• चोपन एसओ समेत सात पुलिस कर्मियों पर था आरोप
राजेश पाठक
सोनभद्र। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट खलीकुज्ज्मा की अदालत ने सोमवार को दलित महिला के जरिए दाखिल धारा 156(3) सीआरपीसी के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। साथ ही पत्रावली को दाखिल दफ्तर करने का आदेश दिया है। यह आदेश राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के जैत गांव की दलित महिला उर्मिला देवी पत्नी अवधेश कुमार के प्रार्थना पत्र पर दिया है।

दलित महिला ने दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया था कि 15 अगस्त 2021 को सुबह 10 बजे तीन गाड़ियों पर सवार होकर पुलिस वाले उसके घर पर आ धमके। आते ही जाति सूचक शब्दों से गाली देकर अपमानित किया एवं बेटा गोपी को गाड़ी पर बैठाकर अपने साथ ले गए।

जहां पर उसे 18 अगस्त तक अपनी कस्टडी में लिए रहे। इतना ही नहीं बेटा गोपी का धारा 107/116 व 151 सीआरपीसी के तहत चालान करने के लिए मेडिकल मुआयना कराया गया था कहीं भी चोट के निशान नहीं थे। लेकिन उसे बोलेरो में बैठाकर थाने ले गए और बेरहमी से पिटाई की। जिससे बेटे के बदन पर गंभीर चोटें आईं थी। बेटे को 20 अगस्त को छोड़ दिया।

जिसे जिला अस्पताल ले जाकर मेडिकल मुआयना कराया और एसपी सोनभद्र को शिकायती पत्र दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पिटाई करने वालों में चोपन एसओ नवीन तिवारी, सर्विलांस प्रभारी सरोजमा सिंह,क्राइम ब्रांच प्रभारी अमित त्रिपाठी, क्राइम ब्रांच सिपाहियों अमर सिंह, हरिकेश यादव, जगदीश मौर्य व चोपन एसओ के चालक राम आसरे यादव के विरुद्ध आरोप लगाया गया था।

मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने थाने से भेजी गई आख्या का अवलोकन किया जिसमें सुरेंद्र पांडेय हत्याकांड के मामले में आरोपियों तथा मृतक की मोबाइल दलित महिला के बेटे गोपी के पास से बरामद हुआ था। जिसके बारे में पुलिस द्वारा जांच करने के लिए पूछताछ करने के लिए बुलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।

वहीं दलित महिला ने अपने बेटे के पास से हुई मोबाइल बरामदगी के बारे में तथ्य को छुपाया है। लिहाजा एससी/एसटी एक्ट का कोई अपराध नहीं बनता है। पत्रावली को खारिज करते हुए पत्रावली को दाखिल दफ्तर करने का आदेश दिया है।


