए जब हमने इस मूलमंत्र को त्याग दिया और आजाद तब हुए जब हम इस मूलमंत्र को अपनाया। असुविधा पत्रिका के प्रधान संपादक, सुप्रसिद्ध कथाकार रामनाथ “शिवेंद्र” ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-भारतीय समाज में आजादी के 75 वर्ष बाद भी शहीदों देशभक्तो, क्रांतिकारियों का सही मूल्यांकन नहीं हुआ है आज वक्त की मांग है कि सरकार इतिहास का पुनरलेखन कराएं और संपूर्ण देश को सही इतिहास से परिचित कराएं इस इतिहास को शैक्षिक पाठ्यक्रमों में भी शामिल किया जाए ताकि आगे आने वाली पीढ़ियां अपने देश का सच्चा इतिहास पढ़ कर उससे ज्ञान प्राप्त कर सकें।

मीडिया फोरम ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय पार्षद, वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि- स्वाधीनता आंदोलन में प्रतिभाग करने वाले प्रत्येक देशभक्त, क्रांतिकारी नौजवान अधिवक्ता, पत्रकार, साहित्यकार और समाजसेवी थे। इन लोगों के त्याग, तपस्या, बलिदान के कारण आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं।
अविभाजित मिर्जापुर जनपद के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, क्रांतिकारियों के गढ़ अहरौरा नगर के देशभक्त, केसरवानी परिवार की परिजन एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम केसरी के व्यवसाई समाजसेवी सुपुत्र सोहनलाल केसरी को ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी द्वारा माल्यार्पण कर अंगवस्त्रम स्मृति चिन्ह प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सेनानी परिजन सम्मान से सम्मानित किया गया।
सम्मानित सेनानी पुत्र ने अपने विचारों को साझा करते हुए कहा कि-13 अगस्त 1942 को अहरौरा में हुए गोलीकांड के पश्चात मेरे घर के सभी पुरुष सदस्यों को अंग्रेज पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया घर की महिलाएं पुलिस के जोर- जुल्म के डर से अपने- अपने मायके चली गई और पूरा घर सुनसान हो गया इसका लाभ ब्रिटिश सिपाहियों ने उठाया घर को बेखौफ होकर लूटा जायजाद को नीलाम किया और हमारे परिवार को बदहाली, कंगाली के रास्ते पर लाकर खड़ा कर दिया था। बावजूद इसके हमारे बाप दादा ने हार नहीं मानी और वे मिलजुल कर अंग्रेजों से मुकाबला करते रहे। मेरे पिताजी, ताऊ, चाचा सभी ने लंबी जेल यात्राएं की । हमें 15 अगस्त 1947 को हमे आजादी प्राप्त हुई आज हम आजादी की 75की वर्षगांठ मना रहे हैं, आज वाणी के माध्यम से अंग्रेजों के जोर- जुल्म का बखान करना सरल होगा,, लेकिन वे क्रांतिकारी, नौजवान, हमारे पूर्वजों ने कितना दर्द, सामाजिक अपमान सहा होगा तब हमें आजादी मिली, हमें इस आजादी को निरंतर बनाए रखने के लिए देश का मान सम्मान बढ़ाने के लिए देश हित में कार्य कर रहा होगा।

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कार्यक्रम के द्वितीय सत्र मे मीडिया फोरम ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय पार्षद मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ।
काव्य गोष्ठी में शहीद स्थल प्रबंधन समिति के निदेशक/ वरिष्ठ कवि प्रदुम त्रिपाठी न देशभक्ति से ओतप्रोत पर आधारित कविता पढा-
तिरंगा तुझे हम झुकने न देंगे,
मिट जाएंगे तुझे हम मिटने न देंगे।
जिनके खू से जल रहे चिरागे वतन,
है उनकी कसम शमा बुझने न देंगे।
सोन साहित्य संगम के संयोजक राकेश शरण मिश्र “गुरु” ने वर्तमान परिवेश पर काव्य पाठ किया-
उठा पटक का खेल शुरू है, कोई चेला कोई गुरु है।
शायर अशोक तिवारी ने सामाजिक अव्यवस्थाओं पर व्यंग करते हुए काव्य पाठ किया-

“हमको नजरों से गिराने वाले, ढूंढ अब नखरे उठाने वाले. रह जाएंगे मेरे कदमों के निशां बाकी,
मिट जाएंगे हको मिटाने वाले।”
वरिष्ठ कवि मधुप गोरखपुरी ने ठंड के मौसम पर आधारित काव्यात्मक पाठ किया-
“ठंड से तन कापता है,
और मन भी कापता है।
भूख से व्याकुल श्रमिक,
सर पर बोझ लेकर हांफता
है ।”
भोजपुरी के कवि दयानंद “दयालु” ने भोजपुरी भाषा में काव्य पाठ किया-
इतना काहे बदे कमईला,
केहू के नाही खिलाईला ना।
महले पर महल बनाई के,
केहू के काहे नाही बुलाईला ना
गीतिया काहे बनाईके दयानंद,
केहू के काहे सुनील ना।

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काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि हास्य व्यंगकार सुशील “राही” प्रसिद्ध गजलकार शिव नारायण “शिव” वरिष्ठ कवि, दीपक कुमार केसरवानी ने देशभक्ति पर आधारित काव्य रचना का वाचन किया ।
कार्यक्रम में पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष कृष्ण मुरारी गुप्ता, अधिवक्ता/ साहित्यकार राम प्रसाद यादव, साहित्यकार प्रतिभा देवी, तृप्ति केसरवानी,समाजसेवी समाजसेवी राजकुमार केसरी ने अपना- अपना विचार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं वाग्देवी सरस्वती के प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी द्वारा ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, वंदे मातरम के गगनभेदी उद्घोष से हुआ।
विचार गोष्ठी एवं काव्य गोष्ठी का आरंभ कवि सरोज सिंह के सरस्वती वंदना से हुआ।
कार्यक्रम का सफल संचालन ट्रस्ट के मिडिया प्रभारी पत्रकार हर्षवर्धन केसरवानी ने किया।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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