हम कर्मयोगी बनेंगे तो आत्मनिर्भर बनेंगे

• सत्यनिष्ठा से आत्मनिर्भरता चुनौतियां एवं समाधान विषयक हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी

संस्कृति लाइव संवाददाता, वाराणसी। केंद्रीय सतर्कता आयोग, भारत सरकार के मुहिम के तहत एनटीपीसी उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय द्वारा सोमवार को रथयात्रा स्थित नंदन भवन में सत्य निष्ठा से आत्मनिर्भरता चुनौतियां एवं समाधान विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। धार्मिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक राजधानी काशी में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में पधारे हुए विभिन्न वक्ताओं एवं अतिथियों का स्वागत एनटीपीसी उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय की ओर से सहायक प्रबंधक मानव संसाधन मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ने अंगवस्त्रम से किया तथा स्वागत उद्बोधन के दौरान कहा कि हमारे छोटे से मंदिर में बड़े-बड़े देवता पधारे हुए हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के महानिदेशक संजय द्विवेदी ने सत्य निष्ठा और आत्मनिर्भरता पर प्रकाश डालते हुए गांधी जी के दर्शन का जिक्र करते हुए बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने कहा था कि मेरा जीवन ही संदेश है। उन्होंने गीता के कर्म योग पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जब हम कर्म योगी बनेंगे तो आत्मनिर्भर बनेंगे।

राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के सहायक निदेशक तेज स्वरूप त्रिवेदी ने कहा कि सत्य बताने की नहीं अपितु बरतने की जरूरत है। बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा चेन्नई के पूर्व कुलपति डॉ. राम मोहन पाठक ने कहा कि-” समर्पण एवं पारदर्शिता सत्य निष्ठा के महत्वपूर्ण आयाम हैं। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व निदेशक प्रोफेसर श्रद्धानंद ने कहा कि-” सत्य निष्ठा एवं आत्मनिर्भरता एक दूसरे के पर्याय हैं हमें गांधी जी के विचारों को आत्मसात करना चाहिए। आर्य महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ रचना दूबे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-” प्राचीन शिक्षा पद्धति में नैतिकता एवं सत्य निष्ठा पर विशेष जोर दिया जाता था। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय गया से पधारे असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. किंशुक पाठक ने कहा कि-” समर्थ एवं आत्मनिर्भर भारत के लिए सत्य निष्ठा आवश्यक है। राजकीय बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज चोलापुर की प्रधानाचार्या डॉ. निशा यादव ने कहा कि-” हमें बच्चों में नैतिक शिक्षा घर से ही देना चाहिए।
वाराणसी के विधिक सलाहकार प्रदीप कुमार उपाध्याय ने कहा कि-” सबसे पहले हमें सत्य को अपने आचरण में उतारना चाहिए। राष्ट्रीय संगोष्ठी का संचालन कर रहे नागरिक पीजी कॉलेज जौनपुर से पधारे मनोविज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आनंद श्रीवास्तव ने भी अपने विचार अभिव्यक्ति के दौरान नैतिकता एवं सत्य निष्ठा की शिक्षा को बच्चों के साथ -साथ सभी के लिए आवश्यक बतलाया।
उक्त संगोष्ठी में दिल्ली से पधारे विधिवेत्ता देव स्वरूप त्रिवेदी, चिंतक एवं समाजसेवी आशुतोष आशुतोष धर दुबे, समाजसेवी रुपेश नागवंशी, क्रिएटिव मीडिया के निदेशक भरत गुप्ता एवं डॉ अर्चना सिंह, माही सिंह राजपूत, दिलीप श्रीवास्तव, दिनेश कुमार, अतुल जायसवाल आदि उपस्थित रहे।
सहायक प्रबंधक मानव संसाधन मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव के धन्यवाद ज्ञापन के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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