यूपी दिवस के अवसर पर गुरुधाम मंदिर परिसर में हुआ भव्य कार्यक्रम का आयोजन

HIGHLIGHTS

  • अभिलेख प्रदर्शनी, व्याख्यान, सम्मान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का हुआ आयोजन
  • कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया
  • अभिलेख प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश की संरचना को अभिलेखों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

वाराणसी। सोमवार को संस्कृति विभाग उ० प्र० व क्षेत्रीय अभिलेखागार वाराणसी एवं जिला प्रशासन वाराणसी के संयुक्त तत्त्वावधान में आजादी का अमृत महोत्सव एवं चौरी चौरा शताब्दी समारोह के अंतर्गत उत्तर प्रदेश दिवस का आयोजन गुरुधाम मंदिर परिसर गुरुधाम में किया गया। इसके अंतर्गत अभिलेख प्रदर्शनी, व्याख्यान, सम्मान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पद्मश्री प्रो० सरोज चूड़ामणि गोपाल, श्री प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव ( प्रदेश महासचिव, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संगठन उत्तर प्रदेश), जिला पंचायत राज अधिकारी, वाराणसी राघवेंद्र द्विवेदी एवं डॉ० सुभाष चन्द्र यादव, प्रभारी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, वाराणसी के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं कारगिल युद्ध के शहीद के परिजनों का अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में प्रो० सरोज चूड़ामणि गोपाल ने उत्तर प्रदेश दिवस मनाए जाने के औचित्य, महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे। वही लिटिल फ्लॉवर हाउस, नगवां के विद्यार्थियों ने देश भक्ति से ओत प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इसके अंतर्गत गणेश वंदना, वंदेमातरम का गायन एवं देश भक्ति गीतों की संगीतमय प्रस्तुति की गई। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संयोजन भावना सिन्हा एवं सौरभ श्रीवास्तव ने किया। अतिथियों का स्वागत डॉ० सुभाष चंद्र यादव, धन्यवाद राघवेंद्र द्विवेदी एवं कार्यक्रम का संचालन डॉ० सुजीत कुमार चौबे ने किया।

इस अवसर पर आयोजित अभिलेख प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश की संरचना को अभिलेखों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इस अभिलेख प्रदर्शनी में अंग्रेजों के आगमन के पश्चात से वर्तमान उत्तर प्रदेश की स्थापना तक के ऐतिहासिक यात्रा को अभिलेखों की जुबानी रखने का प्रयास किया गया है।

अभिलेख प्रदर्शनी मूलतः तीन भागों में विभाजित है।

प्रथम भाग में अंग्रेजों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों को समय समय पर अपने अधीन करने और प्रशासनिक नीति के अनुपालन में सीमाओं तथा राजधानी के परिवर्तन को मानचित्रों की सहायता से प्रस्तुत किया गया है।

द्वितीय भाग में प्रशासनिक संरचनाओं के विकास, एक सूत्र में बधने, आधारभूत संरचनाओं के विकास को विभिन्न अभिलेखों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

तृतीय भाग में स्वतंत्रता उपरांत विभिन्न देशी राज्यों के भारत गणराज्य में विलय और उत्तर प्रदेश की स्थापना से संबंधित है।
इन तीनों भागों को ऐतिहासिक कालक्रम के अनुसार मिश्रित रूप में प्रस्तुत किया गया है।

कुछ महत्वपूर्ण अभिलेख-

  1. अवध में नवाब वज़ीर का शासन और अवध पर ब्रिटिश सेना का नियंत्रण
  2. हिंदी का न्यायालय की भाषा मे प्रयोग
  3. प्रान्त के नाम परिवर्तित किये जाने संबंधित अभिलेख
  4. लखनऊ स्थित विधान भवन बनाये जाने से संबंधित अभिलेख
  5. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का डॉ संपूर्णानंद को लिखा पत्र
  6. भारतीय देशी राज्यों के विलय से संबंधित दस्तावेज
  7. उत्तर प्रदेश राजभाषा अधिनियम

आयोजित अभिलेख प्रदर्शनी का संयोजन डॉ० हरेन्द्र नारायण द्वारा किया गया। इस अवसर पर सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी, वाराणसी राकेश यादव, अदिति गुलाटी, मनोरमा, प्रशांत राय, श्वेतेश उपाध्याय, डॉ० स्वतंत्र सिंह, वंदना गुप्ता, आनद पाल, बलराम, मनोज, प्रदीप, श्रीकृष्ण, पंच बहादुर सहित आदि लोग कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उपस्थित रहे।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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