पूर्व कद्दावर श्रमिक नेता जनार्दन प्रसाद पाण्डेय से मुलाकात और चुनावी चर्चा

राम अनुज धर द्विवेदी

सोनभद्र। मीडिया फोरम ऑफ इंडिया न्यास के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी और पत्रकार राजेश द्विवेदी के साथ सोमवार को रॉबर्ट्सगंज से महुआंव पांडेय गांव तक की यात्रा कई मायने मेंऐतिहासिक तो साबित हुई हीसाथ ही एक ऐसी मुलाकात की साक्षी भी बनी जिसमेंविधान सभा चुनाव समेत सनातन संस्कृति व धर्म पर सार्थक चर्चा भी हुई।
बोनस के मुद्दे को लेकर 1974 में उत्तर प्रदेश राज्य सीमेंट निगम की यूनिट डाला सीमेंट फैक्ट्री की चिमनियों का धुंआ एक आवाज में ठप करा देने वाले मजदूर नेता जनार्दन प्रसाद पाण्डेय अब 75 वर्ष के हो गए हैं लेकिन उनकी युवा सोच की जोश आज के हालात पर सटीक टिप्पणी 2024 की तस्वीर की झलक प्रस्तुत कर रही थी।
सार्वजनिक क्षेत्र में संचालित हो रही डाला सीमेंट फैक्ट्री को 1991 में तत्कालीन प्रदेश सरकार द्वारा निजीकरण किए जाने को लेकर किए जा रहे श्रमिकों के आंदोलन के नेतृत्वकर्ता डाला गोलीकांड के भुक्त भोगी व कद्दावर नेता रहे कामरेड जनार्दन प्रसाद पांडेय ने सनातन धर्म व संस्कृति की आध्यात्मिक व्याख्या व उसके दार्शनिक पहलू पर श्रीरामचरितमानस के एक श्लोक से शिव के स्वरूप के आधार पर सनातन और ब्राह्मण की विशद, रोचक व तथ्यात्मक व्याख्या से सोचने पर विवष कर दिया।

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पांच विंधानसभा चुनावो में यूपी के चुनाव के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने सवाल पूछा कि सत्ता बदलने से क्या होगा! यदि योगी हारते है तो जीतने वाला कौन है ? इससे आम जनता को क्या हासिल होने वाला है ? क्या लोगों को रोजगार मिलने की संभावना के लिए कोई ब्लू प्रिंट किसी दल के पास है, नही है । सभी दल केवल देने की बात तो करते है लेकिन ये नही बताते की देने के लिए धन का स्रोत क्या होगा!
आगे कहते हैं कि सार्वजनिक उपक्रमों से रोजगार सृजित होता है । आज बीजेपी सब कुछ निजी क्षेत्रों के लिए कर रही है जिससे लोगो को रोजगार मिलने की कोई सम्भावना नही दिखती। अपने जमाने के कद्दावर श्रमिक नेता ने पूछा कि बीजेपी किसानों की आय दुगुनी करने की बात कर रही है लेकिन दोगुनी आय कैसे होगी यह नही बताती । धर्म की गलत व्याख्या करने वाले लोगों को गुमराह करते हैं । सभी राजनीतिक दलों की कार्य पद्धति तकरीबन एक ही तरह की है । यहाँ चुनाव में केवल सत्ता ही स्थानांतरित होती है। इससे लोगो की माली स्थिति में कोई खास परिवर्तन परिलक्षित नही होता। प्रेरित धर द्विवेदी,प्रज्ज्वल धर, अर्जुन पाण्डेय, भार्गव पाण्डेय , राम अनुज धर द्विवेदी , चन्द्र शेखर पाण्डेय आदि के साथ चाय पर चुनावी चर्चा लगभग दो घण्टे चली। इस दौरान राज नीतिक दलों और उनके नेताओं के चाल चलन , नीति और नियति तथा भावी कार्यक्रमो आदि पर ग्रामीणों ने खुलकर विचार व्यक्त किए । देशज स्वल्पाहार के साथ एडवोकेट एवं पत्रकार राम अनुज धर द्विवेदी के घर हुई चर्चा का विषय भी विंधानसभा 2022 का चुनाव ही था। महुआंव पांडेय गांव के मूल निवासी वयोवृद्ध श्रमिक नेता जनार्दन प्रसाद पाण्डेय के ऐतिहासिक आंदोलन
ही ऐसे है कि उन्हें यूं ही भुलाया नही जा सकता !

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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