वाराणसी। रविवार को राजेन्द्र प्रसाद घाट पर श्री काशी विश्वनाथ धाम यात्रा के अंतर्गत संस्कृति विभाग, उ0प्र0 द्वारा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं धर्मार्थ कार्य विभाग, उ0प्र0 के सहयोग से आयोजित भजन संध्या के अठावें दिन पर प्रथम प्रस्तुति अग्निहोत्री बंधु लखनऊ के गायन से आरम्भ हुई। राकेश – देवेश अग्निहोत्री ने गायन का आरम्भ किया गणपति गणेश की आराधना करें , जग के कल्याण की कामना करें। उसके बाद अब तो पलक उठाओ भगवन बेड़ा पार लगाओ भगवन।और भी भजन सुनाते हुए समापन नमामि शमीशं से किया। इनके साथ तबले पर प्रतीक सम्मदर , कीबोर्ड पर विजय सैनी , ढोलक पर प्रखर सिंह, साइड रिदम पर कृष्णमोहन रहे।

दूसरी प्रस्तुति “प्रिय बंधु” पंडित माता प्रसाद मिश्र और पंडित रवि शंकर मिश्र की युगल कथक नृत्य की थी। डिमिग डिमिग डमरू कर बाजे प्रेम मगन नाचे भोला के बाद घोड़े की चाल, रेलगाड़ी की चाल दिखाया। इनके साथ तबला उदय शंकर मिश्र, सारंगी अनीश मिश्र, पखावज चंदन मिश्र , गायन और हारमोनियम पर संतोष मिश्र ने साथ दिया।

तीसरी प्रस्तुति लखबीर सिंह लक्खा की थी। अपने सुप्रसिद्ध भजनों की झड़ी लगा दी।
आरम्भ किया जो भी आया तेरे द्वारे से बाबा विश्वनाथ की नमन किया। उंसके बाद जय शम्भू जय जय शम्भू सुनाया। दर्शकों की मांग पर प्यारा सजा है द्वार भवानी के साथ श्री राम जानकी बैठे है मेरे सीने में। अपना प्रचलित भजन अरे द्वारपालों कन्हइया से कह दो सुनकर सबको झूमने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ० लवकुश द्विवेदी, निदेशक अयोध्या शोध संस्थान एवं डॉ सुभाष चंद्र यादव प्रभारी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा एवं कार्यक्रम में सहयोग अतुल सिंह द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन अंकिता खत्री ने किया।

