रविन्द्र पनिका को न्यायालय से दोषमुक्त कराया गया-शेष नारायण दीक्षित एडo



विवेक कुमार पाण्डेय

रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र। सेसन टायल/400063 / 2010 राज्य बनाम रविन्द्र पनिका न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या 04, जनपद सोनभद्र। उपस्थित अशोक कुमार- XI (एच०जे०एस०). (J-O- Code-U.P. 6128) सत्र परीक्षण संख्या – 63 / 2010, बनाम उत्तर प्रदेश राज्य अभियोगी। रविन्द्र पनिका उर्फ बुल्लू पनिका पुत्र भिक्खी पनिका निवासी सलखन, टोला बैरिहवा, थाना चोपन जिला सोनभद्र अभियुक्त। मुकदमा अपराध संख्या-582/ 2009, धारा 363, 366 भारतीय दण्ड संहिता। थाना-चोपन, जिला सोनभद्र।

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निर्णय प्रस्तुत सत्र परीक्षण से सम्बन्धित अपराध में थाना चोपन जिला सोनभद्र की पुलिस ने अभियुक्त रविन्द्र पनिका उर्फ बुल्लू पनिका के विरुद्ध मुकदमा अपराध संख्या-582/2009, अन्तर्गत धारा 363, 366 भारतीय दण्ड संहिता में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। तत्कालीन विद्वान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सोनभद्र ने दिनांक 17.08.2009 को अपराध का प्रसंज्ञान लिया। मामला सत्र परीक्षणीय होने के कारण तत्कालीन विद्वान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सोनभद्र ने दिनांक 27.03.2010 को मामले को सत्र न्यायालय में सुपुर्द किया जहाँ से अन्तरित होकर विचारण हेतु इस न्यायालय में प्राप्त हुआ है। अभियोजन कथानक संक्षेप में यह है कि: वादिनी मुकदमा भगवन्ती देवी पत्नी स्व० राम बरन गौड़ निवासी बैरिहवा सलखन, थाना चोपन जिला सोनभद्र ने दिनांक

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10:07.2009 को थाना चोपन जिला सोनभद्र में इस कथन के साथ लिखित तहरीर दिया कि: दिनांक 06.07.2009 की रात लगभग 09:00 बजे हमारे ही गाँव के रविन्द्र कुमार पुत्र भिक्खी पनिका दो-तीन आदमियों के साथ मेरे घर आया। प्रार्थिनी घर पर सोयी थी और प्रार्थिनी की लड़की पीड़िता xx उम्र 14 वर्ष जग रही थी, उसको बहला फुसला कर लेकर भाग गये। जब प्रार्थिनी की नीद खुली तो लड़की घर में नहीं थी। प्रार्थिनी अपना रू0 5,000/- (पाँच हजार रूपये) रखी थी वह भी गायब है। प्रार्थिनी अगल-बगल गाँव, रिस्तेदार के यहाँ सभी जगह पता किया किन्तु उन दोनों का पता नहीं चला।

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प्रार्थिनी को पूरा यकीन है कि कमलेश सोनार, भीम सिंह जो प्लाजा पेट्रोल पम्प पर रहते हैं व सीता पनकीन लालगंज निवासी का प्रार्थिनी की लड़की को भगाने में पूरा सहयोग है। वादिनी मुकदमा की लिखित तहरीर के आधार पर थाना चोपन जिला सोनभद्र में दिनांक 10.07.2009 को समय 20:30 बजे मुकदमा अपराध संख्या-582/ 2009 अन्तर्गत धारा 363, 366 भारतीय दण्ड संहिता एवं धारा-3 ( 2 )v एस०सी०/ एस०टी० एक्ट के तहत अभियुक्तगण रविन्द्र कुमार, कमलेश सोनार, भीम सिंह एवं सीता पनिका के विरूद्ध चिक किता की गयी।

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जिसकी प्रविष्टि थाना चोपन जिला सोनभद्र की पुलिस द्वारा दिनांक 10.07.2009 के जी०डी० संख्या-44 में समय 20:30 बजे की गयी है। झूठी रिपोर्ट लिखायी है। जैसा कि विवेचक साक्षी पी0डब्लू0-6 ने भी अपने प्रतिपरीक्षा में यह स्वीकार किया है कि पीड़िता / अपहृता दीपक कुमारी ने उसे बताया था कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से घर की मर्जी के खिलाफ रविन्द्र कुमार पनिका से शादी की है।

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लाला उर्फ सम्राट उर्फ यादवेन्द्र बनाम उत्तर प्रदेश राज्य 2017 (1) जु०कि०के० पेज-675 के अपने सम्मानित निर्णय में माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद ने कहा है कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 363 के अन्तर्गत बने आरोप को सिद्ध करने के लिये पीड़िता की उम्र का निर्धारण आवश्यक होता है। पीड़िता का चरित्र प्रेम व इच्छाये महत्वपूर्ण नहीं होता है। केवल उसे वैध संरक्षण से ले जाना ही पर्याप्त होता है। अख्तर बनाम स्टेट आफ उत्तरांचल 2009 (67) ए०सी०सी० पेज-375 के अपने सम्मानित निर्णय में माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह कहा है कि स्थिति, यौनिक अंगों का आयु के अनुसार विकसित होना एवं पीड़िता की हड्डी की स्थिति इत्यादि।

