वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ धाम यात्रा के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय, जिला प्रशासन वाराणसी के सहयोग से उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित 10 दिवसीय भजन संध्या के सातवें दिन का कार्यक्रम श्रोता को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संगीत एवं मंच कला संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की डॉ० विधि नागर एवं उनके शिष्यों ने कथक नृत्य से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

गंगाष्टकम् से नृत्य का आरम्भ कर, शिव पंचाक्षरी पर नृत्य प्रस्तुत कर प्रभु चरणों की वन्दना की। उसके बाद बनारस की कजरी “बरसन लागी बदरिया” एवं तराना के माध्यम से नृत्य कुशलता की छाप छोड़ी।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में प्रयागराज से आए भजन गायक मनोज गुप्ता ने राम जी मिले ना हनुमान के बिना, अच्युतम केशवम, शिव शंकर को जिसने पूजा जैसे भजन की प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम की अगली प्रस्तुति हेतु मुम्बई से आए अतिथि कलाकार, विख्यात पार्श्व गायक पद्मश्री से सम्मानित सुरेश वाडकर ने मंच सम्भाला।
ओ रे राही तुझे जाना है काशी नगरिया, राम तेरी गंगा मैली हो गई, इतनी शक्ति हमें देना दाता, सुख के सब साथी दुख में ना कोई, ज्योत से ज्योत जलाते चलो, तू प्यार का सागर है मैं हूँ प्रेम रोगी मेरे वैद्य को बुलाओ, तुमसे मिलके ऐसा लगा तुमसे मिलके, लगी आज सावन की ऐसी झड़ी हैपायो जी मैंने राम रतन धन पायो जैसे गीत गाकर उन्होंने श्रोताओं को बीते दौर की ख़ूबसूरत सैर कराई। कार्यक्रम का संयोजन
डॉ० लवकुश द्विवेदी एवं डॉ० सुभाष चन्द्र यादव क्षेत्रीय सांस्कृतिक अधिकारी एवं संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया। देर रात तक ठंडी हवा के बीच श्रोताओं की भीड़ ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।
