मानस पाठ के पांचवें दिन सीता हरण के प्रसंग का हुआ वाचन

हर्षवर्धन केसरवानी

रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र। जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज नगर के आटीएस क्लब में चल रहे श्री रामचरितमानस नवाह पाठ महायज्ञ के पांचवे दिन मुख्य व्यास आचार्य श्री सूर्य लाल मिश्र द्वारा सीता हरण के प्रसंग का संगीतमय वाचन किया गया।
सुपनखा रावण कै बहिनी।
दुष्ट ह्रदय दारून जस अहिनी।। पंचवटी सो गई सारा। देखी विकल भाई जुगल कुमारा।।

सुपनखा नामक रावण की एक बहन थी जो नागिन के समान भयानक और दुष्ट हृदय की थी वह एक बार पंचवटी में गई और दोनों राजकुमार को देखकर विकल (काम पीड़ित) हो गई। अवसर देखकर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा, लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने इस प्रस्ताव पर अपनी असहमति जताई और उसे छोटे भाई लक्ष्मण के पास भेज दिया। सुपनखा के बार-बार प्रणय निवेदन से लक्ष्मण क्रोध में आकर सुपनखा का नाक काट देते हैं।

सुपनखा जब अपने भाई रावण को नाक काटने की सूचना देती है तो रावण क्रोध में आकर अपने समान बलवान खर- दूषण को भेजता है और इस युद्ध में खर दूषण मारे आते हैं।
तत्पश्चात वह अपने मायावी मामा मारीच को भेजता है और मरीच सोने के हिरण का रूप बनाकर पंचवटी के आसपास विचरण करता है भगवती सीता भगवान श्रीराम को हिरण का चर्म लाने का निवेदन करती हैं।

भगवान श्री राम मायाबी हिरण के पीछे भागते हैं। और तीर चलाते हैं अंत समय में मायावी मारीच राम- राम का नाम लेकर सीता और लक्ष्मण के ह्रदय में संदेह उत्पन्न करता है। भगवती सीता भगवान श्री राम के प्राण रक्षा के लिए कहती हैं
मर्म वचन जब सीता बोला।
हरि प्रेरित लक्ष्मण मन डोला।। बंन दिसी देव सौपिही सब काहू। चले जहां रावण सशि राहु ।।

अनुज लक्ष्मण सीता माता के कटु वचन सुनकर श्री राम के आदेशों का उल्लंघन कर जंगल में उन्हे ढूढने जाते है और दूसरी ओर दशानन रावण साधु वेश पर भिक्षा मांगने के बहाने आता है और तमाम प्रकार के लोभावन बातें करके सीता जी को लक्ष्मण रेखा से बाहर निकलने के लिए प्रेरित करता है जब सीता जी फल लेकर लक्ष्मण रेखा के बाहर जाती हैं तो रावण उन्हें जबरदस्ती पुष्पक विमान में बैठाकर लंका की ओर चल देता है। इसी के साथ पांचवे दिवस का प्रसंग संपन्न हुआ।

इस अवसर पर समिति के महामंत्री शुशील पाठक, यजमान अजय शुक्ला, रतन लाल गर्ग, डॉo जे० एस० चतुर्वेदी, ओम प्रकाश त्रिपाठी, मिठाई लाल सोनी, ठाकुर अग्रहरी, शिशू त्रिपाठी, अजीत सिंह भण्डारी, विकास मितल, नरेंद्र गर्ग, महेश दुबे, विमलेश सिंह, शुशील पाठक (लोढ़ी), विमलेश सिंह पटेल, रविन्द्र पाठक, मन्नु पाण्डेय, शुभम शुक्ला, चंदन चौबे, सुधाकर दुबे, हर्षवर्धन केसरवानी, ऋषभ सिंह, मनीष केडिया, तनु पाण्डेय, सत्यम शुक्ला, सहित आदि लोग उपस्थित रहे। नवाह पाठ महायज्ञ का संचालन संतोष कुमार द्विवेदी ने किया।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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