डाला, सोनभद्र। वन क्षेत्र में धड़ल्ले से हो रहे हरे पेड़ो की अवैध कटाई से जंगल विरान हो रहे हैं। प्रत्येक वर्ष पौधरोपण के नाम पर विभाग की ओर से लाखों पेड़ तो लगाए जाते हैं। लेकिन अधिकांश पौधे जंगलों में नही बल्कि कागज में ही सिमट जाते है । जमीन पर नजर नही आते। बचेखुचे पेड़ भी विभाग की उदासीनता के चलते प्रति वर्ष आग की भेंट चढ़ जा रहे हैं।
अबाड़ी, गौराही पतगड़ी एवं रानीताली का जंगल वन माफियाओं के लिए विभागीय मिलीभगत के कारण सुरक्षित ठिकाना बना हुआ हैं, वही मजे की बात तो यह कि वनों की रखवाली के लिए वन रेंज में वाचर, वन दरोगा के साथ ही अन्य कर्मचारी तैनात हैं। बावजूद इसके जंगलों से प्रतिदिन हरे पेड़ धड़ल्ले से काटे जा रहे है। वर्तमान के छः महीने के अंदर जंगल ज्यादा काटे गए।

वन माफियाओं द्वारा फिर अबाड़ी के जंगल में बेशकीमती पेड़ काटा गया। जिसमें पेड़ व पेड़ का ठूठ भी तश्वीर में देखा जा सकता हैं।
अवैध वनों के कटाई से न सिर्फ प्राकृतिक संपदा की छति हो रही है। बल्कि क्षेत्र में गिरते वनों के क्षेत्रफल की वजह से बरसात में भी तेजी से गिरावट आ रही है। कोरोना महामारी के इस दौर में आक्सीजन की कमी से लोगों को दम तोड़ते हुए भी देखा गया है। लेकिन वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी की लापरवाही मिलीभगत में बदलती जा रही हैं। सूत्रों की मानें तो पेड़ों की कटाई होते समय ही सूचना विभाग को मिल जाती है ।

अब सवाल यह है कि जब जिम्मेदार अधिकारी व वनकर्मियों की मिलीभगत से ही जंगल उजड़ रहे है, तो देख रेख करेगा कौन, विभाग को सूखे पेड़ गिरने की सूचना व काटने की व्यवस्था रहती है। लेकिन मौके पर कोई वनकर्मी नहीं पहुंचता। जिसकी वजह से अवैध कटान में लगे लोगों के हौसलें बढ़ गए हैं। समय रहते वनों की कटान पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाले दिनों में जंगल का अस्तित्व खत्म होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