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जयमाला बनाम गृह सचिव जम्मू और कश्मीर एवं अन्य ए०आई०आर० 1982 एस०सी० पेज-1297 के अपने सम्मानित निर्णय में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा कहा गया है कि रेडियोलाजिस्ट परीक्षण में बताये गये पीड़िता की आयु में दो वर्ष अधिक या दो वर्ष कम माना जा सकता है।
अभियुक्त रविन्द्र पनिका उर्फ बुल्लू पनिका के विरूद्ध धारा 363, 366 भारतीय दण्ड संहिता के तहत दण्डनीय अपराध के सम्बन्ध में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। जो पत्रावली में संलग्न कागज संख्या 3-अ / 1 है। जो मेरे लेख व हस्ताक्षर में है जिसकी शिनाख्त करता हूँ।

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साक्षी ने आरोप पत्र को प्रदर्श क-6 के रूप में साबित किया है। साक्षी ने यह भी कहा है कि दिनांक 18.07.2009 को उप निरीक्षक शिवमणी तिवारी द्वारा अपहृता की बरामदगी गयी थी। उप निरीक्षक शिवमणी तिवारी मेरे अधीनस्थ कार्यरत रहे हैं। उन्हें कार्य सरकार के दौरान लिखते पढ़ते देखा है। पत्रावली में संलग्न फर्द बरामदगी अपहृता कागज संख्या 3-अ / 9 शिवमणी तिवारी के हस्तलेख में है जिसकी शिनाख्त करता हूँ। साक्षी ने फर्द बरामदगी को प्रदर्श क-7 के रूप में साबित किया है। साक्षी पी0डब्लू0-6 के साक्ष्य विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि यह साक्षी मामले का विवेचक है। इस साक्षी ने नक्शा नजरी घटना स्थल को प्रदर्श क-5 एवं आरोप पत्र को प्रदर्श क–6 तथा फर्द बरामदगी अपहृता को प्रदर्श क-7 के रूप में साबित किया है।

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जैसा कि स्वयं पीड़िता / अपहृता दीपक कुमारी ने अपने बयान में यह स्वीकार किया है कि वह स्वेच्छा से अभियुक्त रविन्द्र पनिका के साथ गयी थी। क्योंकि वह उससे प्यार करती थी और उसने उससे शादी कर लिया है। स्पष्ट है कि जब अपहृता बरामद हुई थी तब अपहृता / पीड़िता दीपक कुमारी और अभियुक्त रविन्द्र पनिका बतौर पति-पत्नी रह रहे थे और गिरफ्तारी के समय अपहृता बालिग थी। ऐसी स्थिति में यह नहीं कहा जा सकता कि अभियुक्त रविन्द्र पनिका ने पीड़िता /अपहृता दीपक कुमारी का अपहरण /व्यपहरण उसके विधिपूर्ण संरक्षक की संरक्षकता में से उनकी सम्मति के बिना किया था क्योंकि उस समय अपहृता /पीड़िता दीपक कुमारी की उम्र 18 वर्ष थी। यह भी स्पष्ट है कि अभियुक्त द्वारा अपहृता /पीड़िता का अपहरण /व्यपहरण उसको विवाह एवं अनैतिक सम्भोग करने के लिये दबाव बनाने हेतु नहीं किया गया था।

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जैसा कि पीड़िता /अपहृता ने अपने बयान अन्तर्गत धारा 164 दण्ड प्रक्रिया संहिता एवं न्यायालय के समक्ष दिये गये बयान में यह स्वीकार किया है कि वह अपनी मर्जी से अभियुक्त रविन्द्र पनिका के साथ गयी थी क्योंकि वह अभियुक्त रविन्द्र पनिका से प्यार करती थी।
अभियोजन पक्ष अपने तथ्य एवं औपचारिक साक्षियों के साक्ष्य से अभियुक्त रविन्द्र पनिका के विरुद्ध लगाये गये आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। अतः अभियुक्त रविन्द्र पनिका उर्फ बुल्लू पनिका को उसके विरूद्ध लगाये गये आरोपों से संदेह का लाभ देते हुये दोषमुक्त किया जाना न्यायोचित होगा।

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आदेश अभियुक्त रविन्द्र पनिका उर्फ बुल्लू पनिका को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 363, 366 के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध के आरोपों से दोषमुक्त किया जाता है। अभियुक्त रविन्द्र पनिका उर्फ बुल्लू पनिका न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार, सोनभद्र में निरूद्ध है। अभियुक्त का रिहाई परवाना अविलम्ब जिला कारागार, सोनभद्र भेजा जाय। अभियुक्त रविन्द्र पनिका उर्फ बुल्लू पनिका यदि किसी अन्य मामले में वांछित न हो तो उसे अविलम्ब रिहा किया जाय। दिनांक- 30.10.2021 (अशोक कुमार – XI) अपर सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-04, सोनभद्र। निर्णय आज मेरे द्वारा खुले न्यायालय में हस्ताक्षरित दिनांकित करके सुनाया गया। दिनांक 30.10.2021 (अशोक कुमार – XI) अपर सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या- 04, सोनभद्र।
वाद की पैरवी श्री शेष नारायण दीक्षित उर्फ बबलू दीक्षित एवं सत्यदेव पाण्डेय एडवोकेट महामंत्री सोनभद्र बार एसोसिएशन द्वारा किया गया जिसमें पूर्ण सफलता प्राप्त हुई।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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