लखनऊ: लखनऊ कोरोना काल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वालीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां अब स्मार्टफोन से लैस हो गई हैं। मंगलवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 लाख 23 हजार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को स्मार्टफोन वितरित किया है। इसके साथ ही, नवजात बच्चों की वृद्धि का स्तर मापने के लिए प्रदेश के हर आंगनबाड़ी केंद्र को नवजात वृद्धि निगरानी यंत्र (इंफेंटोमीटर) भी प्रदान किया है।
‘चार साल पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को देखकर खाते थे भय’
इस कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने कहा कि पिछले साढ़े चार साल में एक लंबी दूरी तय किया है। हर एक विभाग ने कुछ नया किया है। आज से 4 साल पहले क्या स्थिति थी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को देखकर हम भय खाते थे। आज परिवर्तन हुआ है।
सीएम योगी ने आगे कहा कि मैं हमेशा कहता था, हम तकनीकी के माध्यम से शासन की योजनाओं को हर नागरिक तक पहुंचाने का कार्य करेंगे, तकनीकी के लिए आवश्यक संसाधन उन लोगों को पहुंचाने का कार्य करें जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का कार्य करते हैं।
‘सुशासन को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है’
आज का कार्यक्रम महत्वपूर्ण है, यह स्मार्टफोन वितरण या डिवाइस वितरण का कार्यक्रम ही नहीं है, बल्कि ये सुशासन को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का है। 4 साल पहले हम भय खाते थे कि आंगनबाड़ी बहने न जाने कब धरना प्रदर्शन पर बैठ जाएं। जबकि अब धारणाएं बदली हैं,आपत्ति आने पर यही बहनें आगे आई थीं।
‘कठघरे में खड़ा करने की गई कोशिश’
उन्होंने आगे कहा कि कोई भी व्यक्ति कितना भी बुद्धिमान हो, जबतक उसका काम लोककल्याण के लिए न आए तब तक कोई अस्तित्व नहीं है। एक समय यूपी को फोकस करके मीडिया ट्रायल शुरू हो गया था, जबकि कोरोना अन्य राज्यों में भी था। लेकिन, हम पर हर ओर से हमले करके और कठघरे में खड़ा करने की कोशिश हुई। तब हमने तय किया कि निगरानी समिति का गठन किया जाए। हमने दूसरी लहर में अप्रैल के महीने में निगरानी समिति का गठन कर दिया था।
इसमें सभी विभागों ग्रामीण विकास,पंचायती राज आदि के लोग थे। 10 से 12 लोगों की ये टीम यही आंगनबाड़ी की बहनें लोगों के बीच जाकर पड़ताल, जांच करने जाती थी, फिर ये रिपोर्ट शाम तक मेरे पास आती थी। देखते ही देखते ये कोरोना जो एक महामारी था। उस पर नियंत्रण हुआ और यूपी देश के लिए मॉडल बना।
मैं पहले से आंगनबाड़ी कर्मचारियों की ताकत को जानता था: सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं पहले से जानता था, इनकी ताकत क्या होती है. एएनएम, आंगनबाड़ी बहनों की ताकत मैं समझता था,लेकिन पता नहीं ये समझती थीं या नहीं. 1977 से पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफ्लाइटिस का कहर था,1977 से 1997 तक इसकी सूचना सरकारों तक नही पहुंची थी,किंतनी सरकारें आई लेकिन उन तक इसकी जानकारी गोरखपुर से लखनऊ नहीं पहुच सकी। 1998 में मैं सांसद बना। मैंने अस्पताल जाकर देखा,डॉक्टरों से पूछा उनका कहना था कि ये 20 वर्षों से है,कोई दवा नहीं है।
