• सोन साहित्य संगम ने जनवादी कवि ‘दिनकर’ की मनाई जयंती।
• कार्यक्रम में कवियों ने एक से बढ़कर एक सुनाई रचनाएं।
मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी
सोनभद्र। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की जयंती पर सोनांचल की सुपरिचित साहित्यिक संस्था ‘सोन साहित्य संगम’ से जुड़े कवियों ने उनकी कालजई रचनाओं को देश, काल और समाज के लिए उपयोगी बताते हुए उनकी रचनाओं के साथ ही उन्हें याद किया। संस्था के संरक्षक एवं किशोर न्याय बोर्ड के सम्मानित सदस्य पंडित ओम प्रकाश त्रिपाठी की अध्यक्षता एवं संस्था के उपनिदेशक सुशील कुमार ‘राही’ के मुख्य आतिथ्य में आयोजित जयंती समारोह में विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक /वरिष्ठ साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी ने प्रख्यात जनवादी कवि रामधारी सिंह दिनकर के साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि-दिनकर जी की साहित्यिक रचनाएं देशभक्ति पूर्ण हुआ करती थी, उनकी कविता-

कलम आज उनकी जय बोल, जला अस्थियां बारी बारी।
जिसने छिटकाई चिंगारी,
चढ गए पुण्य वेदी पर।
बिना लिए गर्दन का मोल,
कलम आज उनकी जय बोल।
देशभक्ति पर आधारित इस कविता ने नौजवानों को देश पर मर मिटने के लिए तत्पर कर दिया। परिणाम स्वरुप स्वाधीनता की लड़ाई में अनेकों क्रांतिकारी, देशभक्त कूद पड़े अंग्रेजों से मोर्चा लेने के लिए।

गीतकार अमरनाथ अजेय, दिवाकर द्विवेदी ‘मेंघ’ , सरोज सिंह, क्रांतिकारी कवि प्रदुम्न त्रिपाठी, धर्मेश चौहान, दयानंद दयालु और विकास वर्मा ने एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनाकर लोगों को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया। अध्यक्षता कर रहे पंडित ओम प्रकाश त्रिपाठी एवं मुख्य अतिथि सुशील कुमार ‘राही‘ ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की रचनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला डालते हुए कहा कि दिनकर जी की रचनाएं भारतीय संस्कृति और समाजोत्थान के लिए लिखी गई जो आज भी प्रासंगिक हैं। संचालन संस्था के संयोजक कवि राकेश शरण मिश्र ने किया।
इसके पूर्व मां सरस्वती एवं रामधारी सिंह दिनकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उपस्थित कवियों ने उन्हें शत-शत नमन किया । मौसम के विपरीत परिस्थितियों में भी देर रात तक चली जयंती समारोह में साहित्य में अभिरुचि रखने वाले दर्जनों कविता प्रेमी मौजूद रहे।

