श्रद्धा से करें श्राद्ध कर्म

रॉबर्ट्सगंज,सोनभद्र। पितृपक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध करना भारतीय परंपरा है।
इस समय पित्र पक्ष चल रहा है और लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध कर्म करके देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण मुक्त हो रहे हैं। परंपरा के अनुसार पितृपक्ष (16 दिनों तक) पित्रअपने परिजनों के बीच रहकर अन्न और जल ग्रहण कर संतुष्ट हो रहे हैं।
रॉबर्ट्सगंज नगर के प्रथम नागरिक जगन्नाथ साहू के पौत्र शिव शंकर प्रसाद केसरवानी जिनका जन्म 27 फरवरी 1911 (सोमवार महाशिवरात्रि)को रॉबर्ट्सगंज नगर में हुआ था, रॉबर्ट्सगंज नगर के इतिहास में पुराने दस्तावेजों के संग्राहक, समाजसेवा, राजनीति, साहित्य, संस्कृति, पर्यटन में रुचि रखने वाले नगर की इस विभूति ने अपने जीवन काल में बताया था कि-“हमारे पूर्वज वर्तमान कौशांबी जनपद के नगर पालिका क्षेत्र भरवारी से आकर रॉबर्ट्सगंज नगर के पश्चिम अदलगंज कस्बे में बस गए थे।

स्वर्गीय शिव शंकर प्रसाद केसरवानी व उनकी पत्नी स्वर्गीय पार्वती देवी।

मेरे बाप- दादा कई पटटीदार थे और बड़ा परिवार था। परिवार में सभी बड़े- बुजुर्गों की इच्छा थी कि अपने सभी ज्ञात – अज्ञात पितरों का गयाजी में पिंडदान कर 108 कुल और 7 पीढ़ियों का उद्धार किया जाए।
लेकिन कालचक्र की ऐसी गति चली की मेरे दादा जगन्नाथ साहू, पिता प्यारेलाल इस दायित्व का निर्वहन नहीं कर पाए, मेरी हार्दिक इच्छा थी कि मैं अपने सभी पूर्वजों का गया में श्राद्ध करूं। दुर्भाग्यवश मेरी पत्नी पार्वती देवी ( जिनका जन्म 25 मार्च रामनवमी सन 1915 में ग्राम रजधन में हुआ था और विवाह 3 फरवरी सन 1930 बसंत पंचमी के दिन हुआ था) की मृत्यु 5 जून 1976 को हो गई। छोटे पुत्र के विवाह के पश्चात मैंने अपनी पांचो पटटीदारों को बुलाया और उनके सामने पितरों को गयाजी में श्राद्ध करने का प्रस्ताव रखा। सभी लोग मान गए और तैयारियां शुरू हो गई। उसी वर्ष पितृपक्ष में हम लोग सारे क्रियाओं को विधि विधान से आयोजित करके पूर्वजों का श्राद्ध करने के लिए गयाजी पहुंचे। जिस समय श्राद्ध कर्म चल रहा था। मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मेरे बाप- दादा सहित मेरी पत्नी सहित अन्य पित्रगण जिनको मैंने देखा था, जिनको मैं पहचानता था वे सभी मेरे सामने प्रसन्नचित्त मुद्रा में बैठे हुए थे।
श्राद्ध कर्म करने के पश्चात वाल्मीकि कृत रामचरितमानस का वह प्रसंग मुझे याद आया जब भगवान श्री राम अपने गयाजी के इसी तक पर बैठकर अपने स्वर्गवासी पिता चक्रवर्ती राजा दशरथ श्राद्ध किया था और महाराजा दशरथ ने स्वयं उन्हें दर्शन दिया था। आज मुझे इस रामायण कालीन कथा पर पूरी तरह विश्वास हो गया था।
घर लौट कर हम सभी ने मिलकर सामूहिक भोज का आयोजन किया।
आचार्य पंडित संतोष धर द्विवेदी के अनुसार-” पितरों का श्राद्ध श्रद्धा पूर्वक करना चाहिए ताकि वे संतुष्ट होकर अपने लोक को प्रस्थान कर सके।”
पितृपक्ष अपने पूर्वजों को याद करने का पर्व है 16 दिन तक चलने वाले इस पर्व पर लोग अपने पूर्वजों श्रद्धा पूर्वक याद करते हुए
उनके नाम पर दोनिया काढ कर और पूर्वजों को संतुष्ट कर रहे हैं।
नगर का इस समय भक्ति पूर्ण माहौल है, लोग अपने पूर्वजों को गयाजी बैठाने के लिए समूह में नगर भ्रमण करते दिखाई दे रहे हैं और बैंड बाजा की धुन पर रघुपति राघव राजा राम के भजन से गुंजायमान हो रहा है रॉबर्ट्सगंज नगर।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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