वाराणसी। बृहस्पतिवार को राजेन्द्र प्रसाद घाट पर श्री काशी विश्वनाथ धाम यात्रा के अंतर्गत संस्कृति विभाग, उ०प्र० द्वारा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं धर्मार्थ कार्य विभाग, उ०प्र० के सहयोग से आयोजित भजन संध्या के पांचवे दिन पर प्रथम प्रस्तुति प्रो० रेवती साकलकर के गायन से आरम्भ हुआ। इनके साथ तबला पर पं० कुबेर नाथ मिश्र, हारमोनियम पर पंकज मिश्र एवं वायलिन पर संजय मिश्रा ने साथ दिया। भजन गायन का आरम्भ शिव भजन से प्रारम्भ हुआ जिसके बोल थे शिवाकांत शम्भो शशांकार्द्ध मौली…। इसी क्रम में गंगा स्तुति की प्रस्तुति हुई जिसके बोल थे चलो मन गंगा यमुना तीर…। गायन का समापन शिव भजन से हुआ बोल थे ॐ नमः शिवाय…।

भजन संध्या में द्वितीय प्रस्तुति प्रयागराज से पधारे आशुतोष श्रीवास्तव के गायन की हुई। इनके साथ तबला पर बलराम मिश्र, वायलिन पर सुखदेव मिश्र एवं साइड रिदम पर संजय श्रीवास्तव ने साथ दिया। आशुतोष श्रीवास्तव द्वारा भजन गायन का आरम्भ शिव भजन से किया गया जिसके बोल थे सत्यम शिवम सुंदरम तुम्ही हो हे शिव हमारा उद्धार करना..। इसी क्रम में साधो भाई हरि को हरि में देखा, उद्धार करो भगवान तुम्ही शरण पड़े, भजमन राम चरण सुखदायी आदि विभिन्न भजनो की प्रस्तुति हुई। आपने गायन का समापन कृष्ण भजन से किया जिसके बोल थे श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी…।

भजन संध्या की तृतीय एवं अंतिम प्रस्तुति मुम्बई से पधारे अंकित बत्रा के भजन गायन से हुई। इनके द्वारा विभिन्न भजनों गायनो की प्रस्तुति की गई जिसमे प्रमुख रूप से मंगल गावो चौक पुरावो, शंकर संकट हरना, अब तो कृपा कर दीजिए जनम जनम का साथ, मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है, ओ पालन हारे निर्गुण और न्यारे आदि रहे।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ० लवकुश द्विवेदी, निदेशक अयोध्या शोध संस्थान एवं डॉ सुभाष चंद्र यादव प्रभारी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा एवं कार्यक्रम में सहयोग अतुल सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ० ज्योति सिंह ने किया।

