हम अस्थि से भी वज्र का निर्माण करते हैं : अजय शेखर

• गौरव वाटिका में तिरँगा यात्रा का शानदार स्वागत

• राष्ट्रप्रेम का भाव ही आजादी का अमृत : प्रवेश कुमार

• सोनभद्र का यह क्रांति पथ पूरे देश का गौरव : ओमप्रकाश त्रिपाठी

• सेनानियों के जयघोष से गुंजायमान हो उठा पूरा गांव

• देशभक्ति की कविताओं पर खूब बजी तालियां, एक दर्जन कवियों ने पढ़ीं कविताएं

हर्षवर्धन केसरवानी

सोनभद्र। रविवार को कुल नौ स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के घर पहुंच कर जयघोष के नारे और कवि सम्मेलन ओजस्वी गीतों ने तिरंगा यात्रा को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया , गौरी शंकर मंदिर से जब काफिला निकला तो आठ गांवों की जनता भी साथ जुड़ती गयी। तिरंगा यात्रा का नेतृत्व अमृत महोत्सव समिति के संयोजक भोलानाथ मिश्र और विशाल सभा व कवि सम्मेलन का संयोजन विजय शंकर चतुर्वेदी कर रहे थे। प्रख्यात साहित्यकार अजय शेखर ने अध्यक्षीय दायित्व संभाल रखा था ।
मड़ई, तियरा में स्थापित गौरव वाटिका में सभा को सम्बोधित करते हुए शिक्षाविद ओमप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि यह तिरँगा यात्रा इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि यह क्रांति पथ से गुजरी, ऊँचडीह से करकी तक का यह रास्ता स्वतंत्रता आंदोलन के समय सेनानियों की सक्रियता और इससे जुड़े गांवों में आंदोलन और गिरफ्तारियां इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती हैं।

बृजेश सिंह ने भारतदेश की गौरवशाली परम्पराओं और सांस्कृतिक विविधता पर प्रकाश डाला तो प्रवेश कुमार ने अमृत महोत्सव और राष्ट्रीय भावनाओं पर अपने विचार प्रकट किए ।
सौरभकान्त पति तिवारी ने देवरी खुर्द में उन घटनाओं का जिक्र किया जब 1930 में पँ महादेव चौबे के नेतृत्व में गांव के लोगों ने अंग्रेजों का विरोध करते हुए नमक कानून भंग किया था ।
देवरी कला के दूधनाथ पांडेय का जिक्र करते हुए शशिभूषण पांडेय ने उन स्मृतियों पर प्रकाश डाला जब सेनानी बाल गोविंद पांडेय जी और दूधनाथ जी वर्तमान के शहीद उद्यान से प्रकाशित होने वाले परिवर्तन समाचार पत्र को रातों रात बांट देते थे ।

दीपक कुमार केसरवानी ने 1941 के व्यक्तिगत आंदोलन का जिक्र करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक पं महादेव चौबे के त्याग का उल्लेख किया और कहा कि चौबे जी अपने दोनों पुत्रों प्रभाशंकर और देवेन्द्रनाथ के साथ जेल की कड़ी यातना झेल रहे थे , फिर भी अंग्रेजों का जुल्म कम नहीं हो रहा था, उनका घर भी जमींदोज कर दिया गया, आश्रय के लिए चौबे जी की पत्नी शिवकुमारी जी ने मड़ई का निर्माण किया और फिर उसी मड़ई से क्रांति की महाज्वाला निकली, तभी से इस स्थान को मड़ई के रूप में जाने लगा ।

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अजय शेखर की अध्यक्षता व अशोक तिवारी के संचालन में जगदीश पंथी, प्रद्युम्न त्रिपाठी, ईश्वर विरागी, विकास वर्मा, विजय विनीत, कौशल्या कुमारी चौहान, प्रभात सिंह चंदेल, कमलनयन तिवारी , दयांद दयालु, धर्मेश ने कविताएं पढ़ीं, चाहे मुगल हों या अंग्रेज भारत से लोहा कोई नहीं ले सकता, इसी भाव की कविता ‘ हम अस्थि से भी वज्र का निर्माण करते हैं’ ने उपस्थित जनसमूह को जोश से भर दिया । विशिष्ट अतिथि राहुल श्रीवास्तव द्वारा सभी कवियों को अंगवस्त्रम और अभिनंदन पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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इस अवसर पर उपस्थित सेनानी परिजन कृपाशंकर चतुर्वेदी, रमाशंकर चतुर्वेदी, मोहन बियार और अजीत शुक्ला को सम्मानित किया गया ।
इस तिरंगा यात्रा में पथ से जुड़े गांवों के ग्राम प्रधान अनुपम तिवारी सहित समाजसेवी दिनेश प्रताप सिंह, अजय कुमार शुक्ल, दयाशंकर पांडेय, ओमप्रकाश दूबे, चंद्रकांतदेव पांडेय , अजित सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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