छोटी दीपावली पर्व मनाने की तैयारी शुरू

संस्कृति लाइव संवाददाता, रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र): पंचदेव सी दीपावली पर्व के दूसरे दिन छोटी दीपावली यानी नरक चतुर्दशी को मनाने की तैयारी शुरू हो गई है। दिवाली पूजा का शुभ मुहुर्त, पूजा विधि और महत्व –
आज के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 09:02 बजे से अगले दिन सुबह 06:03 बजे तक है।
स्नान या अभयंगा स्नान का समय सुबह 5 बजकर 40 मिनट से 6 बजकर तीन मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इस पवित्र स्नान से मनुष्य की आत्मा की शुद्धि होती है और मौत के बाद नरक की यातनाओं से छुटकारा मिलता है।

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नरक चतुर्दशी के दिन लोग भगवान कृष्ण, काली माता, यम और हनुमान जी की पूजा करते हैं। लोक मान्यता है कि इससे आत्मा की शुद्धि होती है और पूर्व में किए गए पापों का नाश होता है। इसके साथ ही नरक में जाने से भी मुक्ति मिलती है।
कुछ स्थानों पर छोटी दिवाली के अवसर पर नरकासुर का पुतला दहन किया जात है।

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इतिहासकार कुमार केसरवानी के अनुसार-” नरकासुर ने वैदिक देवी अतिथि के सम्राज को हड़प लिया था। उसने बहुत सी महिलाओं को प्रताड़ित भी किया था। नरकासुर के खिलाफ भगवान कृष्ण और सत्यभागा ने संघर्ष किया और युद्ध में मार गिराया। अन्य इलाकों में यह मान्यता है कि नरकासुर का वध काली देवी ने किया था। यही कारण है कि छोटी दिवाली दिन काली मां की पूजा भी जाती है।

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छोटी दीपावली का यह दिन विभिन्न राशियों के जातकों के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण है-

मेष राशि – मन में आशा-निराशा के भाव हो सकते हैं। मानसिक शान्ति‍ के लिए प्रयास करें। नौकरी में अफसरों से व्यर्थ के वाद-विवाद से बचें। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परन्तु बातचीत में संयत रहें। वाहन सुख में वृद्धि हो सकती है। घर-पर‍िवार में धार्मि‍क कार्यक्रम हो सकते हैं।

वृष राशि – आत्मविश्वास में कमी रहेगी। धर्म के प्रति श्रद्धाभाव बढ़ सकता है। सन्तान के स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। चिकित्सीय खर्च बढ़ सकते हैं। किसी मित्र का आगमन हो सकता है। वस्‍त्र उपहार में प्राप्‍त हो सकते हैं। भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा। स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति सचेत रहें।

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मिथुन राशि – मन परेशान भी हो सकता है। आत्मसंयत रहें। नौकरी में परिवर्तन के अवसर मिल सकते हैं। क्रोध के अतिरेक से बचें। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। किसी दूसरे स्थान पर भी जाना हो सकता है। व्‍यापार में तरक्‍की के योग बन रहे हैं। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा।

कर्क राशि- कार्यों के प्रति जोश एवं उत्साह रहेगा। माता के स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। रहन-सहन अव्यवस्थित रहेगा। वाहन सुख में कमी आ सकती है। संतान की ओर से सुखद समाचार मिल सकता है। बातचीत में संतुलित रहें। मित्रों का सहयोग मिलेगा। स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति सचेत रहें।

सिंह राशि- मन में निराशा एवं असन्तोष रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। परिश्रम अधिक रहेगा। लाभ के अवसर भी मिलेंगे। मित्रों का सहयोग मिलेगा। पठन-पाठन में रुचि तो रहेगी, परन्तु शैक्षिक कार्यों में व्यवधान भी आ सकते हैं। सन्तान को स्वास्थ्‍य विकार हो सकते हैं।

कन्या राशि- मन में प्रसन्नता के भाव रहेंगे। बातचीत में सन्तुलित रहें। बौद्धिक कार्यों से धनार्जन के साधन बन सकते हैं। दिनचर्या अव्‍यवस्‍थित हो सकती है। माता को स्‍वास्‍थ्‍य विकार रहेंगे। कार्यक्षेत्र में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। भाइयों से व‍िवाद हो सकता है।

तुला राशि- मन परेशान हो सकता है। आत्मसंयत रहें। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान की यात्रा पर जा सकते हैं। मित्रों का सहयोग मिलेगा। कला एवं संगीत के प्रति रुझान बढ़ेगा। वाणी में सौम्यता रहेगी,परन्तु स्वभाव में चिड़चिड़ापन भी रहेगा। खर्चों की अधिकता रहेगी।

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वृश्चिक राशि- स्वास्थ्‍य के प्रति सचेत रहें। परिवार की समस्याओं पर ध्यान दें। आय में कमी एवं खर्च अधिक की स्थिति रहेगी। भाइयों से वैचारिक मतभेद रहेंगे। नौकरी में परिवर्तन के योग बन रहे हैं। किसी दूसरे स्‍थान पर जा सकते हैं। संतान के स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर च‍िंति‍त रहेंगे।

