नेताजी सुभाष चंद्र बोस का संबंध पूर्वर्ती जनपद मिर्जापुर से रहा है : दीपक कुमार केसरवानी

सोनभद्र। आजाद हिंद फौज के संस्थापक, सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी, क्रांति दृष्टा, ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध संपूर्ण विश्व की मदद से आजाद हिंद फौज का गठन करने वाले, तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा, दिल्ली चलो जैसे क्रांतिकारी नारों से संपूर्ण देश में क्रांति की ज्वाला जगाने वाले क्रांतिकारी नेता सुभाष चंद्र बोस का संबंध पूर्ववर्ती जनपद मिर्जापुर से रहा है। उपरोक्त विचार जनपद के सदर ब्लॉक की ऊँचडीह ग्राम पंचायत में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की 125 वीं जयंती अवसर पर आयोजित संगोष्ठी मे विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/ इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी ने व्यक्त किया।

नेताजी के व्यक्तित्व कृतित्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि-” सन 1940 में जब संपूर्ण देश पर ब्रिटिश हुक्मरानों द्वारा स्वाधीनता आंदोलन को हथियारों के बल पर बुरी तरह कुचला जा रहा था और देश की राजनीति संप्रदायिकता में तब्दील हो चुकी थी, हिंदू- मुसलमान एक दूसरे के खून के प्यासे हो चुके थे, ऐसी स्थिति में देश सांप्रदायिक दौर से गुजर रहा था भारतीय समाज और भारतीय नेताओं में निराशा के बादल छाए हुए थे तब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने निर्णय लिया कि हमें संपूर्ण देशवासियों में स्वतंत्रता के प्रति जन- जागरूकता फैलाना चाहिए और इसके लिए व्यापक अभियान चलाना चाहिए। इसी वर्ष मिर्जापुर कांग्रेस कमेटी का चुनाव हुआ जिसमें सोनभद्र जनपद के प्ररासी दुबे के क्रांतिकारी, देशभक्त, नेता पंडित महादेव प्रसाद चौबे को जिला अध्यक्ष चुना गया। नवनियुक्त अध्यक्ष के नेतृत्व में मिर्जापुर जनपद के आदिवासी, आदिवासी, बनवासी, जंगली इलाकों में निवास करने वाले रहवासियों एवं जनपद के सभी तहसीलो के निवासियों में देश के स्वतंत्रता के प्रति जन- जागरूकता जगाने के उद्देश्य से मिर्जापुर जनपद का पांचवा राजनीतिक सम्मेलन लालगंज में 7 और 8 मार्च मनाए जाने का निर्णय लिया गया।

निर्धारित तिथि पर पंडित महादेव की अध्यक्षता नेताजी सुभाष चंद्र बोस के मुख्य अतिथि, जेड अहमद, रफी अहमद के विशिष्ट आतिथ्य, युसूफ इमाम बैरिस्टर, बद्री प्रसाद आजाद के
संयोजकत्त्व में आयोजित राजनैतिक सम्मेलन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उपस्थित जनमानस का क्रांतिकारी आवाहन करते हुए कहा कि- देश को अंग्रेजी दासता से मुक्ति के लिए समाज के हर वर्ग को अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए आगे आना पड़ेगा तभी हम आजाद होंगे, अनेक क्रांतिकारी विचारों को नेता जी ने लगभग 2 घंटे तक जनमानस के समक्ष रखा। इसका परिणाम यह हुआ कि सन 1940 के बाद अविभाजित मिर्जापुर जनपद के दुद्धी, रॉबर्ट्सगंज, चुनार, सदर तहसील में निवास करने वाले देशभक्तों, क्रांतिकारियों के मन- मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ा और नौजवान सर पर कफन बांध कर निकल पड़े माता को अंग्रेजी दासता की हथकड़ियों बेड़ियों को तोड़ने के लिए, इसका सुखद परिणाम यह रहा कि 15 अगस्त 1947 को देशभक्तों, वीरो, क्रांतिकारियों के बलिदान स्वरूप हमें आजादी प्राप्त हुई।

सोन साहित्य संगम के निदेशक, वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी की सदारत में मुख्यातिथि, संत कीनाराम पीजी कालेज के प्राचार्य डॉ० गोपाल सिंह ने वर्तमान परिवेश में सुभाष चंद की प्रासंगिकता की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार विजय शंकर चतुर्वेदी ने कंबल भेंट , पुस्तक के लोकार्पण समेत जयंती के आयोजन के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बताते हुए आयोजक
ओम प्रकाश त्रिपाठी उनके पुत्र राकेश त्रिपाठी (शिशु जी), राजीव त्रिपाठी और अनुपम त्रिपाठी को रचनात्मक कार्य के लिए साधुवाद दिया। प्रसिद्ध इंजीनियर एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ जय नारायण तिवारी ने सुभाष चन्द्र बोस के बताए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया ।

सोन साहित्य संगम के संयोजक एवं बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश के अनुशासन समिति सदस्य
राकेश शरण मिश्र,कम्पोजिट विद्यालय अंग्रेजी मीडियम के प्रधानाध्यापक आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने भी सम्बोधित किया। शिक्षाविद समय नाथ त्रिपाठी ,माता अन्नपूर्णा देवी स्मृति सेवा संस्थान उत्तर प्रदेश के निदेशक किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य व राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ० ओमप्रकाश त्रिपाठी ने विषय प्रवर्तन और आभार प्रदर्शन में अपने मनोगत भाव व्यक्त करते हुए ‘संगिनी’ पुस्तक की पृष्ठभूमि साझा कर सभी को द्रवित कर दिया ।

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स्वागत भाषण राकेश त्रिपाठी ने दिया । आयोजन का संचालन पत्रकार भोलानाथ मिश्र ने किया ।
इस अवसर पर हर साल की भांति इस वर्ष भी ओमप्रकाश त्रिपाठी की ओर से ग्राम देवताओं को कंबल , शाल , मफलर भेंट किया गया । इसके पूर्व अतिथियों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस एवं मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
वीणा वादिनी की आराधना कवि सरोज सिंह ने की। इस मौके पर ग्राम प्रधान अर्चना त्रिपाठी, गोपाल त्रिपाठी, पूर्व सैनिक सुदर्शन पांडेय समेत सैकड़ों ग्रामवासी मौजूद रहे।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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