वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ धाम लोकार्पण के उपलक्ष्य में इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र क्षेत्रीय कार्यालय, वाराणसी, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, उ०प्र० राज्य पुरातत्व विभाग, उ०प्र० संग्रहालय निदेशालय (संस्कृति विभाग) एवं जिला प्रशासन, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय सनातन परम्परा विषय पर चित्र प्रदर्शनी का आयोजन संरक्षित स्मारक गुरूधाम मन्दिर परिसर, वाराणसी में किया गया।

समापन कार्यक्रम के इस क्रम में इन्टैक वाराणसी चैप्टर के अशोक कपूर के सहयोग से 17 से अधिक वाराणसी तथा मिर्जापुर के छठवी से बारहवी कक्षा के लगभग 90 विद्यार्थियों द्वारा चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। उक्त प्रदर्शनी दिनांक 23 दिसम्बर, 2021 से 03 जनवरी 2022 तक प्रातः 10.30 बजे से सांय 5.00 तक आमजन के अवलोकनार्थ खुली रही, जिसका संयोजन प्रो० विजय शंकर शुक्ल, डॉ० सुभाष चन्द्र यादव एवं डॉ० अभिजित दीक्षित ने किया प्रदर्शनी 1 में काशी के साथ-साथ देश के प्रमुख मन्दिरों, मूर्तियों, चित्रकला आदि के लगभग 100 से अधिक प्रदर्शित किये गये।

भारत के सनातन परम्परा, शाक्त परम्परा, मठ परम्परा पर चित्रों के माध्यम से विस्तार से प्रकाशित किया गया था। इस अवसर पर एक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें विशिष्ट अतिथि प्रो० अवधेश प्रधान, पूर्व विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने अपनी विरासतीय परम्परा को भावी पीढ़ी के माध्यम से संरक्षित करने पर बल दिया। इनके संरक्षण हेतु सभी स्मारकों आदि को आमजन के जीवन से जोड़कर उसे व्यावहारिक रूप से प्रस्तुत करने की बात कही गयी।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुये प्रो० विजय शंकर शुक्ल, निदेशक, इन्दिरा गांधी कला केन्द्र, वाराणसी ने भारतीय सनातन परम्परा में सनातन शब्द की अवधारणा को परिभाषित करते हुये कहा कि सनातन का अर्थ है जिसका प्रारम्भ न हो जो अनादि हो तथा अविच्छिन्न रूप में देश काल की परिधि से व्यापक हो। अतिथियों का स्वागत एवं कार्यक्रम का संयोजन डॉ० सुभाष चन्द्र यादव, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्री अशोक कपूर, संयोजन इन्टैक, वाराणसी अध्याय ने किया। इस अवसर पर संजय सिंह, गौतम चटर्जी, डॉ० रजनीकान्त पाण्डेय, डॉ० सुजीत चौबे, मंजरी तिवारी, अदिती गुलाटी, डॉ० ज्योति सिंह, मनोज कुमार, कुमार आनन्द पाल, प्रदीप कुमार आदि बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