धनु राशि – आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन परेशान रहेगा। मानसिक शान्ति‍ के लिए प्रयास करें। किसी मित्र के सहयोग से आय में वृद्धि हो सकती है। परिवार की समस्याओं के निस्तारण में पिता का साथ मिल सकता है। खर्चों की अधि‍कता से मन परेशान हो सकता है। व‍िवाद हो सकते हैं।

मकर राशि – मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। भवन सुख में वृद्धि हो सकती है। आशा-निराशा के मिश्रित भाव मन में रहेंगे। कार्यक्षेत्र में प्रतिकूल परिस्‍थितियों का सामना करना पड़ सकता है। उच्‍चााधि‍कार‍ियों से व‍िवाद की स्‍थ‍ित‍ि बन सकती है।

कुंभ राशि- कला या संगीत में रुचि बढ़ सकती है। घर-परिवार में धार्मिक-मांगलिक कार्य हो सकते हैं। वस्त्र उपहार में मिल सकते हैं। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। किसी मित्र के सहयोग से रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। आय में वृद्धि‍ होगी।

मीन राशि- मानसिक शान्ति‍ रहेगी। बातचीत में सन्तुलन बनाकर रखें। परिवार की समस्याओं पर ध्यान दें। स्वास्थ्‍य को लेकर परेशानी हो सकती हैं। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। परिवार में धार्म‍िक कार्यक्रम हो सकते हैं। मित्रों का सहयोग मिलेगा। क‍िसी प्रॉपर्टी से आय के स्रोत बनेंगे।
आज के दिन शुभ मुहूर्त में दीपदान यमराज के लिए किया जाता है।
मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियाँ जल में डालकर स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है। विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो स्वर्ग को प्राप्त करते हैं

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लोकमान्यताएं हैं-“एक कथा के अनुसार आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था।
कथा के अनुसार-‘रन्ति देव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था लेकिन जब मृत्यु का समय आया तो उनके सामने यमदूत आ खड़े हुए। यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हुए और बोले मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो क्योंकि आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नर्क जाना होगा। आप मुझ पर कृपा करें और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है। पुण्यात्मा राजा की अनुनय भरी वाणी सुनकर यमदूत ने कहा हे राजन् एक बार आपके द्वार से एक भूखा ब्राह्मण लौट गया यह उसी पापकर्म का फल है।
दूतों की इस प्रकार कहने पर राजा ने यमदूतों से कहा कि मैं आपसे विनती करता हूं कि मुझे वर्ष का और समय दे दे। यमदूतों ने राजा को एक वर्ष की मोहलत दे दी। राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषियों के पास पहुंचा और उन्हें सब वृतान्त कहकर उनसे पूछा कि कृपया इस पाप से मुक्ति का क्या उपाय है। ऋषि बोले हे राजन् आप कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्रह्मणों को भोजन करवा कर उनसे अनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें।

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राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया। इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और उन्हें विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ। उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति हेतु भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित है।
इस त्योहार को मनाने का मुख्य उद्देश्य घर में उजाला और घर के हर कोने को प्रकाशित करना है। पदमा देवी के अनुसार-” दीपावली के दिन भगवान श्री राम चन्द्र जी चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या आये थे तब अयोध्या वासियों ने अपनी खुशी के दिए जलाकर उत्सव मनाया व भगवान श्री रामचन्द्र माता जानकी व लक्ष्मण का स्वागत किया था।
छोटी दीपावली के अवसर पर नरकासुर का वध करने वाली मां काली एवं भगवान श्री राम के सेवक हनुमान जी के मंदिरों पर भक्तजनों ने पूजा- अर्चना किया। इन मंदिरों पर भक्तजनों की काफी भीड़ जुटी हुई थी।

प्रकाश उत्सव के इस पर्व पर जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज सहित जनपद के अन्य कस्बों, एवं ग्रामीण इलाकों में दीपावली पर्व को लेकर लोगों में उत्साह है और लोग इस पर्व को मनाने के लिए मिष्ठान, घर को प्रकाशित करने के लिए मिट्टी के दीए, बिजली के झालर, पूजा-पाठ की सामग्री, एवं खाद्य पदार्थ लाई,चूड़ा, रेवड़ी एवं इस पर्व पर खाई जाने वाली सब्जी के लिए सूरन आदि की खरीदारी कर रहे हैं।

सामानों की बिक्री के लिए जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज के रामलीला मैदान एवं नगर के अन्य क्षेत्रों में दुकाने सजी हुई हैं और यहां पर खरीदारों की काफी भीड़ देखी जा रही है, जिला प्रशासन द्वारा शांति व्यवस्था एवं पर्व को सकुशल मनाए जाने के लिए पूर्ण तैयारी की गई है उप जिला अधिकारी रॉबर्ट्सगंज एवं पुलिस जवान चक्रमण में कर रहे हैं।
खरीदारों की भीड़ की वजह से लोगों को जाम का भी सामना करना पड़ रहा है। जाम के झाम में भी फंसे लोग दिवाली की तैयारी बड़ी हंसी खुशी कर रहे हैं।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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