• गीतकार जगदीश पंथी के तीसरी कृति का हुआ विमोचन।
• कृति के बहाने कोरोना पर हुई चर्चा।
• विमोचन समारोह में जुटे साहित्यकार, पत्रकार।
हर्षवर्धन केसरवानी
सोनभद्र। सोनभद्र जनपद की सोंधी माटी की सुगंध से अपने गीतों के माध्यम से देश भर में फैलाने वाले प्रसिद्ध गीतकार जगदीश पंथी की तीसरी कृति कोरोना के कांटे का विमोचन शनिवार को जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज के नगर पालिका परिषद के सभागार में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मधुरिमा साहित्य गोष्टी के निदेशक/ साहित्यकार अजय शेखर ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-“कोरोना के कांटे गीतकार द्वारा लिखी गई आतंक के खिलाफ शंखनाद है। जिसकी गूंज दूर दूर तक जाएगी। इस कृति के रचना गीतकार ने तब किया जब पूरा विश्व कोरोना के संक्रमण से ग्रस्त था, यातायात बंद था, सड़कों पर पुलिस का पहरा था, लोग घरों में दुबके हुए थे और किसी अनहोनी से घटना के घटित होने से भयाक्रांत थे,
ऐसी परिस्थिति में गीतकार द्वारा भोगे गए यथार्थ को लिपिबद्ध कर पाठकों तक अपने हृदय को उद्गार पहुंचाने का प्रयास किया गया जो सराहनीय है।

विमोचन समारोह के मुख्य अतिथि युवा केंद्र के पूर्व निदेशक एवं तीसरी सरकार के संयोजक चंद्रशेखर “प्राण”ने अपना उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि-“हर व्यक्ति कवि होता है, लेकिन जब वह किसी के विपदा को देखता है तो उसी बिंदु से रचना की शुरुआत होती है। कोरोना हमारी सामाजिक, एकता, अखंडता, सामाजिक ढांचे को विध्वंस किया, किसी के लिए यह अवसर बन गया तो किसी ने इसे और अ्वसर बना लिया और हम सेमिनार से बेमिनार तक पहुंचे, यह विपदा भारतीय संस्कृति, सामाजिक व्यवस्थाओं को समझने का अवसर था और लोगों ने अच्छी तरीके से समझा। कृतिकार ने अपने दुख, दर्द, कठिन अनुभव, विपरीत सामाजिक परिस्थितियों को लिपिबद्ध कर कोरोना जैसे महामारी को भी शब्दों में ढालकर इसे आत्ममंथन योग्य बना दिया।

असुविधा पत्रिका के प्रधान संपादक एवं वरिष्ठ कथाकार रामनाथ शिवेंद्र ने अपना विचार साझा करते हुए कहा कि-“प्रकृत की महामारी ही कोरोना महामारी है, दुख दर्द भरे उद्गार को गीतकार जगदीश पंथी ने शब्दों में पिरो कर कृति के रूप में लिपिबद्ध किया और रुनुक झुनुक,टेर रहा बंजारा के बाद इनकी तीसरी कृति कोरोना के कांटे आज पाठकों के हाथों में है, कोरोना ने सभी को अछूत बनाकर मानव से मानव के बीच दूरी पैदा कर दी। इस भयावहता ने गीतकार के हृदय में कुछ कर दिखाने का जज्बा पैदा किया और इसका परिणाम यह कृति है ,जिसके विमोचन समारोह में हम सभी उपस्थित हैं।

वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र नीरव ने कहा कि-“गीतकार ने कोरोना जैसी नीरस, भयानक, महामारी जैसे विषय पर लिखकर समाज को एक संदेश दिया है कि विपत्ति में भी सार्थक कार्य किया जा सकता है। बशर्ते दिल में कुछ करने का जज्बा हो, आज जब पूरी मानवता कराह रही है लोग असमय काल काल्वित हो रहे हो जिसकी कल्पना से ही रोम रोम ,सिहर उठता है लेकिन इस विपरीत परिस्थिति में भी समाज को एक साहित्यिक कृति प्रदान कर गीतकार ने नव संदेश दिया है।
संत कीनाराम स्नातकोत्तर महाविद्यालय कैमूर पीठ के प्राचार्य डॉ गोपाल सिंह ने कोरोना की भयावहता के पर चर्चा करते हुए कहा कि” करोना काल में दुनिया रुक गई थी, मानवता भयभीत हो गई थी, मेडिकल साइंस के पास इस रोग के निदान का कोई इलाज नहीं था लेकिन जहां विज्ञान का अंत होता है वहीं से अध्यात्म की शुरुआत होती है जब हमारा मेडिकल साइंस लोगों के इलाज में को असफल हो गया तब हमारी आयुर्वेदिक पद्धति जागी और आयुर्वेद के ही आधार पर हमारा देश कोरोना संक्रमण काल में सुरक्षित रहा, इस भयानक काल मे कलमकार गीतों में कोरोना के भयानकता को लिपिबद्ध कर रहा था कोरोना के काटे जीवंत दस्तावेज है।

विमोचन समारोह में साहित्यकार पारसनाथ मिश्र, राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार से पुरस्कृत साहित्यकार, बाल संरक्षण समिति के सदस्य ओम प्रकाश त्रिपाठी,नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार जयसवाल मीडिया फोरम ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी, पूर्व विधायक तीरथराज ने अपना- अपना विचार व्यक्त किया।

इस अवसर पर विंध्य संस्कृति संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी,नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष व भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री कृष्ण मुरारी गुप्ता, कवि प्रदुम कुमार त्रिपाठी , सोन साहित्य संगम के निदेशक राकेश शरण मिश्र , दिवाकर द्विवेदी मेघ विजयगढ़ी , कौशल्या कुमारी, धर्मेश कुमार सिंह, रूबी गुप्ता, चंद्रकांत शर्मा , सरोज सिंह विकास वर्मा, राजेन्द्र प्रसाद ,रामचंद्र पाण्डेय, फरीद अहमद सहित साहित्यकार, कलमकार उपस्थित रहे।

मधुरिमा साहित्य गोष्ठी द्वारा आयोजित विमोचन समारोह में स्वागत भाषण और विषय प्रवर्तन कवि जगदीश पंथी, सरस्वती वंदना कवि ईश्वर विरागी, समारोह का संचालन शिक्षक पत्रकार भोलानाथ मिश्र, अतिथियों का आभार मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के उपनिदेशक आशुतोष पांडे (मुन्ना) ने किया।
