मनाई गई घनवन्तरी जयंती

हर्षवर्धन केसरवानी

रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र): श्री वैधनाथ आयुर्वेद भवन एंव कानोडिया औषघालय के संयुक्त तत्वाघान मे धनतेरस के दिन श्री घनवन्तरी जयन्ती मनायी गयी। आचार्य कृपा शंकर पाण्डे द्वारा विधिवत पूजन प्रतिष्ठIन के आधिष्ठाता विजय कानोडिया द्वारा कराया गया

। कम्पनी के प्रतिनिधि रितेश जायसवाल ने आये हुए सभी अतिथियो का स्वागत किया और बताया कि श्री वैधनाथ आयुवेद भवन विश्व की सबसे प्राचीन आयुर्वेद कम्पनी है और इसमे गुणवत्ता युक्त दवाओ का निमाण होता है | धन्वन्तरि जयन्ती आज धनतेरस का दिन है।

पूरे देश-विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के लोग आज धन अर्जित करने का दिन मानते हैं और खरीददारी करते हैं। कहीं बर्तन खरीदे जाते हैं तो कहीं कपड़े, कोई चांदी के सिक्के खरीदता है तो कुछ लोग सोने के आभूषण को सही धन मानकर उसको घर लाते हैं। समाज भौतिकवादी होता जा रहा है और धन की परिभाषा में उसे भौतिक चीजें दिखाई देने लगी हैं।

धनतेरस दो शब्दों से बना है धन्वन्तरि तेहरवा दिन तेरस यानी त्रयोदशी पर पड़ने वाले भगवान धन्वन्तरि की जयन्ती जिसे सरल भाषा में धन तेरस कहते हैं।
पुराणों में लिखा है कि जब मंत्राचल पहाड और वासु की सांप की मदद से देवों और असुरों ने समुद्र मन्थन किया, तो भगवान धन्वन्तरि अपने हाथ में अमृत क्लथ लेकर प्रकट हुए। इसीलिए इस दिन को भगवान धन्वन्तरि का जन्मदिवस मानकर धन्वन्तरि जयन्ती के रूप में मनाया जाता है।

असल धन स्वस्थ काया है, जो आयुर्वेद के दाता भगवान धन्वन्तरि आपको देते हैं। उन्होंने मानव जाति को स्वस्थ, खुशहाल जीवन जीने के लिए ही आयुर्वेद का जन्म किया।
आज के दिन पूरा वैद्य समुदाय भगवान धन्वन्तरि को याद करता है और उनकी अर्चना कर उनके बताये रास्ते पर चलते हैं। यहीं नहीं भारत के अधिकांश घरों में आज के दिन स्वस्थ रहने के लिए कोई न कोई उत्पाद खरीद कर घर लाया जाता है।

विष्णु भगवान के इस अवतार को जिनके एक हाथ में अमृत, दूसरे हाथ में जड़ी-बूटी, तीसरे हाथ में शंख और चौथे हाथ में आयुर्वेद ग्रन्थ को नमन करते हुए आज का दिन व्यतीत करें।
विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/वरिष्ठ साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-धनतेरस आदिकाल से धनतेरस धन्वंतरी जयंती के रूप में मनाया जाता रहा है समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरी कलश में अमृत लेकर प्रकट हुए थे और यह देवताओं के वैद्य थे।

धन्वंतरी जयंती (धनतेरस) आदिकाल से अमृत महोत्सव के रूप में मनाया जाता रहा है।आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों में मानव जीवन के रक्षण का मंत्र छिपा हुआ है और आदि काल से लेकर आज तक यह चिकित्सा पद्धति भारतीयों के इलाज का मुख्य साधन रहा है, वर्तमान समय में यह पूरे विश्व में प्रचलित है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद ज्ञापित

उन्होंने आगे कहा कि-” भारत की प्राचीन आयुर्वेद पद्धति को संरक्षण, संवर्धन, विकास के लिए भारत सरकार द्वारा धनवंतरी जयंती को पूर्व मे आयुर्वेद दिवस के रूप में घोषित किया जा चुका हैऔर पूरा देश धन्वंतरी जयंती को आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाता आ रहा है।
डाo के के सिंह ने आवला के आयुर्वेदिक महत्व पर विधिवत प्रकाश डालते कहा कि- “नियमित अगर दो आवले का सेवन किया जाय तो तमाम रोगों से बचा जा सकता है।

इस अवसर पर वैद्यनाथ कंपनी के प्रतिनिधि रितेश जयसवाल आ गए संस्कृति लाइव चैनल के जिला संवाददाता हर्षवर्धन केसरवानी को सम्मानित किया।कनोडिया औषधालय के अधिष्ठाता विजय कनोडिया संचालक पंकज कनोडिया ने उपस्थित अतिथियो को उपहार प्रदान किया और उन्हे दीपावली की बधाई दिया।

कार्यक्रम मे मुख्य रुप से इन्द्र कुमार दूबे, गोपाल दत तिषाठी, वैघ सत्य नारायण मिश्रा, सुयश कानोडिया, विनोद झुननुझन वाला, नरेन्द्र झुनझन वाला, मनोज अग्रवाल, संजय जैन, गो२व जैन, अनिल सिंह, संस्कार, रविन्द्र सिंह, बालेश्वर सिंह आदि लोग उपस्थित थे॥

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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