वाराणसी। बुधवार को राजेन्द्र प्रसाद घाट पर श्री काशी विश्वनाथ धाम यात्रा के अंतर्गत संस्कृति विभाग, उ०प्र० द्वारा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं धर्मार्थ कार्य विभाग, उ०प्र० के सहयोग से आयोजित भजन संध्या के चतुर्थ निशा पर प्रथम प्रस्तुति प्रो० शारदा वेलंकर के गायन से आरम्भ हुआ। इनके साथ तबले पर पंकज रॉय, हारमोनियम पर पंकज शर्मा, बांसुरी पर शनिष ज्ञावली एवं गायन में साथ दिया संगीता, ज्योति यादव, नीतू तिवारी ने साथ दिया।

भजन गायन का आरम्भ शिव भजन से हुआ जिसके बोल थे भाल चंद्र जटा गंग…। इसके उपरांत गंगा को समर्पित भजन की प्रस्तुति हुई जिसके बोल थे पतित पावनी गंगे…। इसी क्रम में राम एवं गणेश भजन की प्रस्तुति हुई जिसके बोल थे राम कहो बावरे… एवं प्रथम सुमिर श्री गणेश….। गायन का समापन तुलसीदास जी की रचना से हुआ जिसके बोल थे ऐसो को उदार जग माही..।
इसी क्रम में द्वितीय प्रस्तुति गौरव सौरभ मिश्रा द्वारा कथक नृत्य की हुई। इनके साथ तबले पर अभिषेक मिश्र, सितार पर विशाल मिश्र तथा गायन एवं हारमोनियम पर डॉ० प्रेम किशोर मिश्र रहे। कथक नृत्य का आरम्भ शिव स्तुति से हुआ इसके उपरांत पारम्परिक कथक के साथ घोड़े की चाल एवं रेलगाड़ी की आवाज नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। अंत मे शिव अर्चना डिमिक डिमिक डमरू बाजे प्रेम मगन नाचे भोला पर भावपूर्ण नृत्य की प्रस्तुति हुई।

भजन संध्या में तृतीय एवं अंतिम प्रस्तुति उज्जैन से पधारे शर्मा बंधु के गायन से हुआ। शर्मा बंधु में गोपाल शर्मा, सुखदेव शर्मा, कौशलेंद्र शर्मा, राधवेन्द्र शर्मा रहे।
भजन गायन का आरम्भ शिव स्तुति से प्रारम्भ किया जिसके बोल थे डिमिक डिमिक डमरु बाजे, इसके उपरांत राम भजन की प्रस्तुति हुई जिसके बोल थे इनकी करुणा का हम भी करते है गान…। इसी क्रम में धवल धार वाली बैतीरे गंगा, जीवन सागर धीरे धीरे नइया सदा बढ़ाये जा.. की प्रस्तुति हुई। अंत मे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया… से गायन का समापन किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ० लवकुश द्विवेदी, निदेशक अयोध्या शोध संस्थान एवं डॉ० सुभाष चंद्र यादव प्रभारी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा एवं कार्यक्रम में सहयोग अतुल सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन सफल डॉ० ज्योति सिंह ने किया।

