श्याम पाठक
ओबरा, सोनभद्र। दशकों पूर्व जब एशिया के सबसे बड़े ताप विद्युत गृह ओबरा परियोजना का निर्माण हुआ तो परियोजना में कार्यरत कर्मचारियों के लिए आवासीय परिसर का निर्माण हुआ। आवासीय परिसर में स्थित आवासों, सड़कों व नालियों की साफ-सफाई व देखरेख का कार्य ओबरा परियोजना के सिविल अनुरक्षण खंड के अधीन आता है। पूर्व में ओबरा नगर पंचायत के गठन से पूर्व आवासीय परिसर में साफ-सफाई व सड़कों के गड्ढों का मरम्मत कार्य ओबरा परियोजना के सिविल अनुरक्षण खंड द्वारा सुचारू रूप से किया जाता रहा ,लेकिन नगर पंचायत ओबरा के गठन के बाद ओबरा परियोजना द्वारा निर्मित सड़कों व नालियों के प्रति उदासीन रवैये ने 90% सड़कों का अस्तित्व ही खत्म कर दिया है। नगर पंचायत ओबरा के जद में आने वाले परियोजना के सड़कों पर तो नगर पंचायत द्वारा इंटरलॉकिंग आदि बिछाकर सड़कों का अस्तित्व बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन परियोजना के वे सड़क जो नगर पंचायत के जद के बाहर हैं ,उन सड़कों को देखकर गड्ढों में सड़क की अनुभूति होती है। ओबरा परियोजना के खस्ताहाल सड़कों के क्रम में सीआईएसफ गेट से अंतिम चेकपोस्ट तक जाने वाली सड़क लगभग 1500 मीटर, बिल्कुल जर्जर हो चुकी है। सड़कों पर स्थित बड़े-बड़े गड्ढे देखकर लगता ही नहीं कि यहां कोई सड़क भी थी।

गौरतलब है कि ओबरा परियोजना के आसपास के आदिवासी क्षेत्रों को ओबरा व अन्य क्षेत्रों से जुड़ने के लिए ओबरा परियोजना के जल विद्युत गृह के संचालन हेतु निर्मित ओबरा डैम को क्रास करके ही आवागमन करना होता है ।यहां बताते चलें कि रेणुका पार के आदिवासी क्षेत्रों में दर्जनों गांवों में हजारों की आबादी निवास करती है, जिनको अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए एवं अन्य सरकारी विभागों के कार्यालयों में आने जाने के लिए यही एक मार्ग है, जो ओबरा परियोजना के सिविल अनुरक्षण खंड के उदासीनता के कारण बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुका है।
रेणुका पार के क्षेत्रों में कार्यरत स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, वन विभाग ,राजस्व विभाग के कर्मचारी भी इसी रास्ते से आते जाते हैं , जिनको सीआईएसफ गेट से डैम चेकपोस्ट तक की क्षतिग्रस्त सड़क के कारण कार्य स्थल पर पहुंचने में विलंब के साथ चोटिल भी होना पड़ता है। यहां बताते चलें कि सीआईएसएफ गेट से डैम क्रास करके आने जाने वाले वाहनों को परियोजना प्रशासन द्वारा डैम क्रासिंग गेट पास जारी किया जाता है ,जिसका प्रति चक्कर के दर से शुल्क भी जमा कराया जाता है । शुल्क लेने के बावजूद परियोजना प्रशासन द्वारा क्षतिग्रस्त सड़कों के मरम्मत नहीं कराए जाने से राहगीरों में काफी रोष व्याप्त है, तो वहीं प्रतिदिन आने जाने वाले शिक्षा विभाग, वन विभाग व राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने और रेणुका पार के आदिवासीयों ने ओबरा परियोजना प्रशासन से अभिलंब क्षतिग्रस्त मार्ग की मरम्मत की मांग की है।
